जयपुर में जीका वायरस का कहर, मरीजों की संख्या बढ़कर 72 हुई
जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में जीका वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इससे संक्रमित लोगों की संख्या 60 से बढ़कर 72 हो गयी है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को इस बारे में हुई समीक्षा बैठक के बाद यह नया आंकड़ा जारी किया। सोमवार को जयपुर से 12 नए मामले सामने आए है। राजधानी जयपुर में जीका वायरस संक्रमण के ज्यादातर मामले शास्त्रीनगर इलाके में सामने आए हैं, जहां फॉगिंग व अन्य एहतियाती उपाय किए जा रहे हैं।

संजीव कुमार, अतिरिक्त सचिव (स्वास्थ्य), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न राज्य प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की। उन्होंने जीका के प्रभावी नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय वेक्टर बोर्न रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत निर्धारित दिशानिर्देशों को लागू करने के लिए कहा है। प्रभावित क्षेत्रों में सर्वेक्षण आयोजित करने वाले चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग की 280 से अधिक टीमों ने अब तक 96,000 घरों का सर्वेक्षण किया है। वहीं, लार्वा पाए गए 68 घरों पर 44,000 रुपये का कुल जुर्माना लगाया गया है।
क्या है जीका वायरस
जीका वायरस एडीस एजेप्टी मच्छर के काटने से फैलता है, जो डेंगू और चिकनगुनिया के लिए भी जिम्मेदार होता है लेकिन पिछले साल ब्राजील के वैज्ञानिकों ने एक अन्य प्रकार के जीका संचरण करने वाले मच्छर की पहचान की थी, जो अक्टूबर 2015 के बाद से दक्षिण अमेरिकी देश के नवजात शिशुओं में माइक्रोसेफेली के 1,700 से अधिक मामलों के लिए जिम्मेदार था।
जीका वायरस के लक्षण इस वायरस के लक्षण
संक्रमित मच्छर के काटने के 8 से 10 दिनों के बाद दिखने लगते हैं।
जोड़ों में दर्द
आंखों का लाल होना
सिरदर्द
बुखार सर्दी लगना और शरीर पर लाल रंग के चकते दिखना
इन लक्षणों में से कोई भी लक्षण जीका वायरस का संकेत हो सकता है।
जीका वायरस से बचने के लिए क्या करें?
जीका वायरस को फैलाने वाले मच्छर से बचने के लिए वही उपाय हैं जो आप डेंगू से बचने के लिए करते आए हैं। जैसे मच्छरदानी का प्रयोग, पानी को ठहरने नहीं देना, आस-पास की साफ-सफाई, मच्छर वाले एरिया में पूरे कपड़े पहनना, मच्छरों को मारने वाली चीज़ों का इस्तेमाल और खून को जांचे बिना शरीर में ना चढ़वाना।












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