श्रीलंका में विक्रमसिंघे सरकार ने 20 हजार सैनिकों को नौकरी से निकाला, जानें इसकी वजह
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल नलिन हेराथ ने बताया कि बहुत लंबे समय से अपने संबंधित कर्तव्यों से अनुपस्थित रहने वाले सैन्य भगोड़ों के लिए दी गई माफी 15 नवंबर से 31 दिसंबर, 2022 तक लागू है।

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श्रीलंकाई सरकार ने लगभग 20 हजार सैनिकों को निकाल दिया है। ये सैनिक लंबे समय से ड्यूटी नहीं कर रहे थे। श्रीलंका सरकार ने कहा कि लंबे समय से अनुपस्थित रहने वाले इन जवानों को नौकरी से निकाल दिया गया है, इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। बता दें कि हाल ही में विक्रमसिंघे सरकार ने खर्च में कटौती के अभियान के तहत सेना में 16 हजार से ज्यादा पद खत्म करने का फैसला किया था।

श्रीलंका रक्षा मंत्रालय ने की घोषणा
बुधवार को श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल नलिन हेराथ ने बताया कि बहुत लंबे समय से अपने संबंधित कर्तव्यों से अनुपस्थित रहने वाले सैन्य भगोड़ों के लिए दी गई माफी 15 नवंबर से 31 दिसंबर, 2022 तक लागू है। मंगलवार तक 19,000 से अधिक ऐसे सैन्य कर्मियों को सेवा से हटा दिया गया है। हेराथ ने आगे कहा कि जो सैन्य कर्मी अभी विदेशों में हैं, उन्हें भी यह सुविधा दी गई है। इसके तहत अपनी ड्यूटी को ज्वाइन किए बिना वे आम माफी योजना का लाभ उठाते हुए नौकरी छोड़ सकते हैं।

आर्थिक संकट से जूझ रहा श्रीलंका
नलिन हेराथ ने कहा कि हटाए गए जवानों में से 17,322 सेना के, 1,145 जवान नौसेना के और 1,038 जवान वायु सेना के हैं। कर्नल हेराथ ने कहा कि इन सैनिकों को औपचारिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद कानूनी रूप से हटा दिया गया है। श्रीलंकाई सरकार का ये फैसला उस वक्त आया है जब देश अपने सबसे खराब आर्थिक संकट से गुजर रहा है।

विक्रमसिंघे ने स्वैचिछ रिटायरमेंट का रखा प्रस्ताव
इससे पहले IMF श्रीलंकाई सरकार पर खर्च घटाने की शर्त रख चुका है, जिसके मुताबिक विक्रमसिंघे सरकार बड़े पैमाने पर कटौती की घोषणाएं कर रही है। श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने पिछले महीने प्रस्ताव रखा था कि सैनिकों को स्वैच्छिक रिटायरमेंट दिलाने की कोशिश की जाए, ताकि रक्षा खर्च घटाया जा सके। बता दें कि श्रीलंका में पेंशन का अधिकार हासिल करने के लिए एक सैनिक को 22 साल तक सेवा करनी होती है। वे 12 साल बाद अपनी पेंशन छोड़ते हुए नौकरी छोड़ सकते हैं।












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