संविधान से 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द को हटाने का सुझाव देने वाले हेगड़े को BJP ने क्यों नहीं निकाला?

नई दिल्ली। गुजरात में दूसरे चरण के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी के सीनियर लीडर मंणिशकर द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी को 'नीच' कहने पर कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। मणिशंकर द्वारा की गई इस अशोभनीय टिप्पणी के चलते कांग्रेस को चुनावों में बड़ा झटका लगा था। देश की सबसे पुरानी पार्टी ने अपनी नैतिकता दिखाते हुए अपने सबसे पुराने वफादार को पार्टी से निलंबित कर दिया।

 'नीच' शब्द को भाजपा ने गुजरात में चुनावी मुद्दा बना लिया

'नीच' शब्द को भाजपा ने गुजरात में चुनावी मुद्दा बना लिया

पीएम मोदी के लिए इस्तेमाल किए 'नीच' शब्द को भाजपा ने गुजरात में चुनावी मुद्दा बना लिया था। पार्टी के सीनियर कैबिनेट मंत्री अनंत कुमार हेगडे ने एक जनसभा में कहा है कि भाजपा संविधान से 'सेकुलर' शब्द को हटाने की योजना बना रही है। इससे भी खराब यह है कि बीजेपी ने इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है कि पार्टी का ऐसा करने का कोई इरादा नहीं है, जैसे कि हेगड़े ने जनसभा में कहा है। यह अल्पसंख्यक समुदायों के लिए बेहद ही डराने वाला है। वह भी ऐसे में जब कई हिन्दूवादी संगठन देश में उन्हें डरा धमका रहे हैं।

भाजपा ने अनंत कुमार के बयान से बनाई दूरी

भाजपा ने अनंत कुमार के बयान से बनाई दूरी

इस पूरे विवाद में सुरक्षित रास्ता चुना है। मंगलवार को भाजपा ने खुद को इस विवाद से दूर रखने की कोशिश की और कहा कि इन मुद्दे से भाजपा का कोई लेना देना नहीं है। भाजपा कर्नाटक के प्रवक्ता ने कहा कि, हेगड़े ने क्या कहा है, इसमें पार्टी (बीजेपी) को शामिल नहीं करें। यह हमारे लिए मुद्दा नहीं है। आपको बता दें कि कोप्पल जिले के कुकानूर में ब्राह्मण युवा परिषद के कार्यक्रम में अनंत कुमार हेगड़े ने कहा था कि 'जो लोग खुद को धर्मनरपेक्ष करते हैं, वे नहीं जानते कि उनका खून क्या है। हां, संविधान यह अधिकार देता है कि हम खुद को धर्मनिरपेक्ष कहें, लेकिन संविधान में कई बार संशोधन हो चुके हैं, हम भी उसमें संशोधन करेंगे, हम सत्ता में इसलिए ही आए हैं।'

 ये सेक्युलर कौन लोग हैं? इनका कोई मां-बाप नहीं

ये सेक्युलर कौन लोग हैं? इनका कोई मां-बाप नहीं

हेगड़े ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील होने का दावा वे लोग करते हैं, जिन्हें अपने मां-बाप के खून का पता नहीं होता। लोगों को अपनी पहचान सेक्युलर के बजाय धर्म और जाति के आधार पर बतानी चाहिए। अगर आप कहते हैं कि मैं एक मुस्लिम, ईसाई, लिंगायत, ब्राह्मण या हिंदू हूं तो ऐसे में हम अपने धर्म और जाति से जुड़े होने पर गर्व महसूस करते हैं। लेकिन ये सेक्युलर कौन लोग हैं? इनका कोई मां-बाप नहीं।

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