'भागता नहीं तो मुझे भी नजीबुल्लाह की तरह बिजली के खंभे से लटका देता तालिबान'

'भागता नहीं तो मुझे भी नजीबुल्लाह की तरह बिजली के खंभे से लटका देता तालिबान'

काबुल, 19 अगस्त: अफगानिस्‍तान के सरकारी खजाने से लगभग 12 अरब रुपये लेकर गए राष्‍ट्रपति अशरफ गनी इन दिनों आलोचनाओं का शिकार हो रहे हैं। अशरफ गनी रविवार (15 अगस्त) को अचानक अफगानिस्तान से भाग गए। उसके दिन बाद 18 अगस्त को लोगों को इस बात का पता चला कि राष्‍ट्रपति अशरफ गनी संयुक्त अरब अमीरात में ठहरे हुए हैं। बुधवार (18 अगस्त) को एक वीडियो मैसेज जारी कर अशरफ गनी ने बताया कि काबुल को तालिबान ने घेर लिया था और वह रक्‍तपात को रोकने के लिए देश छोड़कर भागकर चले गए। अशरफ गनी ने कहा है कि अगर वह काबुल से नहीं भागते तो उनका भी हाल अफगानिस्‍तान के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नजीबुल्लाह की तरह होता।

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    'भागता नहीं तो तालिबान नजीबुल्लाह की तरह मारकर बिजली के खंभे से लटका देता'

    'भागता नहीं तो तालिबान नजीबुल्लाह की तरह मारकर बिजली के खंभे से लटका देता'

    अफगानिस्‍तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने काबुल से भागने के 3 दिन बाद 18 अगस्त को एक वीडियो संदेश जारी किया। इस वीडियो में अशरफ गनी ने कहा, "काबुल को रक्तपात और विनाश से बचाने के लिए मुझे अचानक अफगानिस्तान से बाहर निकलना पड़ा। सुरक्षा अधिकारी मुझे बार-बार चेतावनी दे रहे थे, आगाह कर रहे थे कि तालिबान मेरा भी वही हाल करना चाहते हैं, जो उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नजीबुल्लाह का किया था। इसलिए मैं बिना किसी सामान को लिए वहां से जल्दी निकल गया।''

    'अफगानिस्‍तान के राष्ट्रपति को फिर से सबके सामने फांसी देने वाले थे तालिबान'

    'अफगानिस्‍तान के राष्ट्रपति को फिर से सबके सामने फांसी देने वाले थे तालिबान'

    राष्ट्रपति अशरफ गनी ने अपने वीडियो मैसेज में कहा, ''तालिबान मुझे खोजने के लिए काबुल के चप्पे-चप्पे में थे। वे मुझे खोजने के लिए हर घर में तलाशी ले रहे थे। तालिबान ने 25 साल जो पहले हुआ, वही दोहराने वाले थे। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति को एक बार फिर लोगों की आंखों के सामने फांसी दी जाने वाली थी और ऐसा शर्मनाक इतिहास एक बार फिर दोहराया जाने वाला था। जो मैं नहीं चाहता था।

    तालिबान ने नजीबुल्लाह के साथ जो किया था, वो जान सिहर जाएंगे आप

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    अशरफ गनी का ये कहना कि ''मैं नजीबुल्लाह की तरह फांसी से बचने के लिए अचानक अफगानिस्तान भाग गया'' उनके डर को साफ-साफ दिखा रहा है। 25 साल पहले 1996 में तालिबान ने अफगानिस्‍तान के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नजीबुल्लाह के साथ जो किया था, उसको जान कोई भी सिहर जाएगा।

    1987 में सोवियत संघ नजीबुल्लाह को अफगानिस्तान का बनवाय था। राष्ट्रपति बनने के बाद नजीबुल्लाह ने फिर से अफगानिस्तान का नया संविधान लिखवाया। लेकिन दिसंबर 1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद नजीबुल्लाह को मिलने वाली सारी मदद बंद हो गई थी। हालात इतने खराब हो गए थे कि नजीबुल्लाह देश छोड़कर भाग भी नहीं पाएं और 1996 तक कंपाउंड में ही रहने को मजबूर हो गए थे।

    28 सितंबर 1996, जब ट्रैफिक लाइट से लटके हुए थे नजीबुल्लाह

    28 सितंबर 1996, जब ट्रैफिक लाइट से लटके हुए थे नजीबुल्लाह

    इसी दौरान अफगानिस्तान में तालिबान खड़ा हुआ और धीरे-धीरे उसने हर शहर पर अपना कब्जा शुरू कर लिया। कंपाउंड में छिपे नजीबुल्लाह वहां से कभी भी बाहर ही नहीं निकल पाएं। द न्यूयॉर्क टाइम्स छपी रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान के कब्जा करने के बाद कंपाउंड में छिपे नजीबुल्लाह ने शॉर्टवेव रेडियो पर यूएन की पोस्ट से संपर्क करके अपने लिए सुरक्षा मांगी थी। लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली थी। तालिबान ने नजीबुल्लाह को अपने साथ चलने का ऑफर दिया था लेकिन उन्होंने मना कर दिया था।

    नजीबुल्लाह ने जब बात नहीं सुनी तो तालिबान ने उन्हें मार दिया। 28 सितंबर 1996 में नजीबुल्लाह को मारकर काबुल के आरियाना चौक में बिजली के खंभे से तालिबान लड़ाकों ने ट्रैफिक लाइट से उन्हें लटका दिया था। इतना ही नहीं बिजली के खंभे पर टांगने से पहले उन्हें एक ट्रक के पीछे बांधकर सड़कों पर घंटों तक घसीटा गया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान ने नजीबुल्लाह के सिर पर गोली मारी थी। नजीबुल्लाह के साथ उनके भाई शाहपुर अहमदजाई को भी तालिबान ने उसी खंभे से लटका दिया था।

    अफगानिस्तान को कैसे ठीक करना है, ये अच्छे से जानते थे अशरफ गनी

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    अगर किसी को पता था कि अफगानिस्तान को कैसे ठीक किया जाए, तो वह अशरफ गनी थे। जी हां, 2014 में राष्ट्रपति बनने से पहले अशरफ गनी ने अपना अधिकांश जीवन यह अध्ययन करने में बिताया था कि गरीब देशों में विकास को कैसे बढ़ावा दिया जाए।

    अशरफ गनी कोलंबिया विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट के साथ फुलब्राइट विद्वान थे। अशरफ गनी ने विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र में कार्यकाल से पहले अमेरिका के कुछ विशिष्ट शैक्षणिक संस्थानों में भी पढ़ाया था। बाद में अशरफ गनी ने "फिक्सिंग फेल स्टेट्स: ए फ्रेमवर्क फॉर रिबिल्डिंग ए फ्रैक्चर्ड वर्ल्ड" का सह-लेखन भी किया था।

    'मैं पैसे लेकर भागा हूं...ये आरोप बेबुनियाद है: अशरफ गनी

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    रूसियों ने दावा किया कि उन्होंने चार कारों और नकदी से भरे एक हेलीकॉप्टर के साथ अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी को छोड़ा था। इस दावे को अफरफ गनी ने नकार दिया है। अशरफ गनी ने कहा, 'मैं अफगानिस्तान से निकलते वक्त सिर्फ एक वेस्‍टकोट और कुछ कपड़े लेकर गया था। मेरी चारित्रिक हत्‍या करने की कोशिश की जा रही है। कहा जा रहा है कि मैं पैसा लेकर भागा हूं। लेकिन मैं बता दूं कि ये आरोप बेबुनियाद हैं। आप चाहे तो कस्‍टम विभाग के अधिकारियों से भी पूछ सकते हो। वे आधारहीन हैं।'

    'अफगानिस्तान से निकलते वक्त मैं तो जूते भी नहीं पहन सका था'

    'अफगानिस्तान से निकलते वक्त मैं तो जूते भी नहीं पहन सका था'

    राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा, ''मैं इतनी जल्दबाजी में अफगानिस्तान से निकला था कि अपने सैंडल उतारकर उनकी जगह पर जूते भी नहीं पहन सका था। मुझे अफगानिस्‍तान से बाहर ले जाया गया। मैंने सरकारी अधिकारियों की सलाह पर अफगानिस्‍तान छोड़ा।''

    बता दें कि अंतरराष्ट्रीय पुलिस से अशरफ गनी को गिरफ्तार करने की भी मांग की जा रही है। तजाकिस्तान में अफगानिस्तान के राजदूत मोहम्मद जहीर अघबार ने राष्ट्रपति अशरफ गनी पर सरकारी कोष से 16.9 करोड़ डॉलर की चोरी का आरोप लगाया है।

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