रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- 15 जून को गलवान में भारतीय सेना ने चीन को दी थी बड़ी चोट
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) की स्थिति के बारे में जानकारी दी है। राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा है कि अप्रैल माह से ही पूर्वी लद्दाख में चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के जवान अड़े हुए हैं। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में 15 जून को हुई गलवान घाटी हिंसा का जिक्र भी किया। उन्होंने बताया कि आखिर क्यों गलवान में टकराव इतना बढ़ गया कि पीएलए और इंडियन आर्मी के जवानों के बीच हिंसा की नौबत आ गई।
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छह जून की मीटिंग के बाद हिंसा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि मई माह की शुरुआत में चीन ने गलवान घाटी भारतीय जवानों के सामान्य और पारंपरिक गश्त करने के तरीकों में रूकावट पैदा करनी शुरू की थी। इसकी वजह से टकराव की स्थिति है। रक्षा मंत्री के शब्दों में, 'एलएसी पर टकराव बढ़ता हुआ देख कर दोनों तरफ के सैन्य कमांडरों ने 6 जून 2020 को मीटिंग की। इस बात पर सहमति बनी कि आपसी कार्रवाई के तहत डिसइंगेजमेंट किया जाए। दोनो पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए थे कि एलएसी को माना जाएगा तथा कोई ऐसी कार्रवाई नहीं की जाएगी, जिससे यथास्थिति बदले।' इस दौरान रक्षा मंत्री ने चीन के साथ साल 1993 और 1996 में हुए समझौतों के बारे में भी बताया और कहा कि चीन की तरफ से इन समझौतों और प्रोटोकॉल्स को तोड़ा जा रहा है।

15 जून को चीन ने पैदा की हिंसा की स्थिति
उन्होंने आगे बताया, ' इस सहमति के उल्लंघन में चीन की तरफ से हिंसक फेसऑफ की स्थिति 15 जून को गलवान में तैयार की गई थी। इस पर हमारे बहादुर सिपाहियों ने अपनी जान का बलिदान दिया पर साथ ही चीनी पक्ष को भी भारी क्षति पहुचाई और अपनी सीमा की सुरक्षा में कामयाब रहे।' रक्षा मंत्री ने कहा कि टकराव की पूरी अवधि के दौरान बहादुर जवानों ने, जहां संयम की जरूरत थी वहां संयम रखा तथा जहाँ शौर्य की जरुरत थी, वहां शौर्य प्रदर्शित किया। राजनाथ सिंह ने 16 बिहार रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) कर्नल संतोष बाबू और उनके साथी जवानों के शौर्य का जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'आप जानते हैं कि कर्नल संतोष बाबू और उनके 19 वीर साथियों ने अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है।'

चीन की घुसपैठ की कोशिशें फेल
पहली बार रक्षा मंत्री ने 29 और 30 अगस्त की रात चीन की तरफ से हुई घुसपैठ की कोशिश पर भी आधिकारिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिस समय चीन के साथ राजनयिक और सैन्य स्तर पर वार्ता जारी थी तो चीन की तरफ से 29 और 30 अगस्त की रात को भड़काऊ सैनिक कार्रवाई की गई, जो पैंगोंग त्सो के दक्षिणी किनारे पर थी। रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन ने दक्षिणी हिस्से में यथास्थिति को बदलने की कोशिश की थी। लेकिन भारत की सेना ने एक बार फिर सही समय पर दृढ़ कार्रवाई की और चीन की कोशिशों को फेल कर दिया। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में माना है कि इस साल की स्थिति पूर्व में हुए टकरावों से बहुत अलग है। उन्होंने कहा, 'हमने चीन को राजनयिक और सैन्य चैनल्स के माध्यम से यह अवगत करा दिया, कि इस प्रकार की गतिविधियां, यथास्थिति को एकपक्षीय बदलने की कोशिश है। यह भी साफ कर दिया गया कि ये प्रयास हमें किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है।'

लद्दाख की कितनी जमीन पर चीन का कब्जा
रक्षा मंत्री ने कहा, 'जैसा कि यह सदन अवगत है चीन, भारत की करीब 38,000 स्क्वॉयर किलोमीटर की जमीन पर अनाधिकृत कब्जा लद्दाख में किए हुए है। इसके अलावा, सन् 1963 में एक सीमा समझौते के तहत पाकिस्तान ने पीओके की 5180 स्क्वॉयर किलोमीटर भारतीय जमीन अवैध रूप से चाईना को सौंप दी है।' उन्होंने कहा कि भारत और चीन, दोनों ने, औपचारिक तौर पर यह माना है कि सीमा का प्रश्न एक जटिल मुद्दा है जिसके समाधान के लिए संयम की आवश्यकता है औ इस मुद्दे को निष्पक्ष, तार्किक और आपसी मंजूरी के साथ शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए हल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच एलएसी को लेकर अलग-अलग नजरिया है।












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