Jagdeep Dhankhar: 23 को जयपुर की तैयारी, फिर 21 को इस्तीफा क्यों? राजनाथ के ऑफिस से पहले ही मिल चुके थे संकेत!
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) 23 जुलाई को जयपुर जाने वाले थे, फिर अचानक 21 को इस्तीफा क्यों दिया? हर कोई इस सवाल का जवाब जानना चाहता है। धनखड़ का कार्यक्रम तय था। सुरक्षा इंतजाम तक पूरे हो चुके थे। फिर ऐसा क्या हुआ कि देश के उपराष्ट्रपति ने उस वक्त इस्तीफा दे दिया जब संसद का मानसून सत्र शुरू हो चुका था और जयपुर जैसे अपने गृह राज्य का अहम दौरा भी तय था?
उपराष्ट्रपति 23 जुलाई को जयपुर के एक दिवसीय दौरे पर जाने वाले थे। रियल एस्टेट डेवलपर्स संघ (CREDAI) के कार्यक्रम में हिस्सा लेना था, जो उनके लिए निजी और पेशेवर दोनों स्तरों पर खास माना जा रहा था।

राजस्थान प्रशासन सुरक्षा समेत सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे चुका था। सोमवार शाम 4:30 बजे तक दौरे की जानकारी सार्वजनिक भी की जा चुकी थी। लेकिन चंद घंटों बाद उनका इस्तीफा सामने आ गया, जिसने सबको चौंका दिया।
धनखड़ के इस्तीफे पर विपक्ष के मन में भी कई सवाल
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने लिखा कि वे खुद 5 बजे तक धनखड़ के साथ थे, और 7:30 बजे फोन पर बातचीत भी हुई। निःसंदेह, जगदीप धनखड़ को अपने स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए लेकिन यह भी स्पष्ट है कि उनके इस बिल्कुल अप्रत्याशित इस्तीफे के पीछे जो दिखाई दे रहा है, उससे कहीं अधिक है। हालांकि, यह समय अटकलें लगाने का नहीं है। हम उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं और उनसे आग्रह करते हैं कि वे अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें। हम प्रधानमंत्री से भी अपेक्षा करते हैं कि वे जगदीप धनखड़ को अपना मन बदलने के लिए राज़ी करें।
शिवसेना (यूबीटी) के आनंद दुबे ने तो इसे "सरकार के भीतर कुछ गंभीर गड़बड़ी" से जोड़ा। कांग्रेस के इमरान मसूद ने सवाल उठाया कि 'एक घंटे में ऐसा क्या बदल गया कि उपराष्ट्रपति को इस्तीफा देना पड़ा?'
क्या सिर्फ स्वास्थ्य कारण है?
धनखड़ ने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में स्वास्थ्य कारणों और डॉक्टर की सलाह का हवाला दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री और संसद के सदस्यों का आभार जताते हुए अपने इस्तीफे में 'गौरवपूर्ण कार्यकाल' की बात भी कही। लेकिन जिस वक्त और जिस अंदाज में इस्तीफा दिया गया, उसने इसकी टाइमिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कहीं पॉलिटिकल रोटेशन की रणनीति तो नहीं?
धनखड़ के इस्तीफे के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार और राजनाथ सिंह जैसे नेताओं के नाम उपराष्ट्रपति पद के संभावित दावेदारों के रूप में सामने आने लगे। इससे अटकलें तेज हुईं कि NDA सरकार कोई बड़ी राजनीतिक चाल चल रही है, जिससे लोकसभा चुनाव 2024 से पहले सत्ता-संतुलन साधा जा सके।
संसदीय दबाव और न्यायिक मोर्चों से हटने की रणनीति?
धनखड़ संसद सत्र के पहले ही दिन राज्यसभा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने की तैयारी में थे, जिनमें न्यायपालिका से जुड़ी चर्चाएं भी शामिल थीं। जयराम रमेश जैसे विपक्षी नेताओं का दावा है कि इस्तीफे से कुछ घंटे पहले तक वे पूरी तरह एक्टिव थे, ऐसे में यह कदम अचानक नहीं, बल्कि रणनीतिक लगता है।
इस्तीफे से पहले राजनाथ सिंह के ऑफिस में थी हलचल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, उपराष्ट्रपति धनखड़ के इस्तीफे से ठीक पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के ऑफिस में अचानक हलचल तेज हुई, और भाजपा सांसदों से कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाए जाने की बात सामने आई, उसने पूरे घटनाक्रम को और भी संदिग्ध बना दिया है। धनखड़ ने राज्यसभा में विपक्ष के महाभियोग नोटिस को स्वीकार कर पूरी प्रक्रिया का जिक्र किया, लेकिन कहीं भी स्वास्थ्य या इस्तीफे का संकेत नहीं दिया। ऐसे में सवाल उठता है- क्या इस्तीफा महज स्वास्थ्य कारणों से हुआ या फिर पर्दे के पीछे कोई बड़ा सियासी घटनाक्रम चल रहा था?












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