अमेरिका में खुदरा फार्मेसी में भी मिलेंगी गर्भपात की गोलियां, विरोधियों ने कहा- मुनाफा नहीं, जिंदगी बचाओ
अमेरिका में FDA ने अब दुकानों में मिफेप्रिस्टोन दवा को रखने की अनुमति दे दी है। मिफेप्रिस्टोन उन दो दवाओं में से एक है जो गर्भावस्था की संभावना को खत्म करता है।

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अमेरिका में खुदरा फार्मेसियों को भी अब गर्भपात की गोलियां बेचने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि ये अनुमति उन राज्यों में ही दी जाएगी जहां गर्भपात की अनुमति मिली हुई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि सरकार का यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा। बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासक फैसला सुनाते हुए गर्भपात का संवैधानिक अधिकार खत्म कर दिया था। हालांकि, गर्भपात विरोधी संगठन ने सरकार के इस फैसले की निंदा की है।

FDA ने किया बदलाव
यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने मंगलवार को बड़े चेन और मेल-ऑर्डर कंपनियों सहित खुदरा फार्मेसियों को गर्भपात की गोलियां देने की अनुमति देते हुए एक नियम में बदलाव किया। FDA ने अब दुकानों में मिफेप्रिस्टोन दवा को रखने की अनुमति दे दी है। मिफेप्रिस्टोन उन दो दवाओं में से एक है जो गर्भावस्था की संभावना को खत्म करता है। हालांकि यह दवा उन राज्यों में स्थानीय दवा दुकानों में उपलब्ध होगी जहां गर्भपात की कानूनी अनुमति है।

महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित करने का प्रयास
आपतो बता दें कि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पिछली गर्मियों में सुप्रीम कोर्ट के गर्भपात के संवैधानिक अधिकार को समाप्त करने के फैसले के बाद राष्ट्रपति जो बाइडेन का प्रशासन अधिक गर्भपात अधिकारों को सुरक्षित करने का प्रयास कर रहा है। गर्भपात की गोली को अमेरिका में उन महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देखा जाता है जो अपनी गर्भावस्था को समाप्त करना चाहती हैं।

डॉक्टर का पर्चा लेना होगा जरूरी
हालांकि गर्भपात की ये गोलियां बिना डॉक्टरी परामर्श के नहीं मिल सकेंगी। इसके लिए डॉक्टरी पर्चे की जरूरत होगी। पहले ये कुछ ही मेडिकल दुकानों में उपलब्ध थीं लेकिन अब इसे खुदरा दुकानों में भी बेचा जा सकेगा। हालांकि, गर्भपात विरोधी संगठन सुसान बी एंथोनी लिस्ट के अध्यक्ष मार्जोरी डैनफेल्सर ने इस फैसले की निंदा की है। डैननफेल्सर ने कहा, "बाइडेन प्रशासन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह महिलाओं की सुरक्षा और अजन्मे बच्चों के जीवन पर गर्भपात उद्योग के मुनाफे को महत्व देता है।"

गर्भपात नहीं रहा सांविधानिक अधिकार
बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात का सांविधानिक अधिकार खत्म कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था उनकी तरफ से ‘रो वी वेड' केस को खारिज कर दिया गया है। ऐसा कर सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही पांच दशक पुराने उस ऐतिहासिक फैसले को बदल दिया है जहां पर महिलाओं को गर्भपात करवाने का कानूनी दर्जा दिया गया था। हालांकि इसके साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा था कि अमेरिका के सभी राज्य गर्भपात को लेकर अपने नियम-कानून बना सकते हैं।

‘रो वी वेड' केस क्या है?
‘रो वी वेड' केस 1973 का चर्चित केस है। इस केस को रो बनाम वेड केस भी कहा जाता है। नॉर्मा मैककॉर्वी नाम की महिला के दो बच्चे थे और तीसरा पैदा होने वाला था। मैककॉर्वी वो तीसरा बच्चा नहीं चाहती थीं, ऐसे में उन्होंने अमेरिका के फेडरल कोर्ट का रुख किया था। लेकिन तब फेडरल कोर्ट ने उन्हें गर्भपात की इजाजत नहीं दी। इस फैसले के ठीक दो साल बाद मैककॉर्वी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। फिर सुप्रीम कोर्ट ने ही उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए गर्भपात की इजाजत दे दी थी। कोर्ट का कहना था कि गर्भ का क्या करना है ये फैसला महिला का होना चाहिए।












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