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Cyrus Mistry Ratan Tata Bond: रतन टाटा को क्यों लगा था साइरस मिस्त्री का DNA अलग? किताब ने खोले बंद किस्से

Cyrus Mistry Ratan Tata Relation: टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा का 86 साल की उम्र में हाल ही (9 अक्टूबर) में निधन हो गया। उन्होंने टाटा समूह को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। उनके निधन के बाद रतन टाटा के उत्तराधिकारी को लेकर खबरों का बाजार काफी गर्म नजर आया।

इस बीच, रतन टाटा और साइरस मिस्त्री (4 सितंबर 2022 को कार एक्सीडेंट में निधन) के संबंधों को लेकर काफी सुर्खियां छाई रहीं। इसी में से एक रही संबंधों में दरार की शुरुआत और मतभेदों के कारण। हालांकि, नई किताब "रतन टाटा: ए लाइफ" में कई अहम खुलासे किए गए हैं।

Cyrus Mistry Ratan Tata Bonding

लेखक थॉमस मैथ्यू द्वारा लिखित और हार्पर कॉलिन्स द्वारा प्रकाशित इस किताब में बताया गया है कि टाटा ने 2011 में मिस्त्री की टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के बाद से ही उनकी कार्यशैली और दृष्टिकोण को लेकर संदेह व्यक्त करना शुरू कर दिया था।

मिस्त्री को दो प्रमुख शर्तों पर उत्तराधिकारी के रूप में चुना
टाटा ने साइरस मिस्त्री को दो प्रमुख शर्तों पर उत्तराधिकारी के रूप में चुना था। इसमें पहला था- मिस्त्री को 'शापूरजी पालोनजी समूह' से कानूनी रूप से संबंध तोड़ने होंगे। वहीं, दूसरी शर्त थी कि मिस्त्री को 'टाटा समूह के संचालन में एक साल तक मार्गदर्शन' प्राप्त करना होगा। हालांकि, रतन टाटा ने मिस्त्री के चयन में उनका समर्थन किया था, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें यह महसूस होने लगा कि मिस्त्री की कार्यशैली टाटा समूह के मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

मिस्त्री के दृष्टिकोण से टाटा की असहमति
टाटा ने देखा कि मिस्त्री समूह के कुछ क्षेत्रों में हस्तक्षेप कर रहे थे, जो टाटा के आदर्शों के अनुरूप नहीं था। मिस्त्री ने टाटा के सुझावों को न मानते हुए मुख्य व्यवसाय क्षेत्रों से हटकर नए जोखिम भरे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना शुरू कर दिया। इनमें बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्र भी शामिल थे, जिनसे टाटा को नैतिक मुद्दों का खतरा दिखता था और वे चिंतित थे कि इससे टाटा की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है।

टाटा ट्रस्ट के साथ तालमेल में कमी
जब मिस्त्री ने टाटा ट्रस्ट से सलाह लेना बंद कर दिया, तो रतन टाटा के विश्वास में और कमी आई। यह मुद्दा और गंभीर हो गया जब टाटा पावर ने वेलस्पन की वैकल्पिक ऊर्जा परिसंपत्तियों को $1.45 बिलियन में अधिग्रहित किया, जो बोर्ड की मंजूरी के बिना किया गया था। टाटा ने इस कदम को 'वास्तविक विवाद' का कारण बताया।

'मुझे लगा था मिस्त्री का DNA कुछ अलग होगा'
किताब में टाटा ने इस बात को स्वीकार किया कि उन्हें मिस्त्री की ब्रिटिश शिक्षा और प्रभावशाली पृष्ठभूमि ने प्रभावित किया था। उन्होंने कहा, "साइरस मिस्त्री की ब्रिटिश शिक्षा ने मुझे अंधा कर दिया था। मैंने सोचा था कि इतनी प्रभावशाली शिक्षा वाले व्यक्ति का डीएनए अलग होगा।" उन्होंने यह भी माना कि चयन समिति के निर्णय में वे बहुत आदर्शवादी थे और समय सीमा के कारण जल्दबाजी में निर्णय लिया गया।

मिस्त्री का हटाया जाना और टाटा का दृष्टिकोण
2016 में, रतन टाटा ने मिस्त्री को हटाने का निर्णय लिया, हालांकि वे जानते थे कि इससे उनकी आलोचना होगी। उन्होंने कहा, "मेरे लिए भी, उन्हें इस तरह से हटाना हमारे काम करने का तरीका नहीं था।" इसके बावजूद, उन्होंने माना कि यदि इसे सर्जिकल स्ट्राइक की तरह नहीं किया जाता तो मिस्त्री कानूनी कार्यवाही कर सकते थे।

टाटा का मानना था कि जब मिस्त्री ने बोर्ड का विश्वास खो दिया, तब उन्हें शालीनता से पद छोड़ देना चाहिए था। रतन टाटा के करीबी सहयोगी नितिन नोहरिया ने भी कहा कि इस निर्णय का सबसे बड़ा नुकसान टाटा को ही उठाना पड़ा।

यह किताब रतन टाटा और साइरस मिस्त्री के संबंधों में आई दरार और उनके नेतृत्व को लेकर टाटा के संदेह को विस्तार से समझाती है। टाटा ने मिस्त्री की नियुक्ति में बहुत आदर्शवादी नजरिया अपनाया, लेकिन मिस्त्री के विचार और टाटा समूह के सिद्धांतों में अंतर ने अंततः इस टकराव को जन्म दिया।

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