LAC पर पेट्रोलिंग प्वाइंट-15 से पीछे हट सकती है चीन और भारत की सेना, बनाया जा सकता है बफर जोन- सूत्र
नई दिल्ली, 20 जुलाई: भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनातनी के बीच सुलह की खबर मिल रही है। मई 2020 में दोनों देशों की सेनाओं के बीच गतिरोध बढ़ा था। ऐसे में दोनों ही देशों ने अपने जवानों की तैनाती बढ़ाई। हाल ही में रविवार (17 जुलाई) को भारत-चीन कोर कमांडर लेवल की 16वें दौर की बैठक हुई, जिसका अब पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिल रहा है। सूत्रों के हवालों से खबर है कि पेट्रोलिंग प्वांइट 15 (Patrolling Point 15 ) के पास दोनों देशों के सैनिकों की वापसी हो सकती है।

पेट्रोलिंग प्वाइंट-15 से सैनिकों की वापसी
दरअसल, मई 2020 में तनाव बढ़ने के बाद से दोनों देशों के लगभग 50 सैनिकों को फ्लैशपॉइंट के एक किलोमीटर के भीतर तैनात किया गया है। 17 जुलाई को भारत की तरफ चुशुल-मोल्दो सीमा पर हुई कमांडर कोर लेवल की बैठक के बाद अब पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 से सैनिकों के हटने की संभावना जताई जा रही है।
बनाया जा सकता है बफर जोन- सूत्र
सरकारी सूत्रों के मुताबिक यह संभावना है कि भारतीय पक्ष अपनी स्थिति को फ्रिक्शन पाइंट (टकवार स्थल) से करम सिंह हिल फीचर की ओर ले जा सकता है, जबकि चीन उत्तर की ओर वापस जा सकता हैं। बताया जा रहा है कि निगरानी के तौर-तरीकों को निकट भविष्य में अंतिम रूप दिया जाएगा, जो बफर जोन की तरह हो सकता है। बता दें कि मई 2020 से जब चीनी सेना ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर यथास्थिति को बदलने की कोशिश की, तो दोनों देशों ने पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 के पास अपनी तैनाती बढ़ा दी थी। जो एक टकराव वाली जगह के रूप में उभरा है।
वहीं भारत 18 मई 2020 से पहले की स्थिति में टकराव वाली जगहों से सैनिकों को पूरी तरह से हटाने और सैनिकों को वापस ले जाने पर विचार कर रहा है। बता दें कि एलएसी पर सैनिकों का अंतिम विघटन एक साल पहले हुआ था। गोगरा में पेट्रोल प्वाइंट 17 ए पर गतिरोध का सीमित समाधान हुआ था। भारत और चीन ने भी पैंगोंग त्सो के दोनों किनारों से सैनिकों को हटा दिया।












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