अफगान सैनिक ने मारा अमेरिकी जनरल को लेकिन भारत में टेंशन

काबुल स्थित मिलिट्री एकेडमी में अचानक ही अफगानिस्तान की आईएसएएफ का एक सैनिक दाखिल हो गया और उसने मेजर जनरल हैरॉल्ड जे ग्रीन पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। आईएसएफ की मानें तो यह घटना ब्रिटिश मिलिट्री ट्रेनिंग एकेडमी में हुई है।
अमेरिका के लिए बुरी खबर
अमेरिका के लिए यह बुरी खबर इसलिए भी है क्योंकि मेजर जनरल हैरॉल्ड 9/11 हमलों के बाद पिछले 13 वर्षों में मारे जाने वाले दूसरे अफसर हैं। 9/11 हमलों के दौरान अमेरिका ने लेफ्टिनेंट जनरल टिमोथी जोसेफ को खोया था। अफगान सैनिक की ओर से इस गोलीबारी में सात अमेरिकी सैनिक, पांच ब्रिटिश और एक जर्मन सैनिक के घायल होने की खबरें हैं।
पेंटागन के स्पेाक्सपर्सन रियर एडमिरल जॉन किरबी ने वाशिंगटन में बताया कि हमले में हमारे एक जनरल की मौत हो गई है। किरबी ने कहा कि पिछले 13 सालों में मारे गए वह सबसे उच्चस्तरीय अधिकारी हैं। किरबी की मानें तो मंगलवार के हमले में घायलों की संख्या 15 तक हो सकती है।
क्यों बढ़ी भारत की चिंताएं
किरबी की ओर से जो जानकारी दी गई है उसके मुताबिक हमलावर अफगान सैनिक था। हालांकि अफगान अधिकारियों ने इस बात से साफ इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि हमलावर अफगान सेना की वर्दी में आया शख्स बताया था और कहा था कि वह सैनिक नहीं था।
नाटो फोर्सेज तालिबान से 13 साल तक संघर्ष करने के बाद वापसी की तैयारी में हैं और ऐसे में मंगलवार को हुई गोलीबारी इस बात की ओर से इशारा कर रही है कि कहीं न कहीं अफगान सेना आतंकियों के आगे कमजोर है।
विशेषज्ञों की मानें तो जब अमेरिकी के एक टॉप अफसर को निशाना बनाया जा सकता है तो हो सकता है कि आने वाले समय में आईएसएएफ के कुछ सैनिक भी आतंकियों के सामने आत्मसमर्पण कर दें। अगर ऐसा हुआ तो भारत पर सीधे तौर पर इसका प्रभाव पड़ेगा।
करजई ने की निंदा
तालिबान ने हमले के लिए जिम्मेदारी नहीं ली है। राष्ट्रपति हामिद करजई ने हमले की निंदा करते हुए, इसे अफगान और नाटो अधिकारियों के खिलाफ कायराना हमला करार दिया।












Click it and Unblock the Notifications