अमेरिका: एच-1बी वीजा में बदलाव का प्रस्ताव, 90 हजार भारतीयों पर होगा असर
वाशिंगटन। अमेरिका के गृहमंत्रालय ने एच-1बी वीजा में बदलाव को लेकर अपना प्रस्ताव व्हाइट हाउस को भेज दिया है। ये प्रस्ताव एच-1बी वीधारकों के पति या पत्नी के काम करने के अधिकार के मौजूदा नियमों में बदलाव करने को लेकर है। इन प्रस्तावों को मान लिया जाता है तो एच-1बी वीजाधारकों के 90,000 से अधिक जीवनसाथियों को प्रभावित करेगा। इनमें बड़ी संख्या भारतीयों की है, जो एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिका में काम कर रहे हैं।

व्हाइट हाउस लेगा फैसला
अमेरिका के फॉरेन वर्क वीजा एच-1बी में बदलाव का औपचारिक प्रस्ताव मिलने के बाद इसे मंजूरी देने संबंधी फैसला व्हाइट हाउस को लेना है। व्हाइस हाउस से पहले इसको लेकर एक औपचारिक प्रस्ताव डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी उस फेडरल कोर्ट में पेश करेगा, जहां वीजा विवाद को लेकर मामला विचाराधीन है।

प्रक्रिया में लग सकता है लंबा समय
व्हाइट हाउस एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर पहले प्रस्ताव की समीक्षा करेगा। प्रस्ताव की समीक्षा करके इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सारी प्रक्रिया के पूरे होने में कई महीने का वक्त लग सकता है।यूएएस सिटीजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज के मुताबिक प्रस्तावित बदलाव समीक्षा और टिप्पणी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रभावी माने जाएंगे।

एच-1बी वीजा में बदलाव भारतीयों के लिए झटका क्यों?
एच-1बी वीजा एक गैर-प्रवासी वीजा है जो किसी कर्मचारी को अमेरिका में छह साल काम करने के लिए जारी किया जाता है। अमेरिका में कार्यरत कंपनियों को यह वीजा ऐसे कुशल कर्मचारियों को रखने के लिए दिया जाता है जिनकी अमेरिका में कमी हो। एच-1बी वीजा धारक पांच साल के बाद स्थायी नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं।
ट्रंप ने सत्ता में आने के बाद से ही एच-1बी वीजा के अंतर्गत आने वाले पेशों और इस वीजा श्रेणी के तहत रोजगार की परिभाषा को बदलने की बात कही थी। जिसको लेकर ये प्रस्ताव लाया गया है। अमेरिका में रह रहे हर चार एच-1 बी वीजाधारकों में से लगभग तीन भारतीय हैं, ऐसे में इसका सबसे ज्यादा असर भारत पर होगा। अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) की एक रिपोर्ट के मुताबिक एच-1 बी वीजा के तहतअक्टूबर, 2018 में अमेरिका में 419,637 विदेशी नागरिक काम कर रहे थे जिनमें से 309,986 भारतीय थे।












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