पीएम मोदी के खिलाफ राहुल के मुकाबले चंद्रबाबू नायडू प्रबल दावेदार क्यों है?
बेंगलुरु। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के साथ बैठक काफी अहम रही थी। इसे कई लोग नायडू द्वारा नरेंद्र मोदी के खिलाफ गठबंधन तैयार करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए इस मुलाकात के कई मायने हो सकते हैं। ममता बनर्जी अक्सर बीजेपी और पीएम मोदी के खिलाफ खुलकर बोलती रही हैं।

नायडू बीजेपी के खिलाफ मोर्चे की तैयारी कर रहे
नायडू कोलकाता में 19 जनवरी को होने वाली ममता बनर्जी की रैली में भी शामिल होंगे। चंद्रबाबू नायडू एचडी देवगौड़ा और कर्नाटक के सीएम कुमारस्वामी से भी मुलाकात कर चुके हैं। हालांकि इस प्रकार की कोशिशें पहले भी हुई हैं जब स्थानीय दलों ने गठबंधन की पहल की है लेकिन उनका कदम खास प्रभावित करती दिखाई नहीं दिया। लेकिन नायडू के नेतृत्व करने से इस नए गठबंधन को लेकर उम्मीदें बढ़ने लगी हैं।

अन्य की तुलना में नायडू की प्रभावी छवि
राहुल या अन्य नेताओं की तुलना में नायडू पीएम मोदी के खिलाफ मोर्चे के लिए अधिक प्रभावशाली नेता के रूप में उभरकर सामने आते दिखाई दे रहे हैं। उसकी पहली वजह उनकी छवि है। 68 साल के नायडू राजनीतिक दृष्टि से अपनी बात ममता, मायावती या फिर अखिलेश यादव की तुलना में बेहतर ढंग से रख सकते हैं। दक्षिण में भी उनका अन्य नेताओं की तुलना में अधिक प्रभाव है जहां बीजेपी बहुत ही कमजोर रही है।

पीएम मोदी के खिलाफ नेतृत्व की रेस में नायडू दिख रहे आगे
दूसरा पहलू ये है कि नायडू मायावती और अखिलेश की तरह जाति वाले मुद्दे से ऊपर के नेता के रूप में देखे जाते हैं। अपनी प्रशासनिक सूझबूझ के कारण भी वे अन्य नेताओं पर भारी हैं। वहीं, दूसरे दल गठबंधन की कवायद में कांग्रेस को वरिष्ठ हिस्सेदार मानते रहे हैं। लेकिन नायडू के आने से इसमें बदलाव आ सकता है। राहुल गांधी को लेकर अन्य दलों में हिचकिचाहट के कारण नायडू को इसका भी फायदा मिल सकता है। नायडू दक्षिण के राज्यों में भी इन नेताओं से अधिक प्रभावी हैं।












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