भारत का तेजस दुनियाभर में मचा रहा धूम, अब अमेरिका भी मुंहमांगी कीमत देने को है तैयार
नई दिल्ली, 07 अगस्तः भारत का लड़ाकू विमान तेजस धूम मचा रहा है। इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती ही जा रही है। बड़े-बड़े देश इसे खरीदने को आतुर दिख रहे हैं। रक्षा हथियारों का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर अमेरिका भी पूरी तरह भारत में विकसित इस लड़ाकू विमान को खरीदने के लिए भारत से डील कर रहा है। इसके अलावा आस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और फिलीपींस समेत छह देशों ने भारत के तेजस विमान को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है।

6 बड़े देशों ने तेजस खरीदने में दिखाई दिलचस्पी
रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा, अर्जेंटीना, आस्ट्रेलिया, मिस्र, अमेरिका, इंडोनेशिया और फिलीपींस भी सिंगल इंजन वाले जेट में रुचि दिखा रहे है। रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोकसभा को यह जानकारी दी। रक्षा राज्य मंत्री भट्ट ने अपने बयान में कहा कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL एक इंजन वाले इस फाइटर जेट का निर्माण करती है।

मलेशिया को 2 सीटर तेजस बेचेगा भारत
पिछले साल अक्टूबर में रॉयल मलेशियाई वायु सेना ने 18 जेट विमानों के प्रस्ताव के अनुरोध का जवाब दिया था, जिसमें तेजस के 2 सीटों वाले संस्करण को बेचने की पेशकश की गई थी। केंद्र सरकार विदेशी रक्षा उपकरणों पर भारत की निर्भरता को कम करने की इच्छुक है। इसके अलावा सरकार भारत में बने जेट विमानों के निर्यात के लिए राजनयिक प्रयास भी कर रही है।

रूसी मिग के बदले तेजस खरीद रहा मलेशिया
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के लिए 83 तेजस हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) खरीदने के वास्ते पिछले साल फरवरी में एचएएल के साथ 48,000 करोड़ रुपये का करार किया था। HAL को इन विमानों की 2023 से डिलीवरी शुरू करनी है। मलेशिया अपने पुराने रूसी मिग-29 लड़ाकू विमानों को बदलने के लिए तेजस विमान खरीद रहा है। भट्ट ने कहा, 'एलसीए विमान में रुचि दिखाने वाले अन्य देशों में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, मिस्र, अमेरिका, इंडोनेशिया और फिलीपीन हैं।'

राफेल से भी अधिक तेज है तेजस
तेजस एक साथ 10 लक्ष्यों को ट्रैक कर उन पर निशाना साधने में सक्षम है। यह बेहद कम जगह यानी 500 मीटर से कम रनवे पर टैकऑफ करने की क्षमता रखता है। यह भारत में बना सबसे हल्का फाइटर जेट है। इसमें 6 तरह की मिसाइलें तैनात हो सकती हैं। इसका वजह सिर्फ 6500 किलो है। विमान का वेट कम होने की वजह से यह समुद्री पोतों पर भी आसानी से लैंड और टेक ऑफ कर सकता है। यही नहीं इसकी हथियार ले जाने की क्षमता MiG-21 से दोगुनी है। अगर तेजी की बात की जाए तो राफेल भी इसके सामने कहीं नहीं ठहरता। तेजस की स्पीड राफेल से 300 किलोमीटर प्रति घंटा ज्यादा है।

अटल बिहारी वाजपेयी ने किया नामांकरण
इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में हलके फाइटर विमान यानी LCA को शामिल करने की तैयारी 1983 में ही शुरू हो गई थी। सरकार की हरी झंडी मिलते ही भारतीय वैज्ञानिक अपने मिशन को अंजाम देने में जुट गए थे। करीब 18 सालों की कड़ी मेहनत के बाद जनवरी 2001 को पहली बार इस स्वदेशी फाइटर जेट ने हिंदुस्तान के आसमान में उड़ान भरी थी। इस विमान का नाम तेजस तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दिया था। तेजस नाम रखते वक्त प्रधानमंत्री वाजपेयी ने कहा था कि ये संस्कृत शब्द है, जिसका मतलब 'चमक' है।

मलेशिया में तेजस बना था नंबर-1
बीते महीने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक आर माधवन ने एक इंटरव्यू में बताया था कि मलेशिया अपने जहाजी बेड़े में तेजस विमान को शामिल करने जा रहा है। भारत के लड़ाकू विमान तेजस ने चीन के जेएफ-17 विमान, दक्षिण कोरिया के एफए-50 और रूस के मिग-35 के साथ-साथ याक-130 को पीछे छोड़कर पहली पोजिशन हासिल की। मलेशिया ने भारतीय विमान को पसंद किया है। मलेशिया के फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए भारत में बने स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस को चुना गया है।

पांचवीं पीढ़ी के विमान तैयार कर रहा भारत
बता दें कि भारत पांचवीं पीढ़ी के मध्यम वजन वाले डीप पेनेट्रेशन फाइटर जेट बना रहा है। इस प्रोजेक्ट में करीब 5 बिलियन डॉलर्स का खर्च आएगा। पांचवीं पीढ़ी के मध्यम वजन वाले डीप पेनेट्रेशन फाइटर जेट का प्रोटोटाइप साल 2026 तक बन जाएगा। इसका उत्पादन साल 2030 में शुरू होगा। इस प्रोजेक्ट में फिलहाल रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ काम कर रहा है। जब एक बार उनकी तरफ से चीजें अंतिम रूप ले लेंगी तब हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड उसपर काम करना शुरू करेगा।












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