शिवपाल यादव पर इतनी मेहरबान क्यों है योगी सरकार, ये है असल वजह

सियासी जानकारों की मानें तो शिवपाल यादव पर सूबे की योगी सरकार यूंही मेहरबान नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी वजह है।

नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले यूपी की सियासत हर रोज करवट बदल रही है। शिवपाल यादव के अलग दल बनाने के बाद जहां सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव अपनी पार्टी को एकजुट करने में जुटे हैं तो वहीं 'चाचा' भी पूरे दम-खम के साथ लोकसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी तरफ प्रदेश की योगी सरकार ने शिवपाल यादव को पहले बंगला और अब जेड प्लस सिक्योरिटी देकर यूपी की सियासी गर्मी को बढ़ा दिया है। सियासी जानकारों की मानें तो शिवपाल यादव पर सूबे की योगी सरकार यूंही मेहरबान नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी वजह है।

सौगात के पीछे ये है गणित

सौगात के पीछे ये है गणित

शिवपाल यादव को यूपी सरकार ने लखनऊ में 6, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग स्थित बंगला दिया है। इस बंगले में इससे पहले बसपा सुप्रीमो मायावती का दफ्तर था। बंगला मिलने की खबर पर अभी सियासी चर्चा छिड़ी ही थी कि शिवपाल यादव को जेड प्लस सिक्योरिटी भी प्रदान कर दी गई। राजनीति के जानकारों का मानना है शिवपाल यादव को इतनी सौगातें मिलने के पीछे जो असली वजह है, वह 6 महीने बाद होने वाला लोकसभा चुनाव है। यूपी में अखिलेश यादव और मायावती के गठबंधन से निपटने के लिए भाजपा कहीं ना कहीं शिवपाल यादव को एक मजबूत कड़ी के तौर पर देख रही है।

यूपी के समीकरणों में शिवपाल का सहारा!

यूपी के समीकरणों में शिवपाल का सहारा!

समाजवादी पार्टी से अलग होने के बाद शिवपाल यादव ने जब समाजवादी सेक्युलर मोर्चा बनाया तो साथ ही यूपी की सभी 80 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का ऐलान भी कर दिया। शिवपाल यूपी के अलग-अलग जिलों में लगातार समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के जिलाध्यक्ष भी नियुक्त कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों का घटनाक्रम देखें तो समाजवादी पार्टी में हाशिए पर चल रहे कई नेता शिवपाल यादव के साथ जा चुके हैं। ऐसे में भाजपा यूपी में शिवपाल यादव की अलग सियासी मौजूदगी को समाजवादी पार्टी के परंपरागत वोटों के बंटवारे के रूप में देख रही है। इन्हीं समीकरणों को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार शिवपाल यादव पर मेहरबान हुई है।

क्या है भाजपा की असली कोशिश

क्या है भाजपा की असली कोशिश

दरअसल, भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि मायावती और अखिलेश यादव के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की दशा में शिवपाल यादव जितना सपा के वोटों को काटेंगे, बीजेपी को उतना ही फायदा होगा। शिवपाल यादव ने खुले तौर पर ऐलान भी किया है कि वो सपा में उपेक्षित चल रहे नेताओं को समाजवादी सेक्युलर मोर्चा से जोड़ेंगे। दोनों दलों के बीच चल रही खींचताऩ आने वाले दिनों में उस वक्त और तेज हो सकती है, जब लोकसभा चुनाव के लिए टिकटों का ऐलान होगा। भाजपा इस खींचतान में शिवपाल यादव की पार्टी को सपा के बागी नेताओं का एक 'मजूबत ठिकाना' बनाने की कोशिश में है।

शिवपाल के दामाद की प्रतिनियुक्ति बढ़ाने पर सहमति

शिवपाल के दामाद की प्रतिनियुक्ति बढ़ाने पर सहमति

ऐसा भी नहीं है कि यूपी की भाजपा सराकर शिवपाल यादव के ऊपर अचानक से मेहरबान हुई है। सरकारी बंगला और जेड प्लस सिक्योरिटी देने से काफी पहले ही यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिवपाल यादव के दामाद आईएएस अधिकारी अजय यादव का डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति अवधि) बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से सहमति प्रदान कर चुके हैं। अजय यादव यूपी में जनवरी 2016 से डेपुटेशन पर कार्यरत हैं। उनका डेपुटेशन पीरियड दिसंबर 2018 में पूरा हो रहा है, जिसे बढ़ाने के लिए सीएम योगी अपनी ओर से सहमति दे चुके हैं।

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