Mamata Banerjee: वंदे मातरम पर बहस! ममता बनर्जी का BJP पर वार, बोलीं- बंगाल के महान नेताओं की अनदेखी क्यों?
Mamata Banerjee on Vande Mataram: संसद में वंदे मातरम को लेकर शुरू हुई बहस अब राजनीतिक तकरार में बदल गई है। इस विवाद पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी कुद गई और सोमवार, 8 दिसंबर को भाजपा पर तीखा हमला बोला।
सीएम बनर्जी ने कहा कि संसद में वंदे मातरम को लेकर जिस तरह की राजनीति हो रही है, वह देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों और समाज सुधारकों का अपमान है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला...

ममता बनर्जी ने क्या कहा?
ममता बनर्जी ने कहा, मैंने संसद की बहस सुनी। बीजेपी के कुछ लोग कह रहे थे कि वे नेताजी की विचारधारा को नहीं मानते। आप नेताजी सुभाष चंद्र बोस को सम्मान नहीं देते, रवींद्रनाथ टैगोर को नहीं मानते, राजा राममोहन राय का महत्व नहीं समझते - तो आखिर आप किसे मानते हैं? उन्होंने आगे कहा कि बंगाल की सांस्कृतिक और स्वतंत्रता संघर्ष की विरासत पूरे देश की धरोहर है, और उसे राजनीतिक नजरिए से देखने की कोशिश बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
क्या है वंदे मातरम विवाद की पृष्ठभूमि
संसद में आज वंदे मातरम को लेकर बहस उस समय तेज हो गई जब कुछ सांसदों ने इसकी अनिवार्यता और राष्ट्रगान के समान दर्जे पर अपनी राय रखी। विपक्ष के कुछ सदस्यों ने कहा कि देशभक्ति को किसी मजबूरी से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, जबकि कुछ भाजपा सांसदों ने इसके खिलाफ तर्क देने वालों को देशविरोधी मानसिकता का बताया। इसी संदर्भ में ममता बनर्जी का बयान सामने आया, जिसने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया।
"बंगाल की विरासत पूरे देश की धरोहर" - ममता
मुख्यमंत्री ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर, राजा राममोहन राय, ईश्वरचंद्र विद्यासागर और बंगाल के अनेक विभूतियों ने भारत के निर्माण में अमूल्य योगदान दिया। ममता बनर्जी ने कहा कि आज संसद में जो बातें कही जा रही हैं, वे इस विरासत का अपमान करती हैं। देश की एकता का संदेश देने वाले नेताओं को राजनीति की कसौटी पर नहीं तौलना चाहिए।
भाजपा ने क्या कहा?
बीजेपी नेताओं ने ममता बनर्जी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस अनावश्यक रूप से मुद्दों को सांप्रदायिक और क्षेत्रीय रंग दे रही है। पार्टी का कहना है कि वंदे मातरम पर राष्ट्रीय सम्मान की बात उठाना राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्रभावना की अभिव्यक्ति है। वंदे मातरम को लेकर बहस ऐसे समय हो रही है जब संसद का सत्र जारी है और विपक्ष-विशेषकर टीएमसी-सरकार के कई मुद्दों पर लगातार हमलावर है। ममता बनर्जी का यह बयान आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले सकता है।












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