AUKUS के बाद US, ऑस्ट्रेलिया और जापान की नई तिगड़ी का नया ग्रेट गेम, अकेले पड़ता जा रहा भारत?
रणनीतिक और कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, टीडीएमएम चीन और रूस के खिलाफ काफी आक्रामक है और ऐसा लग रहा है, कि इन तीनों देशों के पर्सनल एजेंडे भी क्वाड के अंदर हावी होने की कोशिश कर रहे हैं।
नई दिल्ली, अक्टूबर 03: भारत के तीन पार्टनर्स और क्वाड मेंबर्स अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने चीन के खिलाफ ना सिर्फ काफी सख्त बयान दिए हैं, बल्कि उन्होंने चीन के खिलाफ बड़े फैसले भी लिए हैं। वहीं, बहुत जल्द क्वाड देशों की अगली बैठक भी होने वाली है और उससे पहले अब सबकी निगाहें भारत की तरफ हैं, कि क्या भारत चीन के खिलाफ अपने क्वाड पार्टनर्स के साथ कदमताल करता है या नहीं। भारत ने आज तक चीन का नाम लेकर किसी भी तरह का उत्तेजक बयान नहीं दिए हैं, लेकिन जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका चीन को लेकर काफी आक्रामक हैं, लिहाजा सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या मोदी सरकार अपने पार्टनर्स का साथ देगी?

जापान, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका की बैठक
शनिवार को अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्रियों की बैठक हुई है। ट्राइलेटरल डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग ( TDMM) में अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड जे. ऑस्टिन ने शनिवार को हवाई में यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड मुख्यालय में ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधान मंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस और जापानी रक्षा मंत्री यासुकाज़ु हमदा की मेजबानी की। इस बार, टीडीएमएम, जिसके सदस्य आखिरी बार जून महीने में सिंगापुर में मिले थे, वो अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन द्वारा पैसिफिक आइलैंड्स फोरम के लिए पैसिफिक पार्टनरशिप स्ट्रैटेजी जारी करने के ठीक बाद हुआ है। जिसमें कहा गया है कि, "पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना द्वारा दबाव और आर्थिक जबरदस्ती" की जाती है, जिससे "इस क्षेत्र की शांति, समृद्धि और सुरक्षा पर खतरा आता है।" ये तीनों देश क्वाड का भी हिस्सा है, जिसमें चौथा देश भारत है, उसने कहा कि, चीन और रूस नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय विश्व व्यवस्था को "विघटित करने" की कोशिश कर रहे हैं।

चीन और रूस पर क्या होगी भारत की नीति
रणनीतिक और कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, टीडीएमएम चीन और रूस के खिलाफ काफी आक्रामक है और ऐसा लग रहा है, कि इन तीनों देशों के पर्सनल एजेंडे भी क्वाड के अंदर हावी होने की कोशिश कर रहे हैं और इन तीनों देशों की अपेक्षा है, कि भारत भी खुलकर चीन और रूस के खिलाफ उतरे। लेकिन, भारत अपनी दूसरी तरह की रणनीति पर काम करता है और अभी तक यूक्रेन युद्ध के लिए भारत ने रूस की आलोचना नहीं की है और ना ही भारत ने खुलकर चीन का नाम लिया है। हालांकि, भारत इस TDMM गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन क्वाड के हिस्से के रूप में चारों देश एक संयुक्त समुद्री सैन्य अभ्यास 'मालाबार' करते हैं, जबकि भारत क्वाड के साथ किसी भी तरह के सैन्य संबंधों को खारिज करता है। वहीं, TDMM का विजन और एजेंडा भी क्वाड के विजन और एजेंडे से काफी हद तक मेल खाता है, जो अब तक केवल अप्रत्यक्ष रूप से चीन और कुछ हद तक रूस को अपनी एकता और दृष्टि का संकेत देने में कामयाब रहा है और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह भारत है, क्योंकि चीन भारत का पड़ोसी है, जबकि रूस रणनीतिक पार्टनर। लिहाजा, भारत की वजह से क्वाड ने अभी तक सीधे तौर पर चीन और रूस का नाम नहीं लिया है।

क्या क्वाड का विकल्प बनेगा TDMM?
एक राजनयिक सूत्र ने दिप्रिंट को बताया कि, "टीडीएमएम अब निश्चित रूप से क्वाड के एजेंडे को परिभाषित और आकार देने जा रहा है, खासकर अब जब ताइवान के प्रति चीन की आक्रामकता और यूक्रेन पर रूस का युद्ध तेज हो गया है।" डिप्लोमेट के मुताबिक, क्वाड 2019 में अपने पुराने अवतार से पुनर्जीवित होने के बाद एक राजनयिक मंच की तरह काम करता है। उन्होंने कहा कि, क्वाड को एक नया आकार इसलिए भी दिया गया, क्योंकि कोविड महामारी आ गई थी, अन्यथा शायद भारत क्वाड के पुनर्जन्म को लेकर उतना उत्सुक नहीं रहता। डिप्लोमेट ने ये भी कहा कि, भले ही 2004 में हिंद महासागर में आई सुनामी के मद्देनजर क्वाड अस्तित्व में आया हो, लेकिन अब जियो पॉलिटिक्स "पूरी तरह से बदल गई" है और इसलिए महामारी और फिर रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक व्यवस्था भी पूरी तरह से बदल गई है।

चीन के खिलाफ तीन लोकतंत्रों की बात
बैठक के दौरान अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया और जापान को अमेरिका का "सबसे करीबी सहयोगी" बताया और अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने शनिवार को टीडीएमएम में कहा कि, "दशकों से, हमारे तीन लोकतंत्रों ने हिंद-प्रशांत और उसके आसपास स्थिरता और समृद्धि के लिए एक लंगर के रूप में कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है"। पेंटागन द्वारा जारी एक बयान में ऑस्टिन के हवाले से कहा गया है कि, "हम ताइवान जलडमरूमध्य और इस क्षेत्र में अन्य जगहों पर चीन के बढ़ते आक्रामक और धमकाने वाले व्यवहार से बहुत चिंतित हैं।" बैठक में ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री मार्लेस ने कहा कि, "हम देखते हैं कि हमारे तीन देशों के बीच त्रिपक्षीय संबंध और गहरा और मजबूत हो रहा है, और हम उस एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए आज बहुत आगे निकल आए हैं।" इसके साथ ही उन्होंने टीडीएमएम में इस बात पर भी प्रकाश डाला, कि रूस यूक्रेन के साथ चल रहे संघर्ष में कुछ ऐसा कर रहा है जो बीजिंग कैनबरा के साथ "वही दबाव डालकर" कर रहा है। वहीं, बैठक के दौरान जापान ने भी यूक्रेन युद्ध और चीन के साथ साथ उत्तर कोरिया से मिलने वाले खतरे का भी जिक्र किया। जापान के रक्षा मंत्री हमादा ने एक अनुवादक के माध्यम से कहा कि "अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था की नींव को कमजोर कर दिया गया है।"

भारत को दरकिनार करने की कोशिश?
कैलिफोर्निया स्थित थिंक टैंक रैंड कॉरपोरेशन के वरिष्ठ रक्षा विश्लेषक डेरेक ग्रॉसमैन ने कहा कि, "जब मैं अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान को चीन के बुरे व्यवहार का मुकाबला करने को लेकर बात करते हुए देखता हूं, तो वो मुझे काफी सहज दिखाई देते हैं, वो चीन का काउंटर करने के लिए प्लान बनाते हुए दिखाई देते हैं, लेकिन जब इसमें भारत भी शामिल हो जाता है, उसके बाद ऐसा नहीं दिखता है।" शनिवार को हुई मार्लेस और ऑस्टिन के बीच एक अलग द्विपक्षीय बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने "ताइवान जलडमरूमध्य और क्षेत्र में अन्य जगहों पर चीन की आक्रामक, तेज और अस्थिर सैन्य गतिविधियों" पर चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, ताइवान भी जल्द ही क्वाड के एजेंडे में प्रवेश कर सकता है क्योंकि भारत के रूस का बचाव जारी रखने के बावजूद तनाव और अधिक तीव्र हो गया है। वहीं, ऑस्टिन ने कहा कि, "संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया शांति, स्थिरता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करने वाली कार्रवाइयों का विरोध करने में एकजुट हैं।"

चीन के खिलाफ कार्ययोजना हो रही स्थापित?
स्वीडन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर सिक्योरिटी एंड डेवलपमेंट पॉलिसी में स्टॉकहोम सेंटर फॉर साउथ एशियन एंड इंडो-पैसिफिक अफेयर्स के प्रमुख जगन्नाथ पी. पांडा ने कहा कि, टीडीएमएम की बैठक में जिस स्तर की बात हुई है, वो इस बात की तरफ साफ संकेत करता है, कि कैसे ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में अपनी ठोस कार्य योजना निर्धारित कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि, "यह निश्चित रूप से भारत-प्रशांत क्षेत्र में क्वाड और ऑकस जैसे अन्य लघु समूहों के लिए एक नई गति स्थापित करेगा।" AUKUS के तहत, ऑस्ट्रेलिया ने अमेरिका और ब्रिटेन के साथ त्रिपक्षीय रक्षा साझेदारी के माध्यम से आठ परमाणु-संचालित पनडुब्बियों का अधिग्रहण करने की योजना बनाई है। आपको बता दें कि, इसी साल ऑकस का गठन किया गया है, जिसमें अमेरिका के साथ साथ ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन भी हैं और ये ग्रुप पूरी तरह से आधिकारिक तौर पर सैन्य गठबंधन है।

क्या है भारत की नीति?
इस बीच, पिछले हफ्ते एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में भारत ने चीन को AUKUS के खिलाफ वियना में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) में अपना प्रस्ताव वापस लेने के लिए मजबूर किया है। चीन ने ऑस्ट्रेलिया को परमाणु-संचालित पनडुब्बियों के साथ लेकिन पारंपरिक हथियारों से लैस करने की मांग के लिए AUKUS के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित करने का प्रयास किया था, जिसे भारत ने रोक दिया। इसमें कोई शक नहीं, कि ऑकस के तीनों पार्टनर से भारत के गहरे रणनीतिक और सामरिक रिश्ते हैं, लेकिन उसके बावजूद एक्सपर्ट्स ये सवाल उठाते हैं, कि आखिर भारत खुलकर चीन के खिलाफ क्यों नहीं आता है और क्या अब क्वाड पार्टनर्स ऐसे विकल्पों की भी तलाश कर रहे हैं, जो चीन के खिलाफ ज्यादा आक्रामक हो, तो फिर भारत के पास आगे के विकल्प क्या है, ये एक बड़ा सवाल है।












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