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Budget 2024: क्या आज के बजट से घटता FDI बढ़ पाएगा? क्यों घट गया विदेशी निवेश, बढ़ाने के लिए क्या उपाय किए गये?

FDI Budget 2024: भारत की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश कर दिया है और उसमें गंभीरता से इस बात पर ध्यान दिया गया है, कि भारत में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) को कैसे बढ़ाया जाए। कल पेश किए गये इकोनॉमिक सर्वे में बताया गया था, कि इस वित्त वर्ष में भारत में विदेशी निवेश गिर गया है, जिसकी वजह जियो-पॉलिटिकल घटनाओं को बताया गया है।

इकोनॉमिक सर्वे में बताया गया है, जियो-पॉलिटिकल संघर्षों की वजह से पड़ने वाले असमान जोखिम और मौद्रिक नीति के सख्त होने के प्रभाव की वजह से शुद्ध FDI के प्रवाह में कमी देखी गई है।

FDI Budget 2024

इकोनॉमिक सर्वे में बताया गया था, कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण होने वाले आर्थिक झटकों के कारण जर्मनी और फ्रांस जैसे बड़े देशों में भी विकास धीमा हो गया है। भारत में शुद्ध एफडीआई प्रवाह वित्त वर्ष 23 के दौरान 42.0 अरब अमरीकी डॉलर से घटकर वित्त वर्ष 24 में 26.5 अरब अमरीकी डॉलर रह गया है। हालांकि, वित्त वर्ष 24 में सकल एफडीआई प्रवाह में सिर्फ 0.6 प्रतिशत की कमी आई।

FDI के शुद्ध प्रवाह में कमी मुख्य रूप से प्रत्यावर्तन/विनिवेश (repatriation/disinvestment) में वृद्धि की वजह से हुई है।

भारत में क्यों घट गया है विदेशी निवेश?

सरकार ने भले ही FDI फ्लो के गिरने की वजह जियो-पॉलिटिकल वजहों को बताया है, लेकिन कई मायनों में देखा जाए, तो कुछ जियो-पॉलिटिकल हालात भारत के पक्ष में रहे हैं और आंकड़ों को देखने पर लगता नहीं है, कि भारत इसका फायदा उठा पाया है।

अमेरिका की सरकार ने अमेरिकी कंपनियों पर चीन से बाहर निकलने के लिए भारी दबाव बना रखा है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है, कि भारत उन कंपनियों को आकर्षित करने में नाकाम रहा है। अभी तक सिर्फ एप्पल ही एकमात्र बड़ी कंपनी है, जिसने भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की स्थापनी की है।

एलन मस्क की इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला के साथ बनते बनते बात बिगड़ चुकी है और अभी तक ना ही एलन मस्क ने और ना ही भारत सरकार ने बताया है, कि आखिर टेस्ला के साथ बात क्यों नहीं बनी?

एक और जियो-पॉलिटिकल हालात पर विचार करें, तो लगातार देखा जा रहा है, कि अमेरिका और यूरोपीय देश अपनी तत्काल सोर्सिंग चीन से दूर कर रहे हैं और इसलिए भारत के लिए ये काफी ज्यादा जरूरी हो जाता है, कि वो चीन में काम करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए भारत में आने के लिए एक उपयुक्त माहौल का निर्माण करे, भारत के लिए ये तय करना जरूरी थी, कि जिन कंपनियों के ऊपर चीन से बाहर निकलने का दबाव था, वो कंपनियों निवेश के लिए भारत आए और फिर ये कंपनियों, भारत में सामानों का उत्पादन करे, और अमेरिका और यूरोपीय देशों में उन सामानों का निर्यात करे, लेकिन भारत ऐसा नहीं कर पाया।

ये सिर्फ आर्थिक तौर पर ही नहीं, बल्कि रणनीतिक तौर पर भी चीन के मुकाबले भारत के लिए झटता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि भारत सबसे ज्यादा सामान का आयात चीन से करता है और रणनीतिक लिहाज से ये कतई सही नहीं है।

FDI बढ़ाने के लिए बजट में क्या उपाय किए गये हैं?

हालांकि, अभी तक बजट को लेकर तमाम विस्तृत जानकारी नहीं है, लेकिन जो जानकारियां अभी हमारे पास हैं, उनके मुताबिक, भारत सरकार ने एंजल टैक्स को खत्म कर दिया है, जिसकी तारीफ पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने भी की है। इससे भारतीय स्टार्ट-अप इको सिस्टम मजबूत होगा और विदेशी कंपनियों के लिए मजबूत भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश करना आसान हो जाएगा।

इसके अलावा, निर्मला सीतारमण ने विदेशी कंपनियों पर कॉर्पोरेट टैक्स की दर 40% से घटाकर 35% करने का ऐलान किया है। इससे FDI को बड़ा फायदा मिल सकता है और विदेशी कंपनियों या विदेशी निवेशक, भारतीय बाजारों में निवेश के लिए उत्साहित हो सकते हैं।

इसके अलावा, निर्मला सीतारमण ने भारत में घरेलू क्रूज संचालित करने वाली विदेशी शिपिंग कंपनियों के लिए टैक्स सिस्टम को काफी आसान कर दिया है। इससे इंडियन टूरिज्म को फायदा मिलेगा और भारतीय क्रूज कंपनियों में विदेशी निवेश बढ़ेगा।

इसके अलावा, कच्चे हीरे की बिक्री करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए सुरक्षित हार्बर दर का ऐलान किया गया है।

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