क्या U-टर्न लेने वाले पार्रिकर खरे उतरेंगे मोदी की उम्मीदों पर?
नयी दिल्ली। नरेन्द्र मोदी सरकार जल्द ही अपने कैबिनेट का विस्तार करने जा रही है। मोदी की कैबिनेट में 10 नए मंत्री शामिल किए जाएंगे। नए मंत्रीमंडल में शामिल किए जाने वाले मंत्रियों में कई राज्यों के नेता शामिल है, लेकिन इन सभी में सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर की। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खासमखास मनोहर पार्रिकर को रक्षा मंत्रालय का कार्यभार सौंपा जा सकता है, लेकिन अब तक इस पर मुहर नहीं लगी है।

आईआईटी इंजीनियरिंग करने के बाद राजनीतिक में कदम रखने वाले पार्रिकर सादगी के मिशाल है। पीएम मोदी रक्षा मंत्री के लिए ईमानदार, सख्स और साफ सुथरे छवि वाले व्यक्तित्व की तलाश कर रहे है, जिसके लिए पार्रिलकर सबसे उपयुक्त माने जाते है। मोदी चाहते हैं कि रक्षा मंत्री ऐसा व्यक्ति बने जो पाकिस्तान और चीन के खिलाफ सख्त फैसले कर पाए, लेकिन क्या इस मुद्दे पर मनोहर पार्रिकर सफल हो पाएंगे। क्या वो मोदी के सपनों को साकार कर पाएंगे?

पार्रिकर सादगी, ईमानदारी, सज्जनता व सरलता के प्रतीक हैं, लेकिन जब बात फैसले लेने की आती है तो वो यू-टर्न लेने में भी महारथ हासिल कर चुके है। गोवा के मुख्यमंत्री के तौर पर कई बार उन्होंने अपने ही फैसलों को बदल दिया है। फिर चाहे वो खनन का मामला हो या फिर कसीनो का। लैंड रिसोर्स मैनेजमेंट की बात हो या फिर गोवा ट्यूरिज्म की। मनोहर पार्रिकर ने खुद अपने फैसलों को बदल दिया है।

सरकारी खर्च पर फुटबॉल विश्वकप देखने के लिए 3 मंत्रियों सहित 6 विधायकों के प्रस्तावित ब्राजील दौरे के मुद्दे पर विपक्ष के हमलों के बाद मुख्यमंत्री पार्रिकर ने अपने फैसले बदलते हुए इसे रद्द कर दिया तो वहीं मोदी के समर्थन में कसीदे पढ़ने वाले पार्रिकर ने यूटर्न लेते हुए कहा कि लालकृष्ण आडवाणी ‘सत्यनिष्ठा और ईमानदारी' के मामले में उनके आदर्श हैं।

इतना ही नहीं जब वो विपक्ष में थे तो उन्होंने कैसिनो का विरोध किया था, लेकिन जब उन्होंने सत्ता संभाली तो उन्हें ये बाजार दिखने लगा। उन्होंने अपनी कहीं बात को पलटते हुए कहा कि कैसिनो से गोवा सरकार को भारी राजस्व प्राप्त होता है ऐसे में वो इसे बंद नहीं कर सकते हैं। उनका वहीं हाल गोवा में बिकनी बीच के मसले पर भी रहा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि बार-बार अपने फैसलों से पलटने वाले पार्रिकर क्या रक्षामंत्री के तौर पर सफल हो पाएंगे। क्या वो पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और चीन के खिलाफ कड़े फैसले ले पाएंगे?












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