तिरुमाला वैकुंठ द्वार को क्यों कहा जाता है धरती का स्वर्ग? जिसके दर्शन का टोकन लेने के लिए उमड़ी थी भीड़
Tirumala Vaikuntha dwara: आंध प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुपति मंदिर में बुधवार को बड़ी ही दुखद घटना हुई। बुधवार को वैकुंठ द्वार के दर्शन के लिए टोकन लेने के लिए लगी लाइन में भगदड़ मच जाने से छह भक्तों की मौत हो गई है और 150 से अधिक लोग घायल हो गए हैं।
ये सभी भक्त 10 जनवरी से 19 जनवरी तक वैकुंठ एकादशी के अवसर पर खुलने वाले "तिरुमाला वैकुंठ द्वार" के दर्शन का टोकन लेने के लिए लगभग 4 हजार लोग बुधवार शाम से लाइन में खड़े हो गए थे। जबकि गुरुवार 9 जनवरी की सुबह से वैकुंठ द्वार के दर्शन के लिए टोकन जारी किए जाने की व्यवस्था की गई थी। आइए जानते हैं क्यों तिरुमला वैकुंठ द्वार के दर्शन करना भक्त अपना सौभाग्य मानते हैं?

बता दें विश्व प्रसिद्ध तिरुपति मंदिर के सबसे भीतरी गर्भगृह के बगल में ये वैकुंठ द्वार है। ये पवित्र द्वार वर्ष में केवल एक बार वैकुंठ एकादशी के शुभ मुहूर्त पर खोला जाता है। वैकुंठ एकादशी एक अत्यंत शुभ दिन है जब भक्त मोक्ष के लिए भगवान वेंकटेश्वर का आशीर्वाद लेने के लिए यहां आते हैं।
वैकुंठ द्वार दर्शन का महत्व
वैकुंठ एकादशी के अवसर पर ही भक्त इस वैकुंठ द्वार के अंदर आ सकते हैं और भगवान का विशेष आर्शीवाद प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही भगवान वेंकटेश्वर की परिक्रमा कर सकते हैं। मान्यता है कि वैकुंठ द्वार के दर्शन करने का अवसर सौभाग्य से मिलता है। इसे स्वर्गीय आनंद का प्रवेश द्वार भी कहा माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह दुर्लभ अवसर भक्तों को जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति प्रदान करता है।
10 जनवरी को खुलेगा वैकुंठ द्वार
ये पर्व 10 दिनों तक बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है और इसके दर्शन करने के लिए हर बार लाखों भक्त यहां आते हैं।
इस बार 10 जनवरी को वैकुंठ एकादशी का पर्व है इसी दिन ये वैकुंठ द्वार दर्शन के लिए खाेले जाएंगे और 19 तारीख तक खुले रहेंगे। मान्यता है कि वैकुंठ द्वार के दर्शन करने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है।












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