Gujarat assembly elections 2017: क्यों लोकसभा चुनाव से भी महत्वपूर्ण हो गया है इस बार का गुजरात विधानसभा का चुनाव

नई दिल्ली। Gujarat assembly elections 2017 के लिए चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान कर दिया है। 9 और 14 दिसंबर को गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा, 18 दिसंबर को चुनाव नतीजे आएंगे। गुजरात में दो दशक से अधिक समय तक भारतीय जनता पार्टी का शासन रहा, जिसमें से एक दशक से अधिक समय तक नरेंद्र मोदी यहां के मुख्यमंत्री रहे। लेकिन इतने लंबे समय के बाद इस बार भारतीय जनता पार्टी के लिए विधानसभा चुनाव की राह इतनी आसान नहीं लग रही है। इस बार जिस तरह से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी चुनावी मैदान में भाजपा को चुनौती दे रही हैं, वह ना सिर्फ भाजपा के लिए बल्कि खुद पीएम नरेंद्र मोदी के लिए चुनौती बने हुए हैं। इससे पहले 2012 में जिस तरह से भाजपा ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एकतरफा चुनाव जीता था उसने साफ कर दिया था कि अभी भी नरेंद्र मोदी यहां के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। इसी लोकप्रियता के दम पर नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव मोदी लहर के दम पर कांग्रेस को 44 सीटों पर समेट कर रख दिया था।

गुजरात विधानसभा चुनाव से जुड़ी है मोदी की साख

गुजरात विधानसभा चुनाव से जुड़ी है मोदी की साख

केंद्र में जिस तरह से तीन वर्ष से अधिक का समय मोदी सरकार क बीत चुका है और तमाम मुद्दों पर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर है, उसे देखते हुए इस बार गुजरात विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए मुश्किल सफर बन गया है। गुजरात को पीएम के गढ़ माना जाता है और तमाम चुनावी रैलियो सहति अलग-अलग कार्यक्रमों और भाषणों में पीएम मोदी गुजरात को बतौर मॉडल स्टेट पेश भी करते हैं। लिहाजा इस बार अगर गुजरात के नतीजे अपेक्षा के अनुकूल नहीं आते हैं तो यह पीएम मोदी की साख और विकास के किए गए कार्यों पर सीधा सवाल खड़ा करेगा। भाजपा और खुद पीएम मोदी इस बात को बखूबी समझते हैं, लिहाजा किसी भी कीमत पर पार्टी गुजरात में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है।

बिना मोदी के इतने साल बाद चुनाव

बिना मोदी के इतने साल बाद चुनाव

वर्ष 2002 में जब नरेंद्र मोदी को गुजरात की कमान सौंपी गई थी तो लगातार उनकी अगुवाई में पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलता रहा है, लेकिन ऐसा पहली बार है जब 2002 के बाद गुजरात में विधान सभा चुनाव बिना पीएम मोदी की अगुवाई के हो रहा है। 2014 में केंद्र की सत्ता संभालने के बाद प्रदेश की कमान आनंदी बेन को सौंपी गई थी। लेकिन इस दौरान पटेल समुदाय के बड़े नेता के तौर पर हार्दिक पटेल का उदय हुआ, जिसके चलते यहां की सरकार को काफी चुनौती का सामना करना पड़ा। आलम यह हुआ कि आनंदी बेन को अपनी सीट तक गंवानी पड़ी और विजय रुपानी को प्रदेश की कमान सौंपी गई। लेकिन हाल के दिनों में रूपानी के शासन काल को भी काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। लिहाजा इस बार बिना नरेंद्र मोदी के चुनाव गुजरात में भाजपा के लिए मुश्किल चुनौती साबित होने जा रहा है।

हारे तो मोदी का विकास चुनाव हारेगा

हारे तो मोदी का विकास चुनाव हारेगा

गुजरात विधानसभा चुनाव इसलिए भी भाजपा और पीएम मोदी के लिए चुनौती बन गई है क्योंकि यह पीएम मोदी के तमाम विकास के दावों का भी लिटमस टेस्ट होगा। ऐसे में पीएम मोदी को अपने ही गढ़ में विकास का यह लिटमस टेस्ट को हर हाल में पास करना होगा। प्रधानमंत्री विकास के मंत्र पर ही देश की सत्ता में आए थे और उन्होंने दावा किया था कि वह देश को एक बार फिर से भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाकर विकास के रास्ते पर लेकर जाएंगे। विकास से जुड़ी तमाम योजनाओं को भी केंद्र सरकार ने शुरू किया, लेकिन जमीन पर इन योजनाओं का कितना असर दिखा है, इसपर तमाम विपक्षी दल लगातार सवाल खड़ा करते रहे हैं। विपक्षी दलों ने लगातार मोदी सरकार के विकास के दावों को चुनौती देते हुए इन दावों को हवाई हवाई करार देते हुए कहा कि यह योजनाएं सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गई है। ऐसे में गुजरात एक ऐसा राज्य साबित होगा यह इस बात की पुष्टि करेगा कि विकास के दावों में दम है या फिर यह सिर्फ हवा हवाई हैं।

बीजेपी को वोट दिया तो भी मोदी सीएम नहीं बनेंगे-जनता जीएसटी, नोटबंदी से नाराज

बीजेपी को वोट दिया तो भी मोदी सीएम नहीं बनेंगे-जनता जीएसटी, नोटबंदी से नाराज

लोग इस बात से भी भली भांती वाकिफ हैं कि अगर उन्होंने भाजपा को वोट दिया तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि नरेंद्र मोदी प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे। भाजपा की जीत का मतलब साफ है कि जैसे पहले से प्रदेश में सरकार चल रही है वैसे ही चलेगी। हाल के दिनों में जिस तरह से जीएसटी को लागू किया गया उसको लेकर व्यापारी वर्ग में काफी रोष है।
इस रोष का परिणाम केंद्र सरकार को भी झेलना पड़ा और कई बदलाव करने के लिए सरकार को मजबूर होना पड़ा था। जीएसटी से पहले जिस तरह से नोटबंदी को लागू किया गया था उसने भी ना सिर्फ व्यापारियों, किसानों बल्कि आम आदमी की कमर तोड़कर रख दी थी, लिहाजा इन सभी को ध्यान में रखने हुए इस बार लोग मतदान केंद्र में अपना वोट देने पहुंचेंगे। जिससे पार पाना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा।

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