अमेरिका ने चीन पर आरोप लगाते हुए लिया ये बड़ा फैसला, बीजिंग भड़का
वाशिंगटन। अमेरिका और चीन के बीच की तनातनी किसी से छिपी नहीं है। दोनों देशों के बीच बीते कुछ समय से हालात ठीक नहीं चल रहे हैं। अब अमेरिका ने चीन को एक और झटका दे दिया है। जिससे बीजिंग भड़क चुका है।दरअसल अमेरिका ने चीन के शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों को हिरासत में रखे जाने को लेकर चीनी अधिकारियों के वीजा पर प्रतिबंध लगा दिया है।

अब अमेरिका के इस नए कदम से दोनों देशों का रिश्ते और खराब होने के आसार हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार जो चीनी अधिकारी और नेता उइगर मुस्लिमों को यातना गृह में रखे जाने के लिए जिम्मेदार हैं, उनके लिए वीजा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। केवल इतना ही नहीं बल्कि इनके परिवारों की यात्रा पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
मंगलवार को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने एक बयान जारी कर कहा, चीन की सरकार ने उइगरों, कजाक, किर्गिज और मुस्लिम अल्पसंख्यक समूह के खिलाफ अभियान छेड़ दिया गया है। अमेरिका ने चीन से शिनजियांग में मुस्लिमों के खिलाफ अत्याचार खत्म करने की मांग की है।

रिश्ते बेहद नाजुक मोड़ पर
अमेरिका ने ये कदम ऐसे समय में उठाया है, जब दोनों देशों के रिश्ते बेहद नाजुक मोड़ पर आ गए हैं। इसी हफ्ते बीजिंग का एक कारोबारी प्रतिनिधिदल बातचीत के लिए वाशिंगटन भी पहुंचने वाला है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले का व्यापार वार्ता से कोई लेना देना नहीं है।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि चीन के अधिकारी तब तक बातचीत की मेज पर नहीं आएंगे, जब तक उन्हें ये नहीं लगेगा कि अन्य पक्ष गंभीर है। उइगर मुस्लिमों के मामले में अमेरिका के इस कदम से चीन पर दबाव बढ़ा है। हालांकि बीते महीने भी अमेरिकी नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र संघ में शिनजियांग में मुस्लिमों के साथ बुरा व्यवहार किए जाने की आलोचना की थी। अमेरिका ये मानता है कि चीन ने करीब 10 लाख उइगर मुस्लिमों को यातना गृह में रखा हुआ है।

चीन ने आलोचना की
हॉन्गकॉन्ग के मामले में भी सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर चीन वहां प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कुछ भी करता है तो उसे इसका खामियाजा व्यापार वार्ता में भुगतना पड़ेगा। चीन ने अमेरिका के इस कदम की आलोचना की है। वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास में चीनी अधिकारियों ने कहा कि शिनजियांग प्रांत के अल्पसंख्यकों का मुद्दा उसका आंतरिक मामला है। और अमेरिका अपने इस फैसले के जरिए इसमें हस्तक्षेप करने की कोशिश ना करे।
दूतावास के प्रवक्ता ने अमेरिका के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय संबंधों के सामान्य नियमों का उल्लंघन करना बताया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका का फैसला ना केवल उसके आंतरिक मामले में हस्तक्षेप करना है बल्कि चीन के हितों की अनदेखी करना भी है।

फैसले को वापस ले
प्रवक्ता ने आगे कहा कि शिनजियांग में मानवाधिकारों का कोई मुद्दा नहीं है, जिस बात का दावा अमेरिका कर रहा है। अमेरिका केवल आंतरिक मामले में दखल देने के लिए ऐसे आरोप लगा रहा है। वहीं चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि अमेरिका तुरंत अपनी गलती सुधारते हुए इस फैसले को वापस ले और चीन के आंतरिक मामलों में दखल देना बंद करे।
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