अफगानिस्तान के इस कारोबार में लगे पंख तो खुश हुआ तालिबान, भारत के लिए टेंशन की बात
अफगानिस्तान में इस साल रिकॉर्ड मात्रा में अफीम का उत्पादन हुआ है, जिसने भारत की चिंता काफी ज्यादा बढ़ा दी है।
काबुल, नवंबर 17: अफगानिस्तान में इस साल भी रिकॉर्ड मात्रा में अफीम का उत्पादन हुआ है, जो सबसे ज्यादा भारत के लिए चिंता की बात है। खासकर इस वक्त, जब तालिबान एक एक पाई के लिए मोहताज है, तो उसकी कमाई का एकमात्र बड़ा जरिए अफीम की तस्करी है, लिहाजा भारत के लिए ये एक चिंता की बात मानी जा रही है।

रिकॉर्ड मात्रा में अफीम उत्पादन
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान का अफीम उत्पादन लगातार पांचवें वर्ष 6,000 टन के स्तर को पार कर गया है, जो युद्धग्रस्त राष्ट्र अफगानिस्तान को वैश्विक नशीली दवाओं के व्यापार का केंद्र बनने से रोकने के प्रयासों को कमजोर करता है। यूनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में साल 2021 में 6 हजार 800 टन अफीम का उत्पादन किया गया है और तालिबान के अधिग्रहण से उत्पन्न अनिश्चितताओं के बीच अगस्त और सितंबर में अफीम की कीमतों में इजाफा भी हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल उत्पादन में 8% की वृद्धि हुई और बढ़ती गरीबी और खाद्य असुरक्षा के बीच कीमतों में बढ़ोतरी के कारण खेती के लिए प्रोत्साहन बढ़ा है।

किसानों को होगा फायदा
सोमवार को जारी यूनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट में कहा गया है कि, "2022 में अफगानिस्तान के किसान अफीम की खेती किस तरह से करेंगे, इसका फैसला इस साल अफगानिस्तान में अफीम के लिए कीमतों का निर्धारण होने के बाद इसका फैसला किसान लेंगे।" आपको बता दें कि, दुनिया में सबसे ज्यादा अफीम का उत्पादन करने वाला देश अफगानिस्तान और अफगानिस्तान में जितने भी आतंकी संगठन हैं, उनका पैसे जुटाने का सबसे बड़ा कारोबार अफीम की तस्करी ही है। खुद तालिबान हर साल नशे की तस्करी से करोड़ों रुपये जुटाता है। सबसे दिलचस्प बात ये है कि, जो आतंकी संगठन इस्लामिक शासन लागू कर रहे हैं, उन्हें नशे के कारोबार से कोई ऐतराज नहीं है, दिसे इस्लाम में हराम कहा गया है।

सबसे बड़ा अफीम उत्पादक देश
अफगानिस्तान दुनिया का सबसे बड़ा अफीम उत्पादक देश है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 87% हिस्सा है। देश में नशीली दवाओं के अवैध उत्पादन को रोकने के लिए अमेरिका ने करीब 9 अरब डॉलर की मदद देश के किसानों को किसी दूसरी फसल की खेती करने के लिए दिए, बावजूद इसके किसानों ने किसी और फसल का उत्पादन शुरू नहीं किया और देश के कई हिस्सों में अफीम की खेती बड़े स्तर पर की जाती है। अफीम की खेती के साथ ही आतंकी गतिविधियों के लिए भी सबसे बड़ा फैसला अफीम की खेती से ही आता है और अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था इस वक्त विदेशी मदद पर टिकी हुई है और देश के किसान अफीम की बिक्री पर निर्भर हैं।

अफीम से अफगानिस्तान की आय
रिपोर्ट में कहा गया है कि, "अफगानिस्तान में अफीम से होने वाली आय 2021 में करीब 1.8 अरब डॉलर से 2.7 अरब डॉलर के बीच में है। हालांकि, अफगानिस्तान के बाहर अफीम से बनी दवा का कम ही निर्यात होता है, बल्कि ज्यादातक ड्रग्स के तौर पर ही अफीम की तस्करी की जाती है। आपको बता दें कि, अफीम कच्चे खसखस की फली के रस से प्राप्त होती है। सैप एक भूरे रंग के लेटेक्स में सूख जाता है जिसमें अल्कलॉइड होते हैं जो हेरोइन, मेथामफेटामाइन, मॉर्फिन और कोकीन सहित कई मादक नशाकों को बनाने में इस्तेमास किए जाते हैं।

भारत के लिए चिंता की बात
अफगानिस्तान में अगर रिकॉर्ड मात्रा में अफीम की खेती की जा रही है, तो सबसे बड़ा सिरदर्द भारत के लिए ही है। तालिबान राज में तस्करों की कोशिश ज्यादा से ज्यादा नशीले पदार्थों को भारतीय बाजारों में ही खपाने की होगी। इंडिया टूडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन सालों में भारत में ड्रग्स का बाजार 455 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुका है, जो काफी खतरनाक आंकड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सबसे ज्यादा मिजोरम में लोग ड्रग्स का सेवन करते हैं, तो दूसरे नंबर पर पंजाब और तीसरे नंबर पर राजधानी दिल्ली है। यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ड्रग एंड कंट्रोलती रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2016 के बाद पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा गांजे की सप्लाई भारत में की गई है और करीब 300 टन गांजा भारतीय बाजारों में लाया गया है, जबकि साल 2017 में 353 टन गांजे की सप्लाई भारत में की गई है।

अफगानिस्तान से नशे की सप्लाई
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सबसे ज्यादा मादक पदार्थों की सप्लाई अफगानिस्तान, म्यांमार, पाकिस्तान और नेपाल से की जाती है। इन देशों से अफीम, कोकीन, हेरोइन और मॉर्फीन की सप्लाई भारत में की जाती है। खासकर अब यूएन की रिपोर्ट में भी कह दिया गया है कि, अफगानिस्तान में रिकॉर्ड पांचवें साल अफीम की सबसे ज्यादा खेती की गई है। आपको बता दें कि, अफगानिस्तान में उत्पादन की जाने वाली अफीम का सबसे बड़ा खरीददार अमेरिका और कुछ एशियाई देश हैं, जो दवाई बनाने के लिए अफीम की खरीदारी करते हैं, लेकिन ज्यादा पैसा तस्करी में मिलता है, लिहाजा अब भारत को काफी सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि अफीम तस्करों को भारत में एंट्री लेने से रोका जाए।












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