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राकेश अस्थाना को क्यों बनाया गया दिल्ली पुलिस कमिश्नर ? तीन प्रमुख वजह जानिए

नई दिल्ली, 28 जुलाई: गुजरात कैडर के आईपीएस राकेश अस्थाना की अचानक दिल्ली पुलिस कमिश्नर के पद पर नियुक्ति का फैसला वाकई चौंकाने वाला है। उनकी नियुक्ति के बाद यह साफ हुआ है कि 30 जून को 1988 बैच के आईपीएस बालाजी श्रीवास्तव को इस पद पर जो तैनाती हुई थी, वह सिर्फ अतिरिक्त प्रभार के तौर पर थी। श्रीवास्तव को एसएन श्रीवास्तव के रिटायर होने के चलते नियुक्त किया गया था। अस्थाना चार दिन बाद ही रिटायर होने वाले थे, लेकिन उन्हें इतनी अहम जिम्मेदारी दी गई है तो जरूर सरकार ने उनके पुलिसिया करियर में कुछ खास देखा होगा।

केंद्र सरकार ने दूसरी बार लिया ऐसा फैसला

केंद्र सरकार ने दूसरी बार लिया ऐसा फैसला

पूर्व सीबीआई अधिकारी राकेश अस्थाना गुजरात कैडर के 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वे दिल्ली पुलिस के ऐसे दूसरे पुलिस कमिश्नर बने हैं, जिन्हें इंटर-कैडर डेपुटेशन पर लाया गया है। क्योंकि, दिल्ली पुलिस कमिश्नर के पद पर एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) कैडर के आईपीएस की तैनाती होती है। उनसे पहले 2002 में अजय राज शर्मा को यह मौका मिला था, जो यूपी कैडर के अफसर थे। केंद्र सरकार ने इस पद पर अस्थाना की तैनाती का चौंकाने वाला फैसला उनकी रिटायरमेंट से महज चार दिन पहले किया है, जिसे केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जनहित में लिया गया फैसला बताया है। वे 31 जुलाई को आईपीएस की सेवा से सेवानिवृत्त होने वाले थे। फिलहाल उन्हें एक साल का सेवा विस्तार दिया गया है। दिल्ली पुलिस चीफ का पदभार संभालने से पहले वे सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक (डीजी बीएसएफ) थे।

सीबीआई की दूसरी पारी में विवादों से जुड़ा नाम

सीबीआई की दूसरी पारी में विवादों से जुड़ा नाम

राकेश अस्थाना ने गुजरात से बाहर निकलकर सीबीआई में दो बार पारी संभाली है। 1995 में वो सीबीआई के एसपी नियुक्त हुए थे और उस कार्यकाल में चारा घोटाले की जांच ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया था। इस केस में आखिरकार बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को सजा भी हुई है। दूसरी बार उन्हें गुजरात कैडर की जिम्मेदारी से निकालकर सीबीआई का स्पेशल डायरेक्टर तब बनाया गया, जब केंद्र में बीजेपी की सरकार सत्ता में आई। लेकिन, 2018 में सीबीआई के तत्कालीन डायरेक्टर आलोक वर्मा के साथ इनकी खटपट की जानकारी पब्लिक डोमेन में भी आ गई और यहां तक कि इनके खिलाफ भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप भी लगाए गए। विवाद के बाद दोनों को सीबीआई से ट्रांसफर कर दिया गया। बाद में अदालत ने इन्हें भ्रष्टाचार के दोनों मामले में क्लीन चिट दे दिया। एक स्टर्लिंग बायोटेक से रिश्वत लेने का केस था। और दूसरा मीट एक्सपोर्टर मोइन कुरैशी से रिश्वत लेने का।

सीबीआई से निकलने के बाद भी बड़ी जिम्मेदारियां संभालीं

सीबीआई से निकलने के बाद भी बड़ी जिम्मेदारियां संभालीं

सीबीआई से निकलने के बाद भी राकेश अस्थाना ने कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। बीएसएफ के डीजी बनने से पहले वे सिविल एविएशन के सिक्योरिटी चीफ रह चुके हैं। वे नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के भी प्रमुख रहे हैं और उनके कार्यकाल के दौरान ही बॉलीवुड के लोगों के साथ ड्रग पेडलरों की कथित साठगांठ की इन्होंने तफ्तीश की थी। बीएसएफ डीजी बनने के बाद भी वह जिम्मेदारी इनके पास ही रही। इसके चलते उन्होंने सीमापार से होने वाले ड्रग के कारोबार के खिलाफ भी कार्रवाई की। पिछले दिनों जब सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति हो रही थी तो इन्हें एक प्रमुख दावेदार माना जा रहा था, लेकिन हाई प्रोफाइल अप्वाइंटमेंट पैनल से नजरअंदाज किए जाने की वजह से इन्हें वह जिम्मेदारी नहीं मिल सकी। विपक्ष खासकर कांग्रेस का आरोप रहा है कि अस्थाना को इतनी तरजीह इसलिए मिलती रही है, क्योंकि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चहेते अधिकारी हैं।

अस्थाना को दिल्ली पुलिस कमिश्नर बनाने के पीछे तीन कारण

अस्थाना को दिल्ली पुलिस कमिश्नर बनाने के पीछे तीन कारण

दिल्ली से पहले गुजरात के वडोदरा और सूरत में पुलिस कमिश्नर की जिम्मेदारी संभालने का उनका ट्रैक रिकॉर्ड बहुत ही अच्छा माना जाता है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक राकेश अस्थाना को ऐसे समय में दिल्ली पुलिस का चीफ बनाया गया है, जब किसान आंदोलन और कोरोना महामारी दोनों पर नजरें टिकी हुई हैं और भविष्य में ये दोनों कौन सा मोड़ अख्तियार करेंगे, इसके बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है। यही नहीं दिल्ली दंगों के मामले में भी इस समय पुलिसिया जांच अहम मोड़ पर है; और कुछ मामलों इसकी जांच पर अदालत से विपरित टिप्पणियां भी सुनने को मिली हैं।

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