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Hingot yudh : हिंगोट युद्ध में बरसे आग के गोले, कलंगी और तुर्रा सेना ने निभाई परंपरा

दीपावली के बाद गौतमपुरा में होने वाले हिंगोट युद्ध की परंपरा को अबकी बार कलंगी और तुर्रा दोनों ही सेनाओं के योद्धा ने बखूबी निभाया, जहां दीपावली से तीसरे दिन हुए हिंगोट युद्ध में देर शाम जैसे ही इशारा मिला वैसे ही दोनों सेनाओं के योद्धाओं ने एक दूसरे पर हिंगोट बरसाने शुरू कर दिए, जहां देखते ही देखते मैदान में हिंगोट ही हिंगोट दिखाई देने लगे। उधर, इस युद्ध को देखने प्रदेश भर के तमाम जिलों से लोग गौतमपुरा पहुंचे थे, जहां लोगों ने हिंगोट युद्ध देखा। अबकी बार लगभग 7 लोगों के घायल होने की सूचना है। वहीं उधर युद्ध के लिए प्रशासन ने पुख्ता व्यवस्थाएं की हुई थी।

बड़ी संख्या में हिंगोट युद्ध देखने पहुंचे लोग

बड़ी संख्या में हिंगोट युद्ध देखने पहुंचे लोग

कोरोना संक्रमण काल के दो साल बाद आयोजित हुए हिंगोट युद्ध को देखने के लिए लोगों में अलग उत्साह नजर आ रहा था, जहां प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में लोग हिंगोट युद्ध देखने गौतमपुरा पहुंचे थे। इस दौरान विधायक विशाल पटेल और पूर्व विधायक मनोज पटेल भी हिंगोट युद्ध देखने पहुंचे थे, जहां दोनों ही जनप्रतिनिधियों ने आम जनता के साथ बैठकर हिंगोट युद्ध देखा। हिंगोट युद्ध को लेकर सुरक्षा व्यवस्था भी की गई थी, जहां सफलतापूर्वक हिंगोट युद्ध संपन्न हुआ।

बेहद पुरानी है परंपरा

बेहद पुरानी है परंपरा

जानकारी के मुताबिक हिंगोट युद्ध की परंपरा बेहद ही पुरानी है, जहां गौतमपुरा क्षेत्र में रियासत की सुरक्षा में तैनात सैनिक का मुगल सेना के घुड़ सवारों पर हिंगोट दागते थे। सटीक निशाना साधने के लिए यह लगातार प्रेक्टिस किया करते थे। यही कारण है कि, प्रेक्टिस धीरे-धीरे परंपरा में परिवर्तित हो गई, जहां अब यह परंपरा हिंगोट युद्ध के नाम से प्रचलित है, जिसे देखने देश ही नहीं बल्कि दुनिया से लोग इंदौर के गौतमपुरा आते हैं।

कुछ इस तरह होता है युद्ध

कुछ इस तरह होता है युद्ध

दीवाली का पर्व मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, जहां अब दीपावली के बाद अलग-अलग परंपराओं को निभाने का सिलसिला जारी है। वहीं इंदौर शहर के पास गौतमपुरा में हर साल दीपावली के बाद हिंगोट युद्ध का आयोजन किया जाता है, जिसमें कलंगी और तुर्रा सेनाओं के बीच हिंगोट युद्ध होता है, जहां दोनों ही सेनाएं एक दूसरे पर हिंगोट बरसाती है। हिंगोट देखने प्रदेश भर से लोग गौतमपुरा पहुंचते हैं, जहां लाखों की संख्या में लोग हिंगोट युद्ध देखते हैं।

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