PM मोदी को बदनाम करने की फिर शुरू हुई मुहिम? जैक डोर्सी तो सिर्फ ट्रेलर है, 2019 में किए गये थे करोड़ों खर्च

Narendra Modi News: ट्विटर के पूर्व सीईओ जैक डोर्सी, जिनके तहत माइक्रोब्लॉगिंग साइट एक 'क्राइम सीन' जैसा दिखता था, और जिनके समय में ट्विटर, डार्क सीक्रेट्स, चाइल्ड पोर्न, भारत विरोधी और विध्वंसक ताकतों की मिलीभगत से भरा हुआ था, उन्होने भारत सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।

जैसा की तय था, जैक डोर्सी ने अपना मुंह खोला और भारत के कथित सेक्युलर जमात ने उनते बयान को आधार बनाकर ना जाने क्या क्या अनाप-शनाप आरोप मोदी सरकार पर लगाए। किसी ने मोदी को हिटलर कहा, तो किसी ने संविधान को ताक पर रखने वाला शासक... किसी ने कुछ तो किसी ने कुछ। देश हो या विदेश... हर जगह मोदी सरकार को बदनाम करने की कोशिश की गई और जितनी तेजी से ये सबकुछ हुआ, उससे कुछ शक पैदा हो रहे हैं।

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शक इस बात को लेकर है, कि क्या 2024 में होने वाले चुनाव से पहले, क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार को बदनाम करने की उसी तरह की कोशिश तो नहीं की जा रही है, जैसी कोशिश 2019 में की गई थी। आईये, एक बार फिर से समझने की कोशिश करते हैं, कि 2019 में जब भारत में लोकसभा चुनाव होने वाले थे, उससे पहले मोदी सरकार छवि को तार तार करने के लिए अमेरिका ने किस तरह से मुहिम चलाई थी और कैसे करोड़ों रुपये खर्च किए थे।

2019 में चलाई गई थी मुहिम

संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश विभाग के एक पूर्व वरिष्ठ राजनयिक माइक बेंज ने इसी साल फरवरी में दावा किया था, कि अमेरिकी विदेश नीति स्टेब्लिशमेंट में पक्षपाती तत्वों ने भारत के 2019 के आम चुनावों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ अभियान चलाया था।

बेंज के मुताबिक, पीएम मोदी के तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ उत्कृष्ट संबंध साझा करने के बावजूद, प्रशासन के भीतर ये तत्व, सोशल मीडिया टेक दिग्गजों, प्रभावशाली थिंक टैंक और विदेश विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर, पीएम मोदी की चुनावी सफलता को खराब करने के लिए काम कर रहे थे। इसके तहत पीएम मोदी और उनकी सरकार के खिलाफ 'फर्जी कैम्पेन' चलाए गये।

द संडे गार्जियन ने माइक बेंज के हवाले से कई सनसनीखेज दावे किए थे।

माइक बेंज ने द संडे गार्जियन को बताया, कि विदेश मीडिया में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अनाप शनाप हेडलाइंस के साथ खबरें चलाई थीं। उदाहरण के तौर पर..

बीबीसी ने लिखा था- शोध से पता चलता है कि भारत में फ़र्ज़ी ख़बरों के पीछे राष्ट्रवाद एक प्रेरक शक्ति है। (नवंबर 2018)

Time: भारत की सत्तारूढ़ पार्टी के स्वयंसेवक चुनावों से पहले व्हाट्सएप का उपयोग फर्जी खबरों को बढ़ावा देने के लिए कैसे कर रहे हैं? (जनवरी 2019)

Quartz: भारत में फेक न्यूज के फैलने का सिलसिला थमने का नहीं ले रहा है नाम, प्रधानमंत्री का अपना ऐप भी फैलाता है फर्जी खबरें। (जनवरी 2019)

न्यूयॉर्क टाइम्स: भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है। इसे कहते हैं फेक न्यूज। (अप्रैल 2019)

अटलांटिक: गलत सूचना भारत के चुनाव को खतरे में डाल रही है (अप्रैल 2019)

माइक बेंज ने कहा, कि 'गलत सूचना' एक सेंसरशिप विधेय है। उन्होंने कहा, कि जब अमेरिकी विदेश विभाग स्टेब्लिशमेंट कहता है, कि किसी देश में 'Misinformation Crisis' है, तो वो अमेरिका के टेक दिग्गजों के लिए एक सकेत होता है, जिसके बाद ये टेक कंपनियां, अमेरिकी विदेश विभाग के ग्लोबल इंगेजमेंट सेंटर्स, अलग अलग थिंक टैंक, जैसे कि अटलांटिक काउंसिल्स डिजिटल फॉरेंसिक रिसर्च लैब या फिर काउंटर मिसइन्फॉर्मेशन USAID के साथ मिलकर उस देश के खिलाफ एक कैम्पेन चलाने लगते हैं। और इसके लिए उन्हें पैसों का भुगतान किया जाता है।

उन्होंने कहा, कि इस कैम्पेन के तहत साल 2019 में वाट्सएप पर सेंसर किया गया, क्योंकि इन्हें पता था, कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समर्थक वाट्सएप के जरिए मोदी के समर्थन में प्रचार प्रसार करते हैं।

उन्होंने कहा, कि अमेरिकी विदेश विभाग स्टेब्लिशमेंट फेसबुक पर निर्भर है, जो व्हाट्सएप का मालिक है, और इसके इशारे पर भारी संख्या में वाट्सएप मैसेज को ब्लॉक कर दिया जाता है। 2019 में यही किया गया और वाट्सएप पर मोदी के समर्थन वाली सामग्रियों को फैलने से रोका गया।

उन्होंने कहा, कि 2019 में भारत चुनाव में पीएम मोदी के खिलाफ कैम्पेन चलाने में वाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब और भी कई अलग अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया।

हालांकि, उन्होंने ये बताने से इनकार कर दिया, कि क्या मोदी सरकार के खिलाफ कैम्पेन चलाए जा रहे हैं, इसको लेकर ट्रंप प्रशासन या फिर अमेरिका के विदेश विभाग को जानकारी थी या नहीं। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा, कि राष्ट्रपति ट्रंप की पकड़ ऐसे तत्वों के ऊपर नहीं था और ट्रंप की पॉलिसी में मोदी को बदनाम करना नहीं था, क्योंकि दोनों नेताओं के बीच काफी अच्छे संबंध थे।

उन्होंने कहा, कि मोदी सरकार को बदनाम करने की कोशिश इसलिए की गई थी, क्योंकि ऐसे तत्वों का मानना था, कि भारत में नरेन्द्र मोदी काफी ज्यादा लोकप्रिय हैं और वो एक मजबूत सरकार का गठन करने जा रहे हैं, जो अपनी विदेश नीति को लेकर सख्त होगी। ऐसे तत्वों का मानना था, कि मोदी सरकार भारत के हितों के साथ समझौता नहीं करेगी, लिहाजा प्रधानमंत्री मोदी की छवि को खराब करके भारत की विदेश नीति को कमजोर किया जाए।

लिहाजा ट्विटर के सह-संस्थापक और पूर्व सीईओ जैक डोर्सी ने जो भारत के खिलाफ कहा है, उसके बाद सवाल उठ रहे हैं, कि क्या 2024 में होने वाले चुनाव से पहले क्या एक बार फिर से ऐसे तत्वों ने मोदी सरकार के खिलाफ कैम्पेन चलाना शुरू कर दिया है?

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