Indore News: 6 बच्चों की मौत पर कांग्रेस का गुस्सा, 'हल्ला बोल पोल खोल' प्रदर्शन कर इंसाफ मांगा

इंदौर शहर कांग्रेस एवं कांग्रेस सेवादल द्वारा योग पुरुष धाम आश्रम में लापरवाही के कारण हुई बच्चों की मौत के विरोध में 'हल्ला बोल पोल खोल आंदोलन' किया गया, जहां कलेक्टर चौराहे पर मानव श्रृंखला बनाकर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा।

इंदौर शहर कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष देवेंद्र सिंह यादव एवं इन्दौर शहर कांग्रेस सेवादल के अध्यक्ष मुकेश यादव के नेतृत्व में युग पुरुष धाम आश्रम में हुई बच्चों की मौत के विरोध मे हल्ला बोल पोल खोल आंदोलन कर मानव श्रृंखला बनाकर मुख्यमंत्री मोहन यादव एवं कलेक्टर आशिष सिंह के नाम अपर कलेक्टर प्रियंका चौरसिया के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेसजन मौजूद थे।

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यादव ने ज्ञापन के माध्यम से कहा की, विगत दिनों युग पुरूष धाम आश्रम इन्दौर में 6 दिव्यांग बच्चों की मौत हुई और 68 से अधिक दिव्यांग बच्चे बीमार होने के बाद चाचा नेहरू अस्पताल में भर्ती किये गये, जबकि युग पुरूष धाम में 6 बच्चों से अधिक बच्चो की मौत हुई है, और जिला प्रशासन आधा दर्जन बच्चो की मौत बता रहा है, जबकि शमशान व कब्रिस्तान में जो शव दफनाए गए है उनके आंकड़े व जिला प्रशासन के आंकड़ो में असमानता क्यों बताई जा रही है?, वहीं आश्रम की संचालिका व संचालक पर जिला प्रशासन द्वारा नोटिस देकर खाना पूर्ति की जा रही है, जो कि मृत अनाथ बच्चो के साथ अन्याय है। वहीं जिला प्रशासन द्वारा जो जांच कमेटी बनाई गई है, वह क्या जांच करेगी, क्योंकि उसके संचालककर्ता पर प्रशासन ने अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया है। यह घोर अपराध की श्रेणी में आता है।

कांग्रेस नेताओं ने बताया कि, हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए,वहीं कुछ बच्चो की जानकारी भी जिला प्रशासन के संचालिका द्वारा छिपाई गई है, इसकी भी जांच उच्च स्तरीय एवं सर्वदलीय कमेटी बनाकर प्रशासन को करना चाहिए, क्योंकि यह मामला प्रधानमंत्री के नजदीकी एक सन्त का आश्रम है शासन प्रशासन द्वारा संस्था को सवा करोड़ के करीब अनुदान दिया जाता है।

वहीं दानदाताओ द्वारा भी आश्रम में दान दिया जाता है। उक्त अनुदान एवं दानदाताओ द्वारा दिये जा रहे दान की जांच कराई जाये कि यह राशि किस फर्जी तरीके से खर्च की गई है। वहीं आश्रम में रहने वाले बच्चो का नियमित जांच परिक्षण नहीं होता था, वहीं विभाग के अधिकारी जब संस्था का निरिक्षण करने आते थे, तब उन्होने निरिक्षण के अंतर्गत खान-पान व पानी की भी जांच नहीं की, वह निरिक्षण के दौरान आश्रम की सारी खामियां गलतीयों दर किनार करते हुए उन्हें क्लीनचीट दे दी जाती थी व बीमार बच्चो को किन-किन डॉक्टरो ने उपचार किया कि नहीं किया,उसकी भी जांच की जाये,अगर डॉक्टर समय पर बच्चो का परिक्षण करते तो बच्चो की बीमारी शीघ्र पकड़ आ जाती है।

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