अमरुल्ला सालेह ने तालिबान के खिलाफ खोला मोर्चा, खुद को घोषित किया अफगानिस्तान का राष्ट्रपति
काबुल, 17 अगस्त। अफगानिस्तान की राष्ट्रीय राजधानी काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भाग गए वहीं, उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने विद्रोहियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। तालिबान के सामने कभी नहीं झुकने की कसम खाने वाले अमरुल्ला सालेह ने मंगलवार की शाम खुद को अफगानिस्तान का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर दिया। उन्होंने ट्वीट कर अपने इस फैसले की जानकारी दुनिया को दी।

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अमरुल्ला सालेह ने ट्विटर पर लिखा, 'अफगानिस्तान के संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति की अनुपस्थिति, पलायन, इस्तीफा या मृत्यु में एफवीपी कार्यवाहक राष्ट्रपति बन जाता है। मैं वर्तमान में अपने देश के अंदर हूं और वैध तरीके से देखभाल करने वाला राष्ट्रपति हूं। मैं सभी नेताओं से उनके समर्थन और आम सहमति के लिए संपर्क कर रहा हूं।' अमरुल्ला के इस ऐलान के बाद अभी तालिबान की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बता दें कि काबुल में तालिबान के आने के बाद से अमरुल्ला सालेह नॉर्दन अलायंस के पूर्व कमांडर अहमद शाह मसूद का गढ़ पंजशीर घाटी में रह रहे हैं। यह वही जगह है जहां आज तक तालिबान अपना कब्जा नहीं जमा सका है।
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अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह भी पंजशीर से ही ताल्लुक रखते हैं, काबुल में तालिबान के प्रवेश के बाद से वह यहीं रह रहे हैं। पंजशीर पहुंचे उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने तालिबान को खुली चुनौती दी है, उन्होंने कहा कि वह किसी भी परिस्थिति में तालिबान आतंकवादियों के सामने नहीं झुकेंगे। अमरुल्लाह सालेह ने अपने एक ट्वीट में लिखा, 'मैं अपने नायक अहमद शाह मसूद, कमांडर, लीजेंड और गाइड की आत्मा और विरासत के साथ कभी विश्वासघात नहीं करूंगा। मैं उन लाखों लोगों को निराश नहीं करूंगा जिन्होंने मेरी बात सुनी। मैं तालिबान के साथ कभी भी एक छत के नीचे नहीं रहूंगा। कभी नहीं।'












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