MP Mhow infantry school से आर्मी ऑफिसर लापता, यूपी एटा के रहने वाले है लेफ्टिनेंट मोहित गुप्ता
Army officer missing from MP Mhow: मध्य प्रदेश के इंदौर इन्फैंट्री स्कूल में ट्रेनिंग के लिए निकले लेफ्टिनेंट मोहित गुप्ता रहस्यमय ढंग से गायब हो गए हैं। जिससे ट्रेनिंग सेंटर समेत सेना के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। महू पुलिस ने सूबेदार जरमाल सिंह की लिखित शिकायत पर मोहित की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर तलाश शुरू कर दी हैं।
महू महू थाना इंचार्ज दीपक राठौर ने बताया कि लेफ्टिनेंट मोहित गुप्ता शुक्रवार सुबह छह बजे से गायब हैं। उन्होंने कहा कि अन्य रैंक के सभी अधिकारियों और कर्मियों को सुबह छह बजे शारीरिक प्रशिक्षण (पीटी) में शामिल होना था, लेकिन मोहित वहां नहीं थे, जिसके बाद उनके प्रशिक्षकों ने उनके पाठ्यक्रम के साथियों से यह जांचने के लिए कहा कि क्या वह बीमार हैं।

राठौर ने कहा, ''सुबह करीब साढ़े सात बजे मोहित के कमरे की जांच की गई और जब वह वहां नहीं मिले, तो अधिकारियों को उनके गायब होने की सूचना दी गई। जब वह कहीं नहीं मिले, तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।'' उन्होंने बताया, ''इन्फैंट्री स्कूल के अधिकारियों ने गायब अधिकारी का मोबाइल नंबर और स्थायी पता पुलिस को मुहैया करा दिया है। उसका मोबाइल नंबर बंद है।''
राठौर के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के एटा शहर के श्रीनगर इलाके में रहने वाले लेफ्टिनेंट मोहित के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को उनके गायब होने के बारे में सूचित कर दिया गया है साथ ही उनके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की मांग की गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन लोग उनके संपर्क में थे।
सूत्रों के अनुसार, लेफ्टिनेंट मोहित को आखिरी बार पीटी वर्दी में देखा गया था और वह महू में माल रोड के किनारे वालोंग द्वार के पास युवा अधिकारियों के आवास में स्थित अपने कमरे से सुबह छह से 7.30 बजे के बीच लापता हो गए। मोहित ने अपनी मोटरसाइकिल वहीं छोड़ दी और ऐसा माना जा रहा है कि वह पैदल ही निकले थे। इन्फैंट्री स्कूल में विभिन्न सेवाकालीन पाठ्यक्रमों के लिए आने वाले अधिकारियों और अन्य रैंक के कर्मियों के लिए सख्त नियम हैं और उन्हें परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं है।
परिसर में सिविलियन ठेकेदारों द्वारा संचालित सभी सुविधाएं और दुकानें हैं, ताकि प्रशिक्षु बाहर नहीं निकलें।बाहर जाने की तत्काल आवश्यकता होने पर उन्हें एक अधिकारी से 'आउट पास' लेना होता है और सभी द्वारों पर सुरक्षा के लिए तैनात डिफेंस सेक्युरिटी कोर (डीएससी) कर्मी उनके इस पास को देखने के बाद ही उन्हें बाहर जाने की अनुमति देते हैं।












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