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PSC Samosa Wala: कौन है अजीत जो डिप्टी कलेक्टर बनने से पहले बन गया PSC समोसेवाला? दिल को छू लेगी पूरी कहानी

रीवा, 4 सितंबर। आप सभी ने प्रफुल्ल बिल्लोर का नाम तो सुना ही होगा मध्यप्रदेश के प्रफुल्ल ने यह साबित किया कि कोई काम छोटा-बड़ा नहीं होता बस दिल लगाकर करो तो छोटा काम भी ब्रांड बन जाता है। प्रफुल्ल जिन्होंने देश भर में एमबीए चाय वाले के रूप में पहचान बनाई है। वैसे ही आब इंदौर में आ चुका है पीएससी समोसे वाला। जिसके मालिक रीवा के अजीत सिंह हैं। अजीत ने 2017 में डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना देखा और इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने इंदौर आ गए।

डिप्टी कलेक्टर के सपने ने बना दिया पीएससी समोसे वाला

डिप्टी कलेक्टर के सपने ने बना दिया पीएससी समोसे वाला

यह कहानी अजीत सिंह की है जो रीवा से इंदौर में डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना लेकर आया था। लेकिन कभी कोशिश असफल रहने तो कभी सरकारी सिस्टम आड़े आने से उसका ये सपना अधूरा रह गया। हालांकि इसके बाद भी उसने हार नहीं मानी। परिवार पर अतिरिक्त बोझ डालने की बजाय उसने अपना नया रास्ता निकाला। अपने सपने को न भूलने देने के लिए खंडवा नाका पर समोसे की दुकान खोलकर उसका नाम ही पीएससी समोसा वाला रख दिया है।

रीवा से 900 किलोमीटर दूर से आया इंदौर

रीवा से 900 किलोमीटर दूर से आया इंदौर

इंदौर से करीब 900 किमी रीवा जिले के ग्राम चौखड़ा में 24 दिसंबर 1997 को अजीत सिंह का जन्म हुआ। अजीत के परिवार में पिता सुभाष सिंह, मां सरोज सिंह, दादा रोहिणी प्रसाद, छोटा भाई आशीष सिंह हैं। पिता खेती करते हैं। अजीत ने डिप्टी कलेक्टर बनने का ख्वाब देखा और इस ख्वाब को पूरा करने के लिए वह 2017 में इंदौर आया। परिवार, दोस्तों से दूर उसने यह रास्ता खुद चुना। पिता चाहते थे कि बेटा इंजीनियर बने, पर अजीत प्रशासनिक सेवा में ही जाना चाहता था।

संघर्ष की कहानी

संघर्ष की कहानी

वर्ष 2017 में 19 वर्ष की उम्र में अजीत डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना बेकार रीवा से इंदौर आया। यहां कमरा लेकर पीएससी की तैयारी के लिए कोचिंग ज्वाइन की। यहां रहकर डिप्टी कलेक्टर की तैयारी करना उसके लिए आसान न था। पिता पांच हजार रुपए महीना भेजते थे। ऐसे में वह 1 दोस्त के साथ रूम शेयर करके रहता और खाना भी खुद बनाता। पढ़ाई का खर्च भी पिता के पैसों से ही चल रहा था।

वर्ष 2018 में अजीत सिंह ने डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना और कुछ कर दिखाने के जज्बे के साथ पीएससी कोचिंग ज्वॉइन कर ली। अजीत ने वर्षा 2019 में परीक्षा दिया, लेकिन मामला कोर्ट में जाने से रिजल्ट नहीं आया। फिर वर्ष 2020 में परीक्षा दिया, हालांकि वो प्री नहीं निकाल सका। इसके बाद वर्ष 2021 में फिर परीक्षा दिया, लेकिन रिजल्ट नहीं आया। अजीत का कहना है कि न तो एमपीपीएससी की भर्ती प्रक्रिया निरंतर हो रही है, न ही एमपी एसआई पटवारी और व्यापम की अन्य परीक्षाएं आयोजित हो रही हैं।

परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था

परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था

बेटे की सरकारी जॉब लगने की आस में पिता लगातार मेहनत कर उसे रुपए भिजवाते रहे। इससे उन पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता रहा। परिवार के लोग भी बार-बार पूछते, बेटा रिजल्ट कब आएगा। मगर अजीत के पास इस बात का कोई जवाब नहीं होता। इस बार आर्थिक समस्या बढ़ गई। गांव में बारिश की कमी के चलते 20 एकड़ खेत में फसल ही नहीं लग पाई और नुकसान अलग हो गया। गरीबी संकट से जूझते पिता को देख अजीत ने इंदौर में रहकर ही तैयारी करने और अपना खर्च उठाने का फैसला लिया।

कुछ फ्रेंडों की मदद से उसने 10 हजार रुपए महीने की दुकान किराए पर ली। इसमें उसने पीएससी समोसा वाला नाम से दुकान खोली। ये दुकान खोलने का विचार भी अजीत के मन में इसलिए आया क्योंकि वर्ष 2015 में उसके पिता ने 4 से 6 महीने के लिए दुकान खोला था, मगर नुकसान के चलते उसे बंद करना पड़ा था। इस दौरान अजीत ने होटल चलाने और समोसा बनाने का तरीका सीखा।

दुकान खोलने के बाद भी नहीं छोड़ी तैयारी

दुकान खोलने के बाद भी नहीं छोड़ी तैयारी

अजीत का कहना है कि दुकान खोलने के बाद भी उसने अपनी तैयारी करना नहीं छोड़ा है। वो सुबह 4 बजे उठता है और 4 से 8 बजे तक अपनी पढ़ाई करता है। इसके बाद वो अपने घर के काम कर दुकान आ जाता है। यहां वो समोसे बनाने का काम करता है। इसमें समोसे का चटनी, मसाला, तैयार करता है, इसके अलावा समोसा को बनाकर उन्हें तलने का काम भी वो खुद ही करता है। दोपहर 2 बजे से रात 9 बजे तक वो दुकान पर ग्राहकों को समोसे बेचता है। फिर दुकान बंद कर कमरा पर जाता है और वहां खाना खाकर 10 से 11 बजे तक सो जाता है। हालांकि वो अभी पढ़ाई के लिए 3 से 4 घंटे ही दे पाते हैं।

दुकान पर अखबार की जगह रखी किताबें

दुकान पर अखबार की जगह रखी किताबें

अजीत ने अपनी दुकान पर अखबार रखने के बजाए पीएससी एग्जाम में काम आने वाली, करंट अफेयर, प्रतियोगी की किताबें रखी हैं। जब दुकान पर ग्राहक नहीं रहते हैं तो वो उस खाली वक्त में उन किताबों से पढ़ाई करता है और यहां आने वाले छात्र-छात्राएं भी इन किताबों को पढ़ते हैं।

अपने से दूर नहीं करना चाहते पीएससी को इसलिए रखा नाम

अजीत का कहना है कि वो पिछले कई वर्षों से पीएससी की तैयारी कर रहा है और वर्तमान में भी उसकी तैयारी जारी है। वो अपने आप को पीएससी से अलग नहीं करना चाहता, इसलिए उसने अपनी दुकान का नाम भी पीएससी समोसा वाला रखा है। 1 सितंबर को ही उसने खंडवा नाका स्थित गणेश नगर में ये दुकान खोली है। जहां अब लोगों की भीड़ भी समोसे के लिए लगने लगी है।

रीवा के स्पेशल समोसे

रीवा के स्पेशल समोसे

अजीत ने 1 सितंबर से ही दुकान शुरू की है। बावजूद इसके अपना खर्च निकालने के लिए वो सिर्फ 6 घंटा यानी दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक ही दुकान खोलता है। इस दौरान सिर्फ वो ही समोसे बेचता है। अजीत का कहना है कि वो रीवा के स्पेशल समोसे बनाता है। साथ में यहां स्पेशल चटनी भी है। यहां एक समोसा 8 रुपए में चटनी के साथ और 2 समोसे 15 रुपए में चटनी के साथ, जबकि 1 समोसा मटर के साथ 15 रुपए में और 2 समोसे मटर के साथ 25 रुपए में मिलते हैं।

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