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अल्जीरिया: राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ आर्मी चीफ़ का बड़ा बयान

अल्जीरिया के आर्मी चीफ ऑफ़ स्टाफ़ ने मांग की है कि राष्ट्रपति अब्देलअज़ीज़ को शासन करने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाए जिनके ख़िलाफ़ कई हफ्तों से विरोध प्रदर्शन हो रहा है.

टेलीविज़न पर अपने संबोधन में लेफ्टिनेंट जनरल अहमद जी सालेह ने कहा, ''हमें इस संकट से बाहर निकलने का कोई रास्ता फौरन तलाशना चाहिए जो संविधान के दायरे में हो.''

उन्होंने कहा कि स्थायी राजनीतिक हालात की एकमात्र गारंटी संविधान है. उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 102 का भी हवाला दिया है.

इस अनुच्छेद में प्रावधान है कि राष्ट्रपति यदि शासन करने के सक्षम नहीं हैं तो संवैधानिक परिषद ये घोषित कर सकती है कि राष्ट्रपति का पद खाली है.

संविधान के मुताबिक, यदि ऐसा हुआ तो सीनेट के प्रमुख को तब तक के लिए कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया जाएगा जब तक चुनाव नहीं हो जाते.

अल्जीरिया के आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ के दख़ल से इस घटनाक्रम में नाटकीय मोड़ आ गया है.

बढ़ता विरोध

प्रदर्शनकारी
AFP
प्रदर्शनकारी

बीबीसी के नॉर्थ अफ्रीका संवाददाता राणा जावेद का कहना है कि लेफ्टिनेंट जनरल अहमद जी सालेह को राष्ट्रपति अब्देलअज़ीज़ का वफ़ादार माना जाता है. इसलिए उनके इरादों पर भी सवाल उठेंगे.

अल्जीरिया के अधिकतर लोगों के लिए ये बात समझ से परे है कि उनका 82 वर्षीय राष्ट्रपति, जिसे छह साल पहले स्ट्रोक आया था, जो बड़ी मुश्किल से चल-फिर और बोल पाता है, कैसे एक देश को चला सकता है.

प्रदर्शनकारी
AFP
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राष्ट्रपति अब्देलअज़ीज़, अल्जीरिया में आज़ादी की लड़ाई के पुराने योद्धा हैं. उच्च वर्ग से संबंध रखने वाले राष्ट्रपति अब्देलअज़ीज़ पाश्चात्य रंग-ढंग में ढले हुए हैं.

आठ साल पहले अरब जगत में हुई क्रांति के दौरान राष्ट्रपति अब्देलअज़ीज़ अपनी सत्ता को बचाने में कामयाब हुए थे.

राष्ट्रपति अब्देलअज़ीज़ इस बात पर पहले ही राज़ी हो चुके हैं कि वे आगामी चुनाव में अपने पांचवे कार्यकाल के लिए चुनाव नहीं लड़ेगे.

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि राष्ट्रपति अब्देलअज़ीज़ अपने बीस साल के शासन को और बढ़ाना चाहते हैं.

साल 2013 में स्ट्रोक से पीड़ित होने के बाद राष्ट्रपति अब्देलअज़ीज़ बमुश्किल कहीं सार्वजनिक रूप से नज़र आए हैं. उनकी योजना एक और चुनाव लड़ने की थी.

इसके विरोध में पिछले महीने प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हुआ था जो थमा नहीं. राष्ट्रपति अब्देलअज़ीज़ ने भले ही कह दिया कि वे अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन प्रदर्शनकारी अब सत्ता में फौरन बदलाव चाहते हैं.

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