प्रशांत किशोर कांग्रेस को जोड़ेंगे या तोड़ेंगे ?
नई दिल्ली, 02 अक्टूबर। प्रशांत किशोर कांग्रेस को जोड़ेंगे या तोड़ेंगे ? गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री लुइजिन्हो फेलेरियो कांग्रेस छोड़ कर तृणमूल में शामिल हुए हैं। फेलेरियो को तृणमूल में शामिल होने के लिए किसी और ने नहीं बल्कि प्रशांत किशोर ने प्रेरित किया। फेलेरियो पिछले कुछ समय से कांग्रेस में असहज महसूस कर रहे थे। प्रशांत किशोर ने अपनी कंपनी आइपैक के जरिये फेलेरियो से सम्पर्क साधा।

फेलेरियो न तो ममती बनर्जी से मिले थे और न ही ही तृणमूल कांग्रेस की कार्यशाली के बारे में कुछ जानते थे। प्रशांत किशोर खुद फेलेरियो से मिले। उन्होंने इस तरह 'कन्विंस' किया कि फेलेरियो को जोड़ा फूल पसंद आ गया। जिस प्रशांत किशोर के दम पर कांग्रेस मजबूत होने का सपना देख रही है उन्होंने ही उसे गोवा में झटका दे दिया। प्रशांत किशोर के साथ कांग्रेस जो लुकाछुपी का खेल खेलती रही, क्या यह उसी का नतीजा है ?

इस तरह गोवा में दाखिल हुई तृणमूल कांग्रेस
चुनावी रणनीति बनाने वाली प्रशांत किशोर की कंपनी आइपैक इन दिनों गोवा में सर्वे कर रही है। कुछ समय पहले लोगों की रायशुमारी और राजनीतिक परिस्थितियों के आंकलन के बीच आइपैक के सदस्यों की लुईजिन्हो फेलेरियो से मुलाकात की थी। पूर्व मुख्यमंत्री फेलेरियो कांग्रेस के विधायक थे। उन्हें गोवा की राजनीति में चालीस साल का अनुभव है। वे कांग्रेस के भविष्य को लेकर बहुत निराश थे। भयंकर गुटबाजी से पार्टी की स्थिति लगातार खराब हो रही थी। अगले साल विधानसभा का चुनाव होना है। ऐसे में वे कुछ नया सोच रहे थे। आइपैक के सदस्यों ने जब फेलेरियो की मन:स्थिति भांप ली तो उन्होंने प्रशांत किशोर से बात की। इसके बाद निगोसिएशन की कमान प्रशांत किशोर ने थाम ली। तृणमूल, फेलेरियो के लिए एक अंजान पार्टी थी। गोवा में उसे शून्य से सफर शुरू करना था। प्रशांत किशोर ने अपने तर्कों से ऐसा समां बांधा कि फेलेरियो तृणमूल कांग्रेस में आ गये। उन्होंने गोवा विधानसभा की सदस्यता और कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। आइपैक पूरे गोवा में सर्वे के बाद 2022 के चुनाव के लिए एक रोडमैप तैयार कर रही है। अब तृणमूल कांग्रेस लुइजिन्हो फेलेरियो के नेतृत्व में गोवा विधानसभा चुनाव लड़ने वाली है।

कांग्रेस को झटका
कांग्रेस का एक मजबूत छत्रप अब तृणमूल के साथ है। सात बार विधायक रहने वाले फेलेरियो 1999 में गोवा के मुख्यमंत्री बने थे। अब वे तृणमूल कांग्रेस के बैनर तले गोवा विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। तृणमूल सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी और किसी दल से समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हे कहा, यह पार्टी तो गोवा में सरकार बनाना ही नहीं चाहती। 2017 में सबसे अधिक विधायक होने के बाद भी कांग्रेस आराम फरमाती रही और भाजपा ने बाजी मार ली। फेलेरियो को भरोसा है कि जिस तरह प्रशांत किशोर की टीम ने पश्चिम बंगाल में कामयाबी दिलायी थी उसी तरह गोवा में भी कमाल होने वाला है। प्रशांत किशोर ने भले चुनावी रणनीतिकार की भूमिका छोड़ दी हो लेकिन वे पर्दे की पीछे से गोवा में तृणमूल की जीत के लिए के लिए सभी दांव आजमाएंगे। यानी वे भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस के खिलाफ भी राजनीतिक लड़ाई लड़ेंगे।

प्रशांत किशोर को लेकर कांग्रेस का उहापोह
प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की थी। इसके बाद कहा जाने लगा कि प्रशांत किशोर अब कांग्रेस में शामिल होंगे कि तब कांग्रेस में शामिल होंगे। चुनावी रणनीति बनाने का काम वे छोड़ चुके हैं। राजनीतिक पारी खेलने को बेताब हैं। लेकिन कांग्रेस ने उनका मामला लटका दिया। फिलहाल वे ब्रेक पर हैं। लेकिन राजनीतिक शह-मात से दूर नहीं हैं। इस बीच उनके भवानीपुर ( ममता बनर्जी का चुनाव क्षेत्र) से वोटर बनने के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वे पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सांसद बन सकते हैं। इसके पहले तक वे कांग्रेस से राजनीति सफर शुरू करने की कोशिश कर रहे थे। वे कांग्रेस में बड़ा पद चाह रहे थे। साथ ही यह अधिकार भी चाह रहे थे कि सिर्फ वही कांग्रेस के सहयोगी दलों के बारे में फैसला करें। यानी चुनाव में कांग्रेस को किस दल के साथ समझौता करना चाहिए और किसके साथ नहीं, इसके निर्णय सिर्फ वे करना चाहते थे। कांग्रेस में किसी आउटसाइडर के लिए यह बहुत बड़ी मांग थी। सोनिया, राहुल और प्रियंका इस मांग पर कोई फैसला नहीं ले सके। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रशांत किशोर की भूमिका सिर्फ सलाहकार तक सीमित रखना चाहते हैं। जब कि प्रशांत किशोर पहले ही यह एलान कर चुके हैं अब वे राजनीति में निर्णायक पारी खेलेंगे। कांग्रेस उहापोह में फंसी रही और प्रशांत किशोर ने उसे गोवा में चौंका दिया।












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