अलग पार्टी बनाने के पीछे कुंडा के विधायक राजा भैया का ये है दांव, क्या बदलेंगे समीकरण

नई दिल्ली। 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी गुणा-गणित का दौर तेज होने लगा है। जहां प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतिक तैयारी तेज कर दी है, वहीं दूसरी ओर कई नई पार्टियां भी बनाने की प्रक्रिया तेज हो चुकी है। इस कड़ी में प्रतापगढ़ के कुंडा से निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का नाम भी शामिल हो गया है। ऐसी खबरें हैं कि राजा भैया 30 नवंबर को अपनी नई पार्टी का ऐलान कर सकते हैं। ऐसा माना जा रहा है कि नई पार्टी के जरिए राजा भैया कहीं न कहीं अपना कद बढ़ाने की फिराक में हैं। यही वजह है कि वो नई राजनीतिक पार्टी बनाकर लोकसभा चुनाव में उतर सकते हैं।

25 साल के राजनीतिक करियर के बाद बनाएंगे अपनी पार्टी

25 साल के राजनीतिक करियर के बाद बनाएंगे अपनी पार्टी

25 साल के राजनीतिक करियर के बाद पहली बार 'कुंडा के राजा' रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया दलीय राजनीति में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। कभी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) तो कभी समाजवादी पार्टी (सपा) के करीबी रहे राजा भैया, हमेशा से निर्दलीय ही चुनाव लड़ा। वो यूपी में बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों की ही सरकार में मंत्री रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कभी किसी पार्टी में शामिल होने की योजना नहीं बनाई। हालांकि अब बदले हुए सियासी हालात में उन्होंने भी अपनी पार्टी बनाने की रणनीति अपनाई है।

पार्टी बनाने के पीछे ये है मुख्य वजह

पार्टी बनाने के पीछे ये है मुख्य वजह

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के नई पार्टी बनाने के पीछे मुख्य वजह ये है कि कुछ समय पहले ही संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव में उम्मीद की जा रही थी राजा भैया अपने सहयोगी विधायकों के साथ एसपी-बीएसपी के उम्मीदवार का समर्थन करेंगे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और बीजेपी समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में वोट किया। उनके इस कदम की वजह से अखिलेश यादव से उनकी तल्खी बढ़ गई। वहीं जिस योजना के तहत उन्होंने बीजेपी का समर्थन किया, उसमें भी उन्हें खास तरजीह नहीं मिली। ऐसा हालात में अब उन्होंने दलीय राजनीति में उतरने और अपनी पार्टी बनाने का मन बना लिया।

लोकसभा की सीटों पर है राजा भैया की निगाहें

लोकसभा की सीटों पर है राजा भैया की निगाहें

राजनीति की सिल्वर जुबली पूरी कर रहे राजा भैया की नजर लोकसभा सीटों पर है। उनकी रणनीति पर गौर करें तो वो नई पार्टी बनाकर यूपी की कुछ लोकसभा सीटों को साधने की कवायद में जुट गए हैं। दरअसल अभी तक उनके समाजवादी पार्टी से अच्छे संबंध थे, उस समय उनके करीबियों को उन्होंने कई बार सपा से टिकट दिलाए थे। हालांकि हाल के राज्यसभा चुनाव के बाद से सपा मुखिया अखिलेश यादव उनसे नाराज हैं, ऐसे में उन्हें अपने समर्थकों के लिए सपा या फिर किसी अन्य राजनीतिक दल से टिकट मिलने की संभावना कम नजर आ रही है। इन्ही हालात को देखते हुए उन्होंने नई पार्टी बनाने का फैसला लिया। माना जा रहा है कि उनकी नजर प्रतापगढ़ और कौशांबी लोकसभा सीट पर है, जहां उन्हें अपने उम्मीदवार की जीत की संभावनाएं दिख रही हैं।

सपा-बसपा या फिर भाजपा, राजा भैया की पार्टी से किसे होगा नुकसान

सपा-बसपा या फिर भाजपा, राजा भैया की पार्टी से किसे होगा नुकसान

राजा भैया के सियासी करियर पर गौर करें तो वो राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते रहे हैं। यही वजह है कि उन्होंने सपा और बीजेपी से अपने संबंध बिगड़ने नहीं दिए। हालांकि राज्यसभा चुनाव के दौरान अखिलेश से उनकी नाराजगी के बाद अब वो बीजेपी से अपने संबंध शायद ही बिगड़ना चाहेंगे। यही वजह है कि उन्होंने नई पार्टी के जरिए सपा-बसपा से नाराज लोगों को लामबंद कर सकते हैं। अगर सबकुछ ठीक रहा तो बाद में बीजेपी के साथ कोई सियासी समीकरण भी बना सकते हैं। फिलहाल देखना होगा कि उनका दांव कितना कामयाब होता है।

30 नवंबर को करेंगे राजनीतिक पार्टी का ऐलान

30 नवंबर को करेंगे राजनीतिक पार्टी का ऐलान

राजा भैया 30 नवंबर को राजनीतिक दल का ऐलान कर सकते हैं। दरअसल 30 नवंबर को उनके राजनीति 25 साल पूरे हो रहे हैं, सियासी पारी की सिल्वर जुबली के मौके पर वो नई पार्टी का ऐलान करेंगे। इस बीच खबर है कि राजा भैया के झंडे का रंग पीले और हरे रंग का हो सकता है। उन्होंने चुनाव आयोग में अपनी पार्टी का नाम जनसत्ता दल रखने और पार्टी के झंडे के रंग को लेकर आवेदन कर दिया है। हालांकि अभी चुनाव आयोग ने पार्टी के नाम और पार्टी के झंडे को मंजूरी नहीं दी है। देखना होगा कि आखिर उनकी पार्टी का क्या नाम होता है और 2019 के चुनाव में इसका प्रदर्शन कैसा रहेगा?

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