रजनीकांत : पुरस्कार से पार लगेगी तमिलनाडु में भाजपा की नाव!

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चेन्नई। फिल्म अभिनेता रजनीकांत ने लोकप्रियता के जो उच्च मानदंड तय किये हैं उसको देख कर दादा साहेब फाल्के पुरस्कार का मिलना कोई अचरज की बात नहीं। लेकिन इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। अब माना जा रहा है कि भाजपा ने तमिलनाडु चुनाव में लाभ लेने के लिए रजनीकांत को यह पुरस्कार दिया है। पुरस्कर भले जूरी तय करती है लेकिन तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के पांच दिन पहले इसकी घोषणा क्यों की गयी ? पहले या बाद में भी यह पुरस्कार दिया जा सकता था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। तमिलनाडु में खाता खोलने के लिए भाजपा ने एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है। वह हर एक संभावनाओं को टटोलना चाहती ताकी चुनावी कश्ती को कोई पतवार मिल जाए। भाजपा तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक के साथ मिल कर 20 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। सुपर स्टार रजनीकांत के पूरे तमिलनाडु में करीब 65 हजार फैंस क्लब या प्रशंसक संघ (रजनी मक्कल मंडरम) हैं। इन संघों से लाखों लोग जुड़े हैं। अगर चुनाव में रजनीकांत के समर्थक भाजपा को वोट देते हैं तो तमिलनाडु विधानसभा में उसकी इंट्री हो सकती है।

पुरस्कार से पार लगेगी नाव !
रजनीकांत ने जब चुनावी राजनीति में उतरने की योजना बनायी तब उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन करने का संकेत दिया था। उनकी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह से बात भी हुई थी। तब रजनीकांत अपने फैंस क्लब ( रजनी मक्कल मंडरम) को ही राजनीतिक दल के रूप में बदलने की बात सोच रहे थे। लेकिन उन्होंने राजनीति में आने का विचार छोड़ दिया। रजनीकांत की उम्र 70 साल हो चुकी है। 2016 में उनकी किड़नी का प्रत्यारोपण किया गया था। डॉक्टरों ने आराम करने और भागदौड़ से बचने की सलाह दी थी। स्वास्थ्य कारणों से वे राजनीति में नहीं आये। रजनीकांत को शुरू में द्रमुक का समर्थक माना जाता था। लेकिन 2020 में उन्होंने द्रमुक राजनीति के सूत्रधार पेरियार की खुलेआम आलोचना कर एक नया स्टैंड लिया था। वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मजबूत नेता बता चुके हैं। उनकी तारीफ भी करते रहे हैं। ऐसे में जब केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने रजनीकांत को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार दिये जाने की घोषणा की तो इसे राजनीतिक चश्मे से देखा जाने लगा।

रजनीकांत से भाजपा को फायदा
जब चार महीना पहले रजनीकांत राजनीति में आने की योजना बना रहे थे तब तब यह माना जा रहा था कि इससे द्रमुक को नुकसान होगा। अब कहा जा रहा है कि कमल हासन की पार्टी के चुनाव लड़ने से सत्ता विरोधी वोट बंट जाएंगे जिसका खामियाजा द्रमुक को उठाना पड़ेगा। यानी सत्ता विरोधी वोट बंटते हैं तो एनडीए (अन्नाद्रमुक और भाजपा) को फायदा मिलेगा। इन परिस्थितियों के बीच अगर रजनीकांत के समर्थक भाजपा के पक्ष में मतदान करते हैं तो वह कई सीटों पर जीतने की स्थिति में पहुंच सकती है। तमिलनाडु के ऑटो रिक्शा चालक रजनीकांत के अंधभक्त हैं। वे रजनीकांत में अपना चेहरा देखते हैं। दरअसल 1995 में एक तमिल फिल्म आयी थी जिसका नाम था बाशा। इस फिल्म में रजनीकांत ने ऑटो ड्राइवर मणिक्कम की भूमिका निभायी थी। मणिक्कम एक सीधा-साधा ऑटो डाइवर है जो अन्नाय का बदला लेने के लिए रौद्र रूप धारण कर लेता है। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया। तमिलनाडु के कई सिनेमा घरों में यह फिल्म एक साल तीन महीने तक चलती रही। पूरे तमिलनाडु के रिक्शा चालक भगवान की तरह रजनीकांत को पूजने लगे। रजनीकांत जब अपनी राजनीति पार्टी बनाने की बात सोच रहे थे तब उन्होंने अपना चुनाव चिह्न ऑटो रखने का मन बनाया था। आज भी माना जाता है कि तमिलनाडु के ऑटो चालक रजनीकांत समर्पित प्रशंसक हैं। अगर इन्होंने भाजपा को वोट कर दिया तो कुछ जगहों पर कमल खिल सकते हैं।

खुशबू और रजनीकांत
चर्चित फिल्म अभिनेत्री खुशबू (सुंदर) चेन्नई की थाउजेंड लाइट्स विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। करीब 200 फिल्मों में काम कर चुकी खुशबू तमिलनाडु में इतनी लोकप्रिय हैं कि प्रशंसकों ने उनका मंदिर तक बनवा दिया था। पहले वे द्रमुक में थीं। फिर कांग्रेस में आयीं। अब भाजपा उम्मीदवार बन कर चुनाव लड़ रही हैं। उनकी अपनी फैन फॉलोइंग है। अगर रजनीकांत के प्रशंसकों ने भी उन्हें समर्थन दे दिया तो कम से कम एक सीट पर तो भाजपा की जीत लगभग तय हो जाएगी। वैसे खुशबू ने चुनाव जीतने के लिए पूरा जोर लगा रखा है। चुनाव प्रचार के दौरान 28 मार्च को वे अचानक एक डोसा की दुकान में पहुंच गयीं और खुद डोसा बनाने लगीं। उन्होंने डोसा तो बनाया ही इसको परोसा भी खुद ही। इस बात की खूब चर्चा हुई थी। खुशबू और रजनीकांत 'पांडियन' और 'अन्नामलाई' जैसी कई फिल्मों में एक साथ काम कर चुके हैं। अगर इस जान-पहचान से राजनीतिक लाभ मिल जाए तो कोई अचरज की बात नहीं। यानी रजनीकांत को सम्मानित करने का फैसला भाजपा के लिए फायदेमंद हो सकता है।












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