OMG Video: ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी के दौरान हनुमान चालीसा का जाप करती रही महिला, 3 घंटे तक चला ऑपरेशन
नई दिल्ली, जुलाई 24: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के एक ऑपरेशन थियेटर में ब्रेन सर्जरी के दौरान एक महिला मरीज हनुमान चालीसा का पाठ करती नजर आई। एम्स के न्यूरो सर्जरी डिपार्टमेंट में महिला की पूरी तरह बेहोश किए बिना ही ब्रेन ट्यूमर की सफल सर्जरी की गई। इस दौरान महिला पूरे समय डॉक्टरों से बात करती रही, इसके अलावा उसने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। महिला को चार दिन पहले अस्पताल में भर्ती किया गया था। शनिवार को उन्हें छुट्टी दे दी गई। इस ऑपरेशन का वीडियो भी खूब वायरल हो रहा है।

ऑपरेशन टेबल पर हनुमान चालीसा पढ़ती रही लड़की
24 वर्षीय महिला ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित थी और ट्यूमर हटाने के लिए उसका ऑपरेट किया गया था। सर्जरी के दौरान महिला पूरी होश में रही और हनुमान चालीसा का जाप करती रही। न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉक्टर दीपक गुप्ता ने बताया , "तीन घंटे तक चली पूरी सर्जरी के दौरान मरीज होश में थी। महिला मरीज स्कूल टीचर थी, जिसके मस्तिष्क के बाईं ओर बड़ा ब्रेन ट्यूमर (ग्लियोमा) था। डॉक्टर जब उसका ट्यूमर निकाल रहे थे, तब वह हनुमान चालीसा का पाठ करती रही।

महिला से इसलिए कराया गया जाप
डॉ दीपक गुप्ता ने बताया कि, कई बार सामान्य ब्रेन ट्यूमर सर्जरी में मरीज को बेहोश कर दिया जाता है, लेकिन इससे सर्जरी के दौरान उसके मस्तिष्क के स्पीच एरिया पर पड़ रहे प्रभाव की निगरानी नहीं की जा सकती। लेकिन इस तकनीक (अवेक ब्रेन सर्जरी) से मरीज की बोलने की क्षमता को सर्जरी के दौरान बार-बार जांचा जा सकता है। इसी क्षमता को जांचने के लिए हम चाहते थे कि मरीज से कुछ बुलवाया जाए।

जाप मरीज और डॉक्टर दोनों के लिए काफी मददगार सहायक हुआ
डॉ. गुप्ता ने आगे कहा कि महिला को स्कैल्प ब्लॉक के लिए लोकल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया गया और उसे दर्द निवारक दवाएं दी गईं। उन्होंने कहा कि, मरीज द्वारा ऐसे समय में धार्मिक जाप से साइक्लॉजीकल प्रभाव भी पड़ता है। इतना ही नहीं हनुमान चालीसा के जाप के समय ओटी के अंदर भी एक सकारात्मक माहौल बना रहा। जो मरीज और डॉक्टर दोनों के लिए काफी मददगार सहायक हुआ।

कई मरीज कुरान की आयतें भी पढ़ते हैं
डॉक्टर दीपक गुप्ता ने बताया कि दिमाग को बेहोश किए बिना दिमाग की सर्जरी सालों से हो रही हैं। वे खुद अब तक 100 से अधिक ऐसी सर्जरी कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि मरीज अपनी आस्था के हिसाब से सर्जरी के दौरान कुछ भी पढ़ सकता है। कई मरीज कुरान की आयतें भी पढ़ते हैं। सफल ऑपरेशन के बाद, महिला अभी डॉक्टरों की देखरेख में है और उसे शनिवार, 24 जुलाई को अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। ऑपरेशन थियेटर में मौजूद किसी सदस्य ने इसका वीडियो बना लिया।
देखें वीडियो
डॉ गुप्ता ने बताया कि, युवती की सर्जरी को सफल बनाने के लिए उसके सिर के अंदर की नसों को अलग-अलग रंगों से कोडिंग की गई थी, जिसे चिकित्सा की भाषा में ट्रेक्टोग्राफी कहते हैं। इस प्रकार की सर्जरी से ब्रेन को काफी कम नुकसान होता है। इस प्रकार की सर्जरी से ब्रेन को काफी कम नुकसान होता है और इस दौरान मरीज के मस्तिष्क के महत्वपूर्ण क्षेत्र क्षतिग्रस्त न हों इसके लिए उन्हें जगाए रखा जाता है। ऐसा ही एक मामला दिसंबर 2018 में जयपुर के एक अस्पताल से भी सामने आया था। मिर्गी के दौरे से पीड़ित एक 30 वर्षीय मरीज ने अपनी बोलने की क्षमता को खोने के डर से होश में क्रैनियोटॉमी करवाई थी।
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