खगोलविदों ने खोजी पृथ्वी के आकार की 'अलग दुनिया', ज्वालामुखियों से ढके होने की संभावना
खगोल वैज्ञानिकों को हमारे सौर मंडल से बाहर एक ऐसी दुनिया का पता चला है, जो पूरी तरह से ज्वालामुखियों से भरा हो सकता है। यह पृथ्वी के आकार जितना ही विशाल है और एक बौने तारे के चक्कर काट रहा है।

अंतरराष्ट्रीय खगोलविदों की एक टीम ने एक ऐसे एक्सोप्लैनेट का पता लगाया है, जिसका आकार पृथ्वी जैसा है और इसके ज्वालामुखियों से भरे होने की संभावना है। एक्सोप्लैनेट उसे कहते हैं, जो हमारे सौर मंडल से बाहर होते हैं। इस एक्सोप्लैनेट को 'LP 791-18 d' कहा जा रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष संगठन नासा ने इसकी जानकारी दी है।
खगोलविदों ने खोजी पृथ्वी के आकार की 'अलग दुनिया'
खगोलविदों ने पृथ्वी के आकार की जो अलग दुनिया खोजी है, वहां उतने ही ज्वालामुखीय विस्फोट होने की संभावना है, जैसे कि हमारे सौर मंडल में बृहस्पति के चंद्रमा Io में होते हैं, जो कि हमारे सौर मंडल में सबसे अधिक ज्वालामुखीय रूप से सक्रिय क्षेत्र है।
पृथ्वी की त्रिज्या से 1.03 गुना बड़ा
शोधकर्ताओं ने इस नई दुनिया का पता लगाने के लिए नासा के ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (टीआएएस) और रिटायर्ट स्पिट्जर स्पेस टेलीस्कोप से मिले डेटा का इस्तेमाल किया है और इसमें धरती पर स्थित वेधशालाओं की भी मदद ली गई है। इस डेटा का उन्होंने जो विश्लेषण किया है, उसके मुताबिक इसकी त्रिज्या पृथ्वी से 1.03 गुना और द्रव्यमान .9 गुना है।
ज्वारीय रूप से बंद है एक्सोप्लैनेट
इस खोज के बारे में साइंटिफिक जर्नल नेचर में शोध पत्र प्रकाशित हुआ है। मॉन्ट्रियल यूनिवर्सिटी स्थित ट्रॉटियर इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन एक्सोप्लैनेट्स में खगोल विज्ञान के प्रोफेसर और इस शोध पत्र के को-ऑथर ब्योर्न बेनेके ने कहा है, 'LP 791-18 d ज्वारीय रूप से बंद है, इसका मतलब ये हुआ कि इसका एक ही हिस्सा लगातार इसके तारे की ओर है....'
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इस वजह से बन सकती है पानी की संभावना
उनके मुताबिक, 'दिन वाला हिस्सा संभावित रूप से बहुत ज्यादा गर्म होगा, जहां सतह पर पानी की उपस्थिति की संभावना नहीं है। लेकिन, हमें संदेह है कि पूरे ग्रह पर होने वाली ज्वालामुखीय गतिविधियों की मात्रा एक वातावरण को बनाकर रख सकती है, जिससे रात वाले हिस्से में पानी को संघनित रहने की संभावना बन सकती है।'
ज्वालामुखी वातावरण का प्रमुख स्रोत है
इस शोध के एक और को-ऑथर स्टेफेन केन का कहना है, 'ज्वालामुखी क्यों महत्वपूर्ण है? ग्रहों के वातावरण में योगदान देने वाला यह प्रमुख स्रोत है और एक वातावरण होने पर आपके पास सतह वाला तरल पानी हो सकता है- हम जानते हैं कि एक जीवन होने के लिए यह एक आवश्यकता है....'
अभी बहुत कम हिस्सा ही खोजा गया
लेकिन, इस 'अलग दुनिया' की इसके तारे के साथ जो विशेष स्थिति है, उसकी वजह से यह संभावना है कि अगर वहां तरल पानी मौजूद है तो वह उसके एक ही हिस्से में होगा, जो कि पृथ्वी जैसी स्थिति नहीं है। इस शोध के एक और को-ऑथर करेन कॉलिन्स के मुताबिक, 'अभी तक एक्सोप्लैनेट का एक छोटा सा ही हिस्सा खोजा गया है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह जीवन की स्थितियों के लिए अनुकूल है....'
दूसरे ग्रहों पर जीवन का पता लगने की जगी उम्मीद
उन्होंने कहा, 'LP 791-18 d की हमारी खोज हमें और उम्मीदें देता है कि एक दिन हम किसी दूसरे ग्रह पर जीवन के संकेतों का पता लगा सकेंगे।' खगोलविदों ने जिस एक्सोप्लैनट को खोजा है, वह एक लाल बौने तारे की परिक्रमा कर रहा है, जो कि 90 प्रकाश वर्ष दूर है। (स्रोत: जेट प्रपल्शन लैबोरेटरी, नासा)












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