क्यों फिर से वुहान लौटना चाहती है भारत की पहली कोरोना मरीज ? जानिए
त्रिशूर, 30 जनवरी: दो साल पहले आज की ही तारीख में चीन के वुहान शहर से भारत की पहली कोरोना मरीज केरल पहुंची थी। त्रिशूर की रहने वाली युवा मेडिकल स्टूडेंट चीन के उसी वुहान शहर में मेडिकल की पढ़ाई कर रही थी, जब वहां कोरोना विस्फोट हुआ था और जिसकी गिरफ्त से आज भी दुनिया नहीं उबर पाई है। वह भारत की पहली कोविड मरीज है, जो वुहान में ही कोरोना संक्रमित हो गई थी। इन दो वर्षों में काफी कुछ बदला है। दुनिया कोरोना से लड़ना सीख रही है। भारत में बनी दो-दो प्रभावी वैक्सीन लोगों की जान बचाने में सफल हो रहे हैं। अगर कुछ नहीं बदला है तो वो ये है कि कोरोना अपना रंग और रूप बदलना नहीं बंद कर रहा है। इस बीमारी के वुहान के लैब से निकलने की थ्योरी का आजतक सही जवाब नहीं मिल पाया है। लेकिन, वह मेडिकल छात्रा एक बार फिर से वुहान लौटना चाहती है। उसके पिता सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि वह उसके रास्ते में आने वाली अड़चनों को दूर करे।

30 जनवरी, 2020 को वुहान से लौटी थी
वुहान में मेडिकल की पढ़ाई करने वाली युवा छात्रा अब दो वर्ष पहले गुजरे खौफनाक मंजर को याद भी नहीं करना चाहती। वह जिंदगी में आगे बढ़ चुकी है। वह ऐसे समय में किसी तरह से वुहान से निकलकर अपने वतन लौटी थी, जब एक वायरस मानवता को मिटाने के 'मिशन' पर चीन के उस शहर से निकल पड़ा था। वह बहुत ही अनिश्चितता के दिन थे। केरल में अपने घर पहुंचने पर जब वह लड़की कोविड पॉजिटिव पाई गई, उससे एक हफ्ते पहले ही वह वुहान से लौटी थी। उसके घर वाले पहले इसी बात से संतोष में थे कि उनकी बेटी किसी तरह वुहान में सख्त पाबंदियां लगाए जाने से पहले ही किसी तरह से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर करने में कामयाब हो चुकी थी। उसके बाद शी जिनपिंग की सरकार ने वुहान को किस तरह से तालों में कैद किया, वह किसी से छिपा नहीं है।

वापस वुहान लौटना चाहती है मेडिकल स्टूडेंट
पिछले दो वर्षों से वह अपने मेडिकल कॉलेज से हजारों किलोमीटर दूर अपने घर पर ही रहकर पढ़ाई कर रही है। वह नहीं चाहती है कि कोई उसे उन बीते दिनों की याद भी दिलाए। पिछले साल दिसंबर में उसने ऑनलाइन ही एमबीबीएस का कोर्स पूरा कर लिया और परीक्षाएं भी पास कर चुकी है। चीन भी आजतक कोरोना वायरस से मुक्त नहीं हुआ है। वहां एक भी मामले सामने आने के बाद जीरो इंफेक्शन नीति के तहत सख्त लॉकडाउन लगाए जाते हैं। यह सिलसिला थमा नहीं है। ऊपर से नए-नए वायरस का डर भी वुहान से ही दिखाया जा रहा है। लेकिन, फिर भी वह वापस वुहान लौटना चाहती है। यह उसकी मजबूरी है।

क्यों वुहान लौटना चाहती है कोरोना की पहली मरीज ?
उसके पिता ने कहा है कि 'हमें लगता है कि कोविड अब मैनेजेबल हो चुका है। लेकिन अनिश्चित क्या है, मेरी बेटी का करियर।' उसे अपने मेडिकल कॉलेज में वापस जाना ही होगा। क्योंकि, चीन के नियमों के मुताबिक एमबीबीएस स्टूडेंट के लिए 52 हफ्तों का इंटर्नशिप वहीं पर करना अनिवार्य है, जो कि ग्रैजुएशन के बाद अस्पतालों में अंतिम वर्ष में होने वाले हाउस सर्जन के बराबर है। डिग्री लेने के लिए यह जरूरी है।
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केंद्र सरकार से की चीन से बात करने की अपील
देश की पहली कोविड मरीज के पिता ने सरकार से गुजारिश की है कि इस संबंध में चीन के सामने मुद्दा उठाए। उन्होंने कहा है, 'हम केंद्र से वहां पढ़ने वाले भारतीय मेडिकल स्टूडेंट के लिए चीनी अधिकारियों के सामने मसला उठाने का अनुरोध करते हैं।' उन्होंने कहा कि वह अब पिछली बातों के बारे में बात भी नहीं करना चाहती। 'हमें सिर्फ उसके वर्तमान और भविष्य की चिंता है।' (तस्वीरें- फाइल)












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