तो पीडीपी-भाजपा सरकार की शुरू हो गई उल्टी गिनती?

नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) जम्मू कश्मीर में भाजपा और पीडीपी की सरकार क्या चलेगी? क्या इसकी उल्टी गिनती शुरू हो गई? दिल्ली में कश्मीर भवन से लेकर प्रेस क्लब और राजनीतिक गलियारों में यह सवाल पूछा जा रहा है। यह बात सही है कि भाजपा और पीडीपी के बीच कभी एकता हो सकती है यह सामान्य कल्पना से परे है। लेकिन हम केवल भाजपा के नजरिये से क्यों सोचते हैं? पीडीपी के नजरिये से भी सोचिए।

कश्मीरी पंडितों की वापसी

भाजपा के समर्थकों को समझना चाहिए कि यह संभव नहीं कि भाजपा सत्ता में आये और 370 खत्म। उसकी प्रक्रिया जटिल है। हालांकि वह व्यावहारिक तौर पर काफी बदल चुका है। कश्मीरी पंडितों की वापसी पर दोनों का इम्तिहान है। पंडित भी वापस जाना नहीं चाहते।

भाजपा के खिलाफ वोट

वरिष्ठ टिप्पमीकार अवधेश कुमार ठीक ही कहते हैं कि पीडीपी को पूरे कश्मीर में वोट ही भाजपा के विरुद्ध मिला। वहां के मुसलमान समुदाय का बड़ा हिस्सा उनके इस प्रचार से प्रभावित था कि भाजपा सत्ता में आ गई तो कश्मीर मेंजितनी भी आपकी आजादी है वह खत्म हो जाएगी। वह धारा 370 खत्म करेगी, आपके हक की लड़ाई को सेना के बूटों से कुचलवा देगी। इसलिए उसके पक्ष में रणनीतिक मतदान हुआ।

पीडीपी ने जोखिम उठाया

पीडीपी यह बात जानते हुए भी सरकार बनाने को तैयार हुई तो उसके लिए भी बहुत बड़ा जोखिम है। बहुत कोशिश हुई पीडीपी, नेशनल कांफ्रेस एवं कांग्रेस की सरकार बनाने की। पर पीडीपी नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ जाकर अपने वजूद पर प्रश्न खड़ा नहीं कर सकती थी। उसका साथ आना मतलब तमिलनाडु में द्रमुक अन्नाद्रमुक का साथ आना।

मुख्यमंत्री बनने के बाद मुफ्ती मोहम्मद सईद ने गोली की बजाय बोली से समस्या हल करने की बात कही है। यही बात 2002 में मुख्यमंत्री बनते समय भी उन्होंने कही थी। अटल जी ने भी अलगाववादियों से बात करवाई थी। अलगाववादी नेता बाजाब्ता दिल्ली आते थे।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+