America Attack on Iran: अमेरिकी हमले के बाद गुस्से में ईरान, खामेनेई ने ट्रंप को दी चेतावनी, जानिए क्या कहा?
America Attack on Iran: 21 जून 2025 को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अत्यंत चिंताजनक अध्याय उस समय दर्ज हुआ जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु केंद्रों फोर्दो, नतांज़ और इस्फ़हान पर सैन्य कार्रवाई की। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब मध्य-पूर्व पहले से ही राजनीतिक तनाव और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा के ज्वालामुखी के मुहाने पर खड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा घोषित इस ऑपरेशन को सैन्य सफलता बताया गया, वहीं ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का गंभीर उल्लंघन करार दिया है।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी पर भड़का ईरान
ईरान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, पिछले कुछ दिनों से ज़ायोनी हुकूमत की तरफ से जिस तरह की हमलावर हरकतें हो रही थीं, आज सुबह उन्होंने एक और खतरनाक कदम उठाया। ईरान के तीन अहम परमाणु केंद्र फोर्दो, नतांज़ और इस्फ़हान को निशाना बनाकर हमला किया गया। यह सिर्फ हमारी वैज्ञानिक तरक्की पर हमला नहीं है, बल्कि ये अंतरराष्ट्रीय कानूनों और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का भी खुला उल्लंघन है। सबसे दुख की बात ये है कि इस हमले पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी (IAEA) पूरी तरह चुप बैठी रही और ऐसा लग रहा है जैसे वो या तो कुछ देख नहीं रही या जानबूझकर अनदेखा कर रही है। जिन संस्थाओं का काम है निष्पक्ष रहकर सच का पता लगाना और नियमों की निगरानी करना, अगर वही अपना फर्ज़ निभाना छोड़ दें, तो इससे पूरे सिस्टम की साख पर सवाल खड़े होते हैं। ये सिर्फ ईरान का मामला नहीं, ये पूरी दुनिया की परमाणु निगरानी व्यवस्था की भरोसेमंदी पर एक बड़ा सवाल है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ईरान ने की अपील
इस बीच, अमेरिकी प्रशासन ने न केवल डिजिटल माध्यमों से, बल्कि राष्ट्रपति के सार्वजनिक वक्तव्य के ज़रिए इन हमलों की प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जिम्मेदारी स्वीकार की है। यह ऐसे समय में हुआ है जब ये परमाणु केंद्र पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में हैं और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व निगरानी मानकों का पूर्णतः पालन कर रहे हैं। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की निष्पक्षता और प्रभावशीलता पर भी गहरे सवाल खड़े करती है। ईरान यह अपील करता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय विशेषकर स्वतंत्र राष्ट्र, वैश्विक संस्थाएं और मानवाधिकार संगठन इस प्रकार की 'जंगल के कानून' जैसी कार्यशैली की स्पष्ट और कठोर निंदा करें, और एक संप्रभु राष्ट्र के वैध अधिकारों की रक्षा में स्पष्ट, निर्णायक भूमिका निभाएं।
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'दुश्मनों की साजिशें नहीं रोक सकेगी'
ईरान का परमाणु ऊर्जा संगठन, राष्ट्र की जागरूक और साहसी जनता को यह दृढ़ आश्वासन देता है कि दुश्मनों की साजिशें, हमले या कोई भी बाधा, उस वैज्ञानिक और तकनीकी यात्रा को नहीं रोक सकेगी जिसे हमारे समर्पित परमाणु वैज्ञानिकों ने दशकों की मेहनत और बलिदान से हासिल किया है। यह राष्ट्रीय उद्योग जो हमारे परमाणु शहीदों के लहू से सींचा गया है आने वाले समय में भी ईरानी गौरव, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक क्षमता का प्रतीक बना रहेगा। साथ ही, यह संगठन यह भी स्पष्ट करता है कि वह इस अन्यायपूर्ण और अवैध आक्रामकता के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हर आवश्यक कानूनी और कूटनीतिक कदम उठाएगा, ताकि ईरानी राष्ट्र और उसकी जनता के अधिकारों की पूर्ण और प्रभावी रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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