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Vande Mataram Debate: लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी बोले - 'आजादी की लड़ाई में वंदे मातरम था चेतना का मंत्र'

Vande Mataram Debate PM Modi Speech: लोकसभा में वंदे मातरम पर 10 घंटे की चर्चा सोमवार को शुरू हो गई है। इस गीत के 150 साल पूरे होने के मौके पर यह चर्चा हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि 'वंदे मातरम सिर्फ राजनैतिक आजादी की लड़ाई का मंत्र नहीं था। यह भारतीयों के लिए आजादी की प्रेरणा और मातृभूमि को मुक्त कराने का संकल्प मंत्र था। पीएम मोदी ने इस दौरान कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जब भारत विचार के 100 साल हुए, तो आपातकाल में नागरिक अधिकारों का गला घोंटा गया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'जब वंदे मातरम के 100 साल पूरे हुए तब देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। भारत के संविधान का गला घोंट दिया गया। एक ऐतिहासिक समय में देशभक्ति के लिए जीने मरने वाले लोगों को सलाखों में बंद कर दिया गया था। आपातकाल एक काला कालखंड था।'

Vande Mataram Debate PM Modi Speech

Vande Mataram Debate: पीएम ने याद किया बंकिम चंद्र को

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंकिम चंद्र चटर्जी को याद करते हुए कहा कि आज वंदे मातरम हर भारतीय की रगों में राष्ट्रभक्ति का गीत बनकर दौड़ रहा है। उन्होंने कहा 'देश आत्मनिर्भर बने। 2047 में विकसित भारत बनाने के इस संकल्प को दोहराने के लिए वंदे मातरम बहुत बड़ा अवसर है। वंदे मातरम की इस यात्रा की शुरुआत बंकिम चंद्र जी ने 1875 में की थी। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि गीत ऐसे समय लिखा गया था जब 1857 में स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेज सल्तनत बौखलाई हुई थी। उस समय अंग्रेजों के राष्ट्रीय गीत- 'गॉड सेव द क्वीन' घर घर पहुंचाने का षडयंत्र चल रहा था। ऐसे वक्त में भारतीयता और राष्ट्रप्रेम को जन-जन तक पहुंचाने के लिए यह गीत लिखा गया था।'

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PM Modi ने किया प्रभु श्रीराम का जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वंदे मातरम चर्चा के दौरान कहा कि हमारे यहां वेदकाल से कहा जाता है कि माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः अर्थात यह भूमि (पृथ्वी) मेरी माता है और मैं पृथ्वी का पुत्र हूं। पीएम ने इसी श्लोक को आगे प्रङु श्रीराम की परंपरा से जोड़ते हुए कहा, 'यही वो विचार है, जिसको प्रभु श्रीराम ने भी लंका के वैभव को छोड़ते हुए कहा था कि जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। वंदे मातरम यही महान सांस्कृतिक परंपरा का आधुनिक अवतार है।'

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उन्होंने आगे कहा कि बंकिम दा ने जब वंदेमातरम् की रचना की तो वह स्वतंत्रता आंदोलन का स्वर बन गया। पूर्व से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण। वंदे मातरम् हर भारतीय का स्वर बन गया।

'वंदे मातरम ने हर उम्र के लोगों में भरी राष्ट्रभक्ति'

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'आजादी की लड़ाई में हमारे देश के बालक भी पीछे नहीं थे। छोटी छोटी उम्र में जेल में बंद कर दिया जाता, कोड़े मारे जाते। बच्चे-बुजुर्ग लगातार वंदे मातरम के लिए प्रभात फेरी निकालते थे। अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था। बच्चे उन दिनों कहते थे - हे मां संसार में तुम्हारा काम करते और वंदे मातरम कहते जीवन भी चला जाए, तो वो जीवन भी धन्य है। ये गीत उन बच्चों की हिम्मत का स्वर था। बंगाल की गलियों से निकली आवाज देश की आवाज बन गई थी।'

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लंदन के इंडिया हाउस में वीर सावरकर ने वंदे मातरम गीत गाया था। वहां ये गीत बार-बार गूंजता था। वंदे मातरम के नाम से अखबार निकाले गए। भीकाजी कामा ने पेरिस में अखबार निकाला और उसका नाम भी वंदे मातरम रखा था। वंदे मातरम ने भारत को स्वावलंबन का रास्ता भी दिखाया। यह भारतीयों के आत्मनिर्भर होने का राष्ट्रगीत था।

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