रूस और ब्रिटेन की वैक्सीन के टीकाकरण पर दुनियाभर की नजर, इन देशों में वैक्सीनेशन की कहानी है अलग-अलग
नई दिल्ली। पूरी दुनिया अभी तक कोरोना वायरस (Coronavirus) से बिना वैक्सीन के लड़ रही थी, लेकिन अब दुनिया में कई देश वैक्सीन की दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं तो कई अभी कामयाबी के रास्ते पर हैं। दुनिया के कई देशों ने वैक्सीन का सफल निर्माण कर भी लिया है तो कई देश तो सामूहिक टीकाकरण की तैयारी शुरु कर चुके हैं। हालांकि, सामूहिक टीकाकारण अभियान के पीछे हर देश की स्थिति और कहानी अलग-अलग है।

हर देश में वैक्सीन के टीकाकरण की अलग है कहानी
रूस में सामूहिक टीकाकरण का कार्य शनिवार से शुरू हो गया है तो वहीं ब्रिटेन में मंगलवार से टीकाकरण अभियान शुरू हो रहा है। ब्रिटेन और रूस ने आगे-पीछे ही अपने-अपने देश में टीकाकरण अभियान की घोषणा की है। वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका और तुर्की भी इसी महीने बड़े पैमाने पर टीकाकरण शुरू करने की तैयारी में है। चीन, यूएई और अन्य देश में सैकड़ों हजारों लोग पहले ही वैक्सीन लगवा चुके हैं। इनमें से कई वैक्सीन अपने ह्यूमन ट्रायल में सफल हुई है तो कुछ के परिणाम भरोसेमंद नहीं रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ रूस की वैक्सीन स्पूतनिक वी वैक्सीन के टीकाकरण को लेकर भी कई एक्सपर्ट को शंका है।
रूसी और चीनी वैक्सीन पर अभी भी हैं कई अनिश्चितताएं
ब्रिटेन ने Pfizer / BioNTech की वैक्सीन को मंजूरी मिली है। ये वैक्सीन प्रभाव और सेफ्टी दोनों ही मापदंडों पर खरी उतरी है। इस वैक्सीन के जल्द ही संयुक्त राज्य अमेरिका में अप्रूवल मिलने की उम्मीद है। जबकि रूसी और चीनी वैक्सीन को लेकर अभी भी कई अनिश्चितताएं जुड़ी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लाखों स्वस्थ लोगों को दिए जाने से पहले इससे जुड़े कई भ्रम को मिटाना जरूरी है।
क्या इच्छाएं हैं एक्सपर्ट की?
कई देशों में वैक्सीन को लेकर सवाल इसलिए भी खड़े हो रहें हैं, क्योंकि एक्सपर्ट इस बात का आश्वासन चाहते हैं कि वैक्सीन लगाने के बाद भी कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित होता है, तो उनमें सामान्य ही लक्षण हों। कोई भी मरीज वैक्सीन के बाद गंभीर हालत में न पहुंचे।
दुनियाभर में 13 वैक्सीन हैं फाइनल स्टेज में
आपको बता दें कि दुनियाभर में कोरोना वैक्सीन बनाने की रेस शुरू हो चुकी है। जब चीनी वैज्ञानिकों ने जनवरी में कोरोना वायरस के जीनोम साझा किया था, उसके बाद से ही विश्व के अलग-अलग लैब में वैक्सीन पर काम शुरू हो गया था। मार्च में संयुक्त राज्य अमेरिका में मॉडर्ना और चीन में सिनोवैक ने कोरोना वायरस वैक्सीन का पहला क्लिनिकल ट्रायल किया था। इसके अलावा भारत, थाईलैंड और क्यूबा समेत कई वैक्सीन निर्माता इस प्रयास में शामिल हैं। इस वक्त दुनियाभर में 13 वैक्सीन फाइनल या फेज 3 ह्यूमन ट्रायल के स्टेज पर हैं। इसके साथ ही 58 वैक्सीन का परीक्षण लोगों पर किया जा रहा है।












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