शेख हसीना के सामने चुनौतियों का अंबार, क्या मालदीव के बाद भारत खो देगा एक और करीबी साथी?

India-Bangladesh News: शनिवार की विपक्ष की रैली में जुटी लोगों की विशालकाय भीड़ से कुछ तस्वीरें जो साफ हो रही हैं, वो ये, कि अवामी लीग की सरकार लोगों के एक बड़े वर्ग के बीच अलोकप्रिय होने लगी है। खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने प्रधानमंत्री शेख हसीना की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

विपक्ष उनकी जगह कार्यवाहक सरकार बनाना चाहता है और विपक्ष की मांग है, कि अगले साल जनवरी में होने वाले चुनाव से पहले, शेख हसीना इस्तीफा दें और एक अंतरिम सरकार का गठन करें, जो देश में निष्पक्ष चुनाव करवाए। विपक्ष सरकार पर इलेक्शन में धांधली करने का आरोप लगा रही है, जबकि विपक्ष के आरोपों को अगर किनारे रख भी दें, फिर भी शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग अंदरूनी समस्याओं से जूझ रही है।

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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना अगले साल जनवरी में होने वाले आम चुनाव से पहले पद छोड़ने और कार्यवाहक सरकार के गठन की अनुमति देने की विपक्ष की मांग शायद कभी स्वीकार न करें। लेकिन, भारत की भरपूर मदद के बाद भी अमेरिका से बढ़ते प्रेशर की वजह से प्रधानमंत्री शेख हसीना के लिए पैंतरेबाज़ी करने की जगह कम हो रही है।

देश की कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनें, जिन्हें पाकिस्तान से भरपूर मदद मिल रही है, वो मजहबी आवाजों से भीड़ जुटाने में कामयाब हो रही हैं और पिछले 10 सालों से, जिन्हें शेख हसीना ने कोने में धकेल रखा था, वो संगठन अब हल्ला बोलने लगी हैं।

बांग्लादेश में जनवरी 2024 में संसदीय चुनाव निर्धारित हैं।

भारत के लिए कितनी जरूरी शेख हसीना?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज शेख हसीना के साथ मिलकर क्रॉस बॉर्डर रेल लाइन का उद्घाटन किया है और इससे पहले सितंबर महीने में नई दिल्ली में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में भी भारत ने शेख हसीना को केन्द्र में रखा, ताकि बांग्लादेश में वोटर्स के बीच शेख हसीना के बढ़ते कद को लेकर एक संदेश जाए।

ऐसा इसलिए, क्योंकि भारत विरोधी भावनाओं और बदलती वफादारी से भरे पड़ोस में शेख हसीना सरकार, शायद भारत की सबसे करीबी और एकमात्र विश्वसनीय भागीदार है। हालांकि, भारत पारंपरिक रूप से दक्षिण एशिया में "सबसे बड़ी शक्ति" रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में चीन ने उस स्थिति को गंभीर रूप से चुनौती दी है, जिसकी क्षेत्र में भारत बनाम चीन तनाव साफ तौर पर महसूस किया जा सकता है।

शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने पिछले चुनावों में जीत हासिल की है। 2009 से प्रधान मंत्री शेख हसीना पर चुनावों में हेरफेर करने और अपने निर्विवाद अधिकार और लगातार जीत का मार्ग प्रशस्त करने के लिए राजनीतिक विरोधियों को डराने-धमाकेन और उन्हें जेल में रखने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, उन्होने तमाम आरोपों को नकारा है, लेकिन अमेरिका ने इस बार कहा है, कि वो उन नेताओं और अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध लगाएगा, जो निष्पक्ष चुनाव के रास्ते में आते हैं।

जाहिर है, अमेरिका का ऐलान बांग्लादेश के साथ साथ भारत के लिए भी असहज करने वाला है। मगर, पिछले महीने मालदीव में भारत की करीबी सरकार का पतन हो चुका है, लिहाजा मोदी सरकार शेख हसीना को जिताने के लिए कोई कोर-कसर छोड़ना नहीं चाहती है।

बाइडेन प्रशासन ने पिछले वर्षों में अपने द्वारा आयोजित लोकतंत्र शिखर सम्मेलन से बांग्लादेश को बाहर कर दिया है, हालांकि उन्होंने अन्य देशों के साथ-साथ पाकिस्तान को भी आमंत्रित किया था। लेकिन, मई में जब शेख हसीना विश्व बैंक की बैठक के लिए वाशिंगटन गईं, तो बाइडेन प्रशासन ने उन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।

शेख हसीना, जो मानती हैं कि बाइडेन, बांग्लादेश के लोकतंत्र को नष्ट करना चाहते हैं, उन्होंने एक बार अपनी संसद में कहा था, कि "अमेरिका दुनिया में किसी भी सरकार को उखाड़ फेंक सकता है, खासकर अगर वह एक मुस्लिम राष्ट्र हो।"

लेकिन, इस बार भारत भी बांग्लादेश के लिए अमेरिका से दो-दो हाथ करने के लिए तैयार है।

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भारत का महत्वपूर्ण सहयोगी

करीब एक दशक तक, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और शेख हसीना ने विश्वास का एक मजबूत रिश्ता बनाया है, जिसने दोनों देशों और क्षेत्र की अच्छी सेवा की है। शेख हसीना की बांग्लादेश में इसलिए भी आलोचना होती रही है, कि वो भारत में बीजेपी नेताओं के मुस्लिमों के खिलाफ बयानबाजी को लेकर चुप रहती हैं।

अवामी लीग के सांसद सबर हुसैन चौधरी ने कहा, कि "भारत-बांग्लादेश साझेदारी व्यापार और निवेश से लेकर कनेक्टिविटी और सुरक्षा तक विस्तारित हो गई है, जिसमें लोगों से लोगों के संपर्क ने उत्प्रेरक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।" उन्होंने कहा कि दोनों सरकारों ने जीत-जीत की स्थिति बनाई है, और विकास और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक-दूसरे पर भरोसा किया है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों की सफलता ने दिल्ली को यह मामला बनाने की अनुमति दी है कि कैसे भारत के साथ रचनात्मक संबंध अन्य पड़ोसियों को भी लाभान्वित कर सकते हैं।

भारत को डर है, कि शेख हसीना अगर हारती हैं, तो पाकिस्तान की करीबी बेगम खालिदा जिया बांग्लादेश की अगली प्रधानमंत्री होंगी और फिर बांग्लादेश में चीन का प्रवेश हो जाएगा। जो मालदीव के बाद भारत के लिए दूसरा बड़ा झटका होगा।

भारत के पड़ोस में चीन लगातार अपने पैर पसार रहा है। मावदीव के साथ-साथ म्यांमार, श्रीलंका, पाकिस्तान में चीन का वर्चस्व स्थापित हो चुका है और अगर बांग्लादेश में शेख हसीना हारती हैं, तो फिर बंगाल की खाड़ी में चीन पूरी तरह से हावी हो जाएगा, जो किसी खतरनाक स्थिति से कम नहीं होगा।

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