AAP मुखिया अरविंद केजरीवाल क्या विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A.से कर लेंगे किनारा? जानें वजहें
लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए देश की 26 विपक्षी पार्टियां एकजुट हो चुकी हैं। भाजपा को हराने के लिए विपक्षी राजनीजिक दलों के नेताओं ने I.N.D.I.A.नाम का अपना गठबंधन बनाया है। जिसमें फिलहाल अभी तक आम आदमी पार्टी भी शामिल है।
पटना में विपक्षी गठबंधन की जून में हई पहली मीटिंग में ही आप सुप्रीमों अरविंद की मंशा साफ पता चल गई थी कि वो इस गठबंधन में दिल्ली सेवा विधेयक के खिलाफ विपक्षी एकता जुटाने के लिए जुड़े थे। अब विपक्षी दलों की लाख कोशिश के बावजूद दिल्ली सेवा विधेयक केंद्र की मोदी सरकार ने पास करवा लिया है तो ये सवाल उठ रहा है कि क्या अरविंद केजरीवाल की पार्टी क्या इंडिया गठबंधन छोड़ देगी? आइए जानते हैं वो वजहें जिनके कारण "आप" इस इंडिया गठबंधन से किनारा कर लेगा!

दरअसल, अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी जिन दोनों राज्यों दिल्ली और पंजाब में सत्ता पर काबिज है उन जगहों पर कांग्रेस को ही शिकस्त देकर सत्ता हाथियाई है। कांग्रेस को हराकर ही "आप" ने राष्ट्रीय पार्टी होने का दर्जा हासिल किया है। आम आदमी पार्टी का राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बनने का मौका उन राज्यों में की बदौलत मिला है जहां पर कांग्रेस कमजोर हुई। सीधे तौर पर कहें तो कांग्रेस की कमजोरी का फायदा सबसे अधिक आप को हुआ।
पंजाब और दिल्ली दोनों ही जगहों पर ही कांग्रेस और आप धुर विरोधी राजीनीतिक पार्टी हैं और आप ने कांग्रेस का शिक्स्त देकर ही सत्ता हासिल की। इतना ही नहीं कर्नाटक, हिमाचल, गुजरात और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवारों के खिलाफ आप उम्मीदवार खड़े किए थे। वहीं पंजाब में सत्ता में आने के बाद से आप सरकार पर कांग्रेस नेता बयानबाजी कर संकट खड़े कर रहे हैं।
आप का इंडिया गुट से अलग होना इसलिए भी तय माना जा रहा है क्योंकि पहले कई मुद्दों पर आप ने कांग्रेस से खिलाफ स्टैंड लिया और कई मुद्दो पर विरोधी भी रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के साथ आप का इस विपक्षी गठबंधन में रह पाना मुश्किल ही नजर आ रहा है।
एक वजह ये भी है कि दिल्ली में लगातार दूसरी बात जीतने और पड़ोसी राज्य पंजाब में भी आप अकेले दम पर चुनाव लड़ी है और जीत हासिल की है। जिसके बाद 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर आत्मबल बढ़ा है। दिल्ली जहां से केजरीवाल ने अपनी राजनीति चमकाई, उसी दिल्ली में अरविंद केजरीवाल आगामी 2024 के चुनाव में दिल्ली की सातों सीटों से चुनाव लड़ना चाहेंगे, ऐसे में केजरीवाल इंडिया गठबंधन में रहकर किसी भी हालत में सीटों का बंटवारा कतई करना चाहेंगे।
वहीं लोकसभा चुनाव 2014 से पहले छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्यप्रदेश और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव इसी साल होने वाले हैं। इन चुनावों में बड़ी संख्या में सीटें जीत कर आम चुनाव से पहले आप को राज्यों में मजबूत स्थिति में लाना है। याद रहे केजरीवाल ने शनिवार को छत्तीसगढ़ चुनाव में धासू एंट्री ले ही है। दिल्ली और पंजाब के बाद अब छत्तीसगढ़ चुनाव में केजरीवाल ने फ्री गारंटी योजनाओं का ऐलान कर दिया है। केजरीवाल के इस तेवर से साफ है कि अब इंडिया गठबंधन से वो जल्द किनारा कर लेंगे।












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