Exit Polls को लेकर शिवसेना का चंद्रबाबू नायडू की मुहिम पर सबसे बड़ा तंज
नई दिल्ली- एग्जिट पोल आने के बाद भी टीडीपी (TDP) नेता और आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू (Chandrababu Naidu) नरेंद्र मोदी को कुर्सी से हटाने की अपनी मुहिम से पीछे नहीं हटे हैं। अलग-अलग विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकातों का उनका सिलसिला बदस्तूर जारी है। लेकिन, अब जब सभी एग्जिट पोल ने एनडीए (NDA) को पूर्ण बहुमत का अनुमान जताया है, तब बीजेपी (BJP) की सहयोगी शिवसेना (ShivSena) ने नायडू की इस मुहिम पर जोरदार निशाना साधा है।

खुद को इतना क्यों थका रहे हैं नायडू- शिवसेना
शिवसेना (ShivSena) ने अपने मुखपत्र 'सामना' (Saamana) के एडिटोरियल में चंद्रबाबू नायडू (Chandrababu Naidu) के विपक्ष के टॉप नेताओं से मुलाकात को लेकर तंज भरे अंदाज में लिखा है, "चंद्रबाबू नायडू बिना किसी वजह के खुद को इतना क्यों थकाए जा रहे हैं? उम्मीद है कि उनका मौजूदा उत्साह 23 तारीख को शांत हो जाएगा। हम इसके लिए उन्हें शुभकामनाएं देते हैं।"

उम्मीद का दामन नहीं छोड़ रहे बाबू
टीडीपी (TDP) चीफ ने रविवार को लखनऊ से लौटने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से दो बार और यूपीए (UPA) की चेयरपर्सन सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) से एक बार मुलाकात की थी। इससे पहले उन्होंने लखनऊ में एसपी (SP) अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और बीएसपी (BSP) सुप्रीमो मायावती (Mayawati) से भी मुलाकात की थी। वे एनसीपी (NCP) चीफ शरद पवार (Sharad Pawar) और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक एवं दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के अलावा सीपीआई नेता सुधाकर रेड्डी (Sudhakar Reddy) एवं लोकतांत्रिक जनता दल नेता शरद यादव (Sharad Yadav) से भी मुलाकात कर चुके हैं। खबरों के मुताबिक वो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी (Mamata Banerje) से भी सोमवार को मिलने वाले हैं। नायडू इस प्रयास में तब जुटे हुए हैं, जब एग्जिट पोल के अनुमानों ने विपक्षी दलों में एक हाहाकार की स्थिति पैदा कर दी है।

एग्जिट पोल से लगा नायडू की मुहिम को झटका
एनडीटीवी की खबर के मुताबिक बीएसपी (BSP) सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने कहा है कि वो राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी से मिलने के लिए दिल्ली नहीं जाएंगी। जाहिर है कि उनके इस बदले रवैये से लगता है कि एग्जिट पोल के कारण नायडू की मुहिम पर असर पड़ चुका है। लेकिन, उन्होंने खुद अब तक हार नहीं मानी है। अब देखने वाली बात है कि उनका ये अभियान 23 मई तक भी यूं ही जारी रहता है या उसके बाद उन्हें इसमें कुछ कामयाबी भी मिल पाती है?












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