अमेरिका का पावर गेम, पुतिन की सनक... परमाणु जंग के काफी करीब आई दुनिया, क्या होगा भारत पर असर?

रूसी सरकार जो हासिल करना चाहती है, उसे मुखर होकर हर कीमत पर कर रही है, लेकिन पश्चिम इन संदेशों को सुनने और समझने की कोशिश ही नहीं कर रहा है।

नई दिल्ली, सितंबर 27: अमेरिका की पावर पॉलिटिक्स और रूसी राष्ट्रपति की सनक की वजह से दुनिया परमाणु युद्ध के काफी करीब पहुंच चुकी है, लेकिन पश्चिमी देश अभी भी रूस को उकसाने में लगे हुए हैं। जब व्लादिमीर पुतिन ने 21 सितंबर को रूसी टेलीविजन पर रिकॉर्डेट भाषण जारी किया था, उस वक्त उन्होंने साफ और स्पष्ट तौर पर तीन संदेश अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ पूरी दुनिया को दिया। पहला संदेश यह, कि परमाणु युद्ध का खतरा विश्वसनीय और गंभीर है। दूसरा यह, कि आंशिक लामबंदी और सैन्य परित्याग कानूनों में तेजी से बदलाव का मतलब रूस की अडिगता का संकेत है और पूर्ण लामबंदी के लिए एक कदम है। और तीसरा यह, कि राष्ट्रपति पुतिन यूक्रेन के दो क्षेत्र डोनेट्स्क और लुहान्स्क को रूस में मिलाकर ही दम लेंगे। लेकिन, पुतिन का पहला संदेश सबसे ज्यादा खतरनाक है और साफ साफ महसूस किया जा सकता है, कि अमेरिका की राजनीति और पुतिन की जिद दुनिया को सर्वनाश की तरफ ले जाने के लिए काफी है।

हार से बौखलाए हुए हैं पुतिन

हार से बौखलाए हुए हैं पुतिन

24 फरवरी को रूसी आक्रमण के साथ ही पश्चिमी देशों ने अरबों डॉलर के हथियार यूक्रेन को दिए हैं, लिहाजा सात महीने बाद भी रूस को यूक्रेन में जीत नहीं मिली, बल्कि रूस के लिए ये युद्ध जी का जंजाल बन गया है। लेकिन, पुतिन के लिए पीछा हटना भी अब मुमकिन नहीं है, लिहाजा पुतिन ने कहा, कि अब हमारा लक्ष्य इन दो क्षेत्रों का रूस में विलय कराना है और इसके लिए रूस ने जनमत संग्रह की शुरूआत भी कर दी है, जो आज शाम तक चलने वाली है। पुतिन इन दोनों क्षेत्रों का रूस में विलय करवाकर अब अपने देश की जनता को संदेश देना चाहते हैं, कि रूस ने जीत हासिल कर ली है, क्योंकि रूस में अब यूक्रेन युद्ध को लेकर काफी तेज आवाजें उठने लगी हैं। वहीं, रूसी राष्ट्रपति के भाषण में कई संकेत भी छिपे थे, जिसे पश्चिमी देशों के नीति निर्माताओं को समझने की जरूरत है, कि क्या उन्हें अगले कुछ हफ्तों और महीनों तक यूक्रेन युद्ध में किस तरह की मदद करनी है। पुतिन के भाषण के पीछे रूस की 2021 की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति थी, जिसमें 2035 तक की योजनाएं शामिल हैं। और यूक्रेन के संघर्ष पर पिछले साल पुतिन के लेख को सच मान लेना एक बड़ी गलती है और ये रूसी भव्य रणनीति के बाद दूसरे स्थान पर आते हैं।

नहीं सुन रहे हैं पश्चिमी देश?

नहीं सुन रहे हैं पश्चिमी देश?

रूसी सरकार जो हासिल करना चाहती है, उसे मुखर होकर हर कीमत पर कर रही है, लेकिन पश्चिम इन संदेशों को सुनने और समझने की कोशिश ही नहीं कर रहा है। रूस की नीति मशीन तब इन महत्वाकांक्षाओं और परीक्षणों के माध्यम से काम करती है, कि उन्हें किस कीमत पर हासिल किया जा सकता है। अक्सर पश्चिमी टिप्पणीकारों ने रूसी स्थिति और बयानबाजी को थालियों की टनकार बताकर खारिज कर दिया है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि उन्हें अक्सर इस तरह से अवगत कराया जाता है कि पश्चिमी राजनीतिक वर्ग कैसे बोलते हैं। लेकिन, अब पश्चिमी देशों को रूस की चेतावनी को अधिक गंभीरता से लेने और रूस के गुस्से को शांत करने की कोशिश करते हुए यूक्रेन को बचाने की कोशिश करने की आवश्यकता है, क्योंकि अब ज्यादा अवरोध रूस को परमाणु हथियार इस्तेमाल करने के लिए उकसा सकता है, क्योंकि रूसी राष्ट्रपति के हाथों में अब चुनिंदा विकल्प ही बचे हैं। उदाहरण के तौर पर जिस अमेरिका और पश्चिमी देशों ने आक्रमण के बाद यूक्रेन को अरबों डॉलर के हथियारों की आपूर्ति की, उसे आदर्श रूप से, यह एक आक्रमण से पहले ही करने की जरूरत थी, ताकि रूस को संकेत मिलता, कि यूक्रेन को किस तरह का समर्थन मिल रहा है और वो शायद आक्रमण करने से पहले सौ बार औ सोचता।

रूस की 2021 की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति

रूस की 2021 की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति

रूस ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति-2021 में सबसे महत्वपूर्ण ध्यान टेक्नोलॉजिकल चेंजेज,नेशनल सिक्योरिटी और आर्थिक संपदा पर दिया है। साफ तौर पर रूस के ध्यान में अमेरिका था, जो रूस की साम के पास और रूस से दूर भी अत्याधुनिक हथियारों के साथ पहुंच गया था। वहीं, रूसी सरकार ने देश के अंदर यह संदेश देने की भी कोशिश की, कि पश्चिमी संस्कृति रूसी संस्कृति पर हावी किया जा रहा है, लिहाजा रूस के लिए अमेरिका को दूर रखने के लिए यूक्रेन पर आक्रमण का ही एक मात्र विकल्प बचा था, ऐसा रूसी सरकार की दलील है और यूक्रेन पर रूसी आक्रमण से पहले और आक्रमण के बाद रूस ने अपनी इसी नीति को बढ़ाया है और 21 सितंबर को रूसी राष्ट्रपति के के दिए गये भाषण को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

पुतिन को नजरअंदाज करना अब खतरनाक!

पुतिन को नजरअंदाज करना अब खतरनाक!

रूस ने अब तक जितना नुकसान उठाया है, उससे वो बौखलाया हुआ है, लिहाजा अब रूसी फ्रस्टेशन को नजरअंदाज करना खतरे से कम नहीं है और अतीत में दुनिया पहले और दूसरे विश्वयुद्ध में इसे अच्छी तरह से देख चुकी है, जब हिटलर को लगातार नजरअंदाज करने की वजह से दुनिया को दूसरे विश्वयुद्ध में फंसना पड़ा और कई करोड़ लोग मारे गये। पुतिन ने अपने भाषण में साफ शब्दों में कहा कि, 'जो लोग हमें परमाणु बमों के नाम पर ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें ये जान लेनी चाहिए, कि हवा उनके दिशा में भी बह सकती है।' इसके साथ ही उन्होंने कहा, कि उनकी धमकी ब्लफ (फर्जी) नहीं है। यानि, साल 1945 में जापान पर परमाण हमला करने वाले अमेरिका के बाद रूस दूसरा देश बन सकता है, जो परमाणु बम का इस्तेमाल करे। लिहाजा, अब रूस और पश्चिमी देशों के बीच विश्वास का रिश्ता पूरी तरह से खत्म हो चुका है और अब रूस से बातचीत करने और किसी सकारात्मक नतीजे तक पहुंचने के लिए पश्चिमी देशों को काफी काम करने होंगे।

किस तरह का हो सकता है रूसी परमाणु बम?

किस तरह का हो सकता है रूसी परमाणु बम?

एक्सपर्ट्स का कहना है, कि यूक्रेन युद्ध में रूस टैक्टिकल या युद्ध क्षेत्र का परमाणु बम इस्तेमाल कर सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, टैक्टिकल परमाणु बम अपेक्षाकृत काफी छोटे होते हैं और इनका वजन 0.3 किलोटन से लेकर 100 किलोटन तक होती है। इन बमों को इस तरह से डिजाइन किया जाता है, कि इनका प्रभाव सीमित हो, लेकिन युद्ध जीतने में मदद कर सके। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है कि, किसी भी हाल में परमाणु बम का प्रभाव विनाशकारी ही होगा और यूक्रेन को बर्बाद करने वाला ही होगा। साल 1945 में अमेरिका ने हिरोशिमा पर जो परमाणु बम गिराय था, उसका वजन 15 किलोटन था, लेकिन हिरोशिमा में जो विनाश हुआ था, उसे सदियों तक नहीं भुलाया जा सकता है। हालांकि, रूस के लिए परमाणु बम का इस्तेमाल करना इतना भी आसान नहीं होगा।

क्या पुतिन के लिए बम गिराना होगा आसान?

क्या पुतिन के लिए बम गिराना होगा आसान?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि, पुतिन के लिए परमाणु बम का इस्तेमाल करना इतना भी आसान नहीं होगा, क्योंकि इसके विनाशकारी परिणाम के बारे में वो भी जानते हैं और समझते हैं और वो नहीं चाहेंगे, कि लाखों लोग तड़पकर मर जाएं, क्योंकि रूस का मकसद शायद ये नहीं है। वहीं, पिछले दिनों व्हाइट हाउस के पूर्व परमाणु नीति एक्सपर्ट जॉन वोल्फस्टल का अभी भी मानना है, पुतिन ऐसा नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि, यूक्रेन पर परमाण बम गिराने के बजाए अमेरिका को डराने के लिए पुतिन समुद्र में न्यूक्लियर बम गिरा सकते हैं, जिससे लोगों की जान नहीं जाएगी। या फिर रूस यूक्रेन के आसमान में इतनी ऊंचाई पर परमाणु बम का विस्फोट कर सकता है, जिससे यूक्रेन को नुकसान तो नहीं होगा, लेकिन संदेश पूरी दुनिया में चला जाएगा। लेकिन, उन्होंने कहा कि, अगर सबसे बुरी स्थिति की कल्पना करें, तो फिर ये हो सकता है, कि यूक्रेन के सबसे बड़े शहर पर सच में रूस परमाणु हमला कर दे, जिससे लाखों की संख्या में आम लोग मारे जाएंगे और यूक्रेनी नेतृत्व या तो मारा जाएगा या फिर आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर हो जाएगा। लेकिन, उन्होंने कहा कि, अगर पुतिन ऐसा करते हैं, तो पूरी दुनिया उनके खिलाफ हो जाएगी। वहीं, बात अगर भारत की करें, तो बम का प्रभाव भले ही सीधे तौर पर भारत पर नहीं पड़ेगा, लेकिन कई तरह की समस्याओं में भारत भी फंस जाएगा, जिसमें सबसे बड़ा डर जलवायु परिवर्तन का होगा।

फिर क्या करेगा पश्चिम?

फिर क्या करेगा पश्चिम?

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है, कि अगर रूस आखिरकार यूक्रेन पर परमाणु हमला कर ही देता है, तो फिर पश्चिमी देशों के लिए तय करना काफी मुश्किल हो जाएगा, कि वो इस परमाणु हमले का जवाब किस तरह से दें। क्योंकि, अमेरिकी नेतृत्व वाला नाटो रूस के सामने ना तो कमजोर दिखना चाहेगा और ना ही बिना विकल्पों के। लिहाज, एक बार अगर रूस न्यूक्लियर बम का इस्तेमाल करता है, तो फिर ये लड़ाई पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी हो सकता है और अमेरिका भी रूस के ऊपर टैक्टिकल परमाणु बम गिरा सकता है और दुनिया के लिए दो परमाणु बमों का फूटना बर्दाश्त से बाहर की चीज होगी। पहले से ही जलवायु परिवर्तन से जूझ रही दुनिया के पास फिर वापस लौटने के सारे रास्ते बंद हो जाएंगे, क्योंकि इस बार जलवायु परिवर्तन की वजह से पाकिस्तान में ग्लेशियर पिघलने से जो बाढ़ आई है, वो पूरी दुनिया के लिए गंभीर खतरे की घंटी है और पाकिस्तान की बाढ़ चेतावनी दे रही है, कि अगर नहीं सुधरे, तो फिर प्रकृति सुधरने का मौका भी नहीं देगी। लेकिन, अमेरिका के पावर गेम और पुतिन की सनक इस दुनिया को विनाश के किस रास्ते पर ले जाएगी, अभी तक कहना मुश्किल है।

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