क्यों हिंदू-मुस्लिम के चक्कर में खुद बीजेपी के जाल में उलझ जाती है कांग्रेस ?
नई दिल्ली, 12 नवंबर: कांग्रेस के लिए अगले साल फरवरी-मार्च में होने वाले पांच राज्यों के सारे विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण हैं। उत्तर प्रदेश में वह भले ही कमजोर है, लेकिन वहां भी राहुल गांधी के बाद गांधी परिवार ने प्रियंका गांधी को चुनावी दांव पर लगा दिया है। हालांकि, पिछले लोकसभा चुनाव से ही प्रियंका वहां सक्रिय हैं और तब भी कुछ कर नहीं पाई थीं, लेकिन अगर इस बार भी कांग्रेस का वहां कुछ नहीं हुआ तो उसके भविष्य का अंदाजा लगाना मुश्किल है। पंजाब में पार्टी सत्ता में है, लेकिन वहां भी ऐसे पिच पर बैटिंग कर रही है, जिससे उसकी स्थिति और भी कमजोर हो सकती है। फिर भी कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मुख्य प्रतिद्वंद्वी बीजेपी को फ्रंट फुट पर खेलने के लिए खुद ही आसान सा गेंद उछालकर देने को तैयार बैठी रहती है। देश की राजनीति में हिंदू-मुस्लिम ऐसा मुद्दा है, जिसमें आज की तारीख में कांग्रेस के लिए भाजपा से मुकाबला करना लगभग नामुमकिन है। फिर पार्टी सलमान खुर्शीद जैसे नेताओं को जानबूझकर मौका देती है या जी-23 के नेताओं की चिंता वाजिब है कि अंदर से उसकी हालत 'बेपेंदी के लोटे' की तरह हो चुकी है!

पंजाब में कांग्रेस के अंदर ही उठी 'हिंदू-विरोधी' होने की आवाज
सबसे पहले पंजाब में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर गौर फरमाइए। वहां भी पार्टी के अंदर से कांग्रेस नेतृत्व पर हिंदुओं के खिलाफ पक्षपात के आरोप लगने शुरू हो गए हैं। अमरिंदर सिंह नई पार्टी बना चुके हैं और भाजपा उनके परोक्ष समर्थन से शहरी वोटरों को लपकने की उम्मीद लगाई बैठी है। ऐसे में पार्टी के एक बड़े हिंदू नेता का भेदभाव का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा देना मायने रखता है। पंकज किरपाल प्रदेश में पार्टी के लीगल सेल के उपाध्यक्ष थे और वे श्री गुरु रविदास मेमोरियल फाउंडेशन के भी सदस्य हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी पद छोड़ दिया है। उन्होंने 19 तारीख को सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के आवास के बाहर 'सोए हुए हिंदू समुदाय को जगाने' के लिए आत्मदाह तक की धमकी दे डाली है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पंजाब कांग्रेस का एक भी नेता हिंदुओं के खिलाफ जारी 'अत्याचार' के खिलाफ नहीं बोला है।
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हिंदुत्व की आईएसआईएस और बोको हरम से तुलना
गुजरात चुनाव हो या उत्तर प्रदेश चुनाव। ऐसे मौकों पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के कर्मकांडी हिंदू दिखने वाली तस्वीरों को लेकर भाजपा उनपर चुनावी हिंदू होने का आरोप लगाकर घेरने में लगी रहती है। ऐसे में महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों से पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता सलमान खुर्शीद की एक किताब ने उनकी मंशा पर सवाल उठा दिया है। उन्होंने अयोध्या पर लिखी अपनी एक किताब में कहा है कि 'संतों और मुनियों के लिए जाना जाने वाला सनातन धर्म और मूल हिंदू धर्म को एक कट्टर हिंदुत्व की विचारधारा से एक तरफ धकेल दिया गया है, इसका राजनीतिक संस्करण हर तरह से हाल के वर्षों में सक्रिय जिहादी मुस्लिम संगठनों जैसे कि आईएसआईएस और बोको हरम के जैसा है।' सोचने की बात है कि इस किताब के विमोचन के मौके पर दिग्गज कांग्रेसी पी चिदंबरम और दिग्विजय सिंह जैसे लोग मौजूद थे। ये वही नेता हैं जिन्होंने अपने बयानों से अक्सर बीजेपी को ही मजबूती का आधार दिया है।

खुर्शीद के 'फसादी नजरिए' का आजाद ने किया एनकाउंटर
सलमान खुर्शीद यूपीए सरकार के वही मंत्री हैं, जिनके बाटला हाउस में हुए आंकवादियों के एनकाउंटर को भी मुस्लिम चश्मे से देखने की वजह से आज भी बीजेपी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को हिंदू-विरोधी साबित करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ती। शायद यही वजह है कि पार्टी के जी-23 के सबसे बड़े चेहरों में से एक गुलाम नबी आजाद ने उनके नजरिए को ना सिर्फ गलत कहा है, बल्कि झूठा करार दे दिया है। आजाद ने खुर्शीद के नजरिए पर कहा है, 'हम राजनीतिक विचारधारा के रूप में भले ही हिंदुत्व से सहमत ना हों, लेकिन आईएसआईए और जिहादी इस्लाम से इसकी तुलना तथ्यात्मक रूप से गलत और अतिशयोक्ति है।'
कांग्रेस में खुर्शीद कम थे, जो अल्वी के बोल बिगड़ गए!
सलमान खुर्शीद के कलम से निकला हुआ 'सियासी जहर' क्या कारनामा करेगा यह तो बाद में पता चलेगा, लेकिन उससे पहले कांग्रेस के एक और मुस्लिम नेता राशिद अल्वी ने हिंदू-मुस्लिम मसले में आग में घी डालने का काम किया है। अल्वी खुर्शीद की तरह ही यूपी से ताल्लुक रखते हैं और उन्होंने जय श्रीराम के नारे पर आपत्तिजन बयान देकर भाजपा के हाथ में बहुत बड़ा चुनावी हथियार थमा दिया है। बीजेपी के आईटी सेल के इंचार्ज अमित मालवीय ने उनके बयान वाला वीडियो शेयर कर लिखा है, "सलमान खुर्शीद के बाद अब कांग्रेस के नेता राशिद अल्वी जय श्री राम कहने वालों को निशाचर (राक्षस) बता रहे हैं। राम भक्तों के प्रति कांग्रेस के विचारों में कितना जहर घुला हुआ है।"

क्यों बीजेपी के जाल में उलझ जाती है कांग्रेस ?
भाजपा ने खुर्शीद के बयान के लिए सीधे कांग्रेस चीफ सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर हमला किया है। पार्टी ने सोनिया से कहा है यदि वो हिंदुओं का सम्मान करती हैं तो उनके बयान की व्याख्या करें। पार्टी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा है कि 'यदि आप चुप रहती हैं तो यह साफ हो जाएगा कि आपकी विचारधार हिंदू-विरोधी है।' उन्होंने यह भी कहा है कि 'जब कांग्रेस सत्ता में थी तो 'हिंदू आतंकवाद' जैसे शब्दों का आविष्कार किया था।' भाजपा चाहे जितने भी हमले करे, कांग्रेस इस मामले खुर्शीद या अल्वी पर किसी तरह की कार्रवाई करेगी पिछले रिकॉर्ड से इसकी संभावना तो दूर-दूर तक नजर नहीं आती। ऐसे में भाजपा इन आपत्तिजनक बयानों को अपने फायदे के लिए नहीं भुनाएगी, ऐसा मानने का भी कोई कारण नहीं है।












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