'ब्लैकमेल नहीं करूंगा से ब्रेकफास्ट टेबल तक...', DK Shivakumar ने क्यों दिया सिद्धारमैया के लिए बलिदान, समझिए

DK Shivakumar , आखिरकार कांग्रेस ने कर्नाटक सीएम को लेकर फैसला कर लिया है। मुख्यमंत्री का पद सिद्धारमैया के पास गया है जबकि डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम का पद दिया गया है।

Why did DK Shivakumar sacrifice for Siddaramaiah know all these points

Karnataka CM name: 'कर्नाटक प्रदेश का सुरक्षित भविष्य और हमारे लोगों का कल्याण ही हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इसकी गारंटी के लिए हम लोग एकजुट हैं...'। कांग्रेस की तरफ से सीएम और डिप्टी सीएम के नाम का ऐलान होने के ठीक बाद कर्नाटक के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के लिए खुद को बड़ा दावेदार मान रहे डीके शिवकुमार ने ये ट्वीट किया।

हालांकि इस ट्वीट से पहले की कहानी काफी सस्पेंस भरी रही। दिल्ली के लिए बेंगलुरु से निकलते वक्त जब डीके शिवकुमार से सीएम पद को लेकर उनकी राय मांगी गई तो उन्होंने कहा था कि कांग्रेस आलाकमान का जो भी फैसला रहे, ना तो वो पार्टी को धोखा देंगे और ना ही ब्लैकमेल करेंगे।

इसके बाद गुरुवार को एक तस्वीर जारी हुई, जिसमें डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया ब्रेकफास्ट टेबल पर साथ बैठकर नाश्ता करते हुए नजर आए। आइए समझते हैं कि डीके शिवकुमार के सामने वो कौन सी बातें थी, जिनके लिए उन्हें सीएम पद से पीछे हटना पड़ा।

ईडी-सीबीआई की कार्रवाई
डीके शिवकुमार के खिलाफ ईडी और सीबीआई द्वारा कई केस दर्ज किए गए हैं। जिसके चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। वहीं कर्नाटक के डीजीपी को नया सीबीआई डायरेक्टर बनाया गया है। जिसके साथ डीके का 36 का आंकड़ा है। ऐसे में कांग्रेस नहीं चाहेगी कि कर्नाटक में उसके सीएम के खिलाफ कोई कार्रवाई हो और वह कमजोर दिखे।

डीके के पास अभी समय है.....
डीके शिवकुमार पूर्व सीएम सिद्धारमैया के मुकाबले अभी यंग है। उनके पास राज्य की सत्ता संभालने के लिए वक्त है। सैद्धारमैया का शायद यह आखिरी टर्म हो। बढ़ती उम्र के चलते वह आने वाले सालों में उतने सक्रिय नहीं रहेंगे। ऐसे में राज्य में सबसे बड़े नेता डीके शिवकुमार ही होंगे।

डीके पर सोनिया गांधी का भरोसा
डीके शिवकुमार कर्नाटक के एक ऐसे नेता हैं, जो सोनिया गांधी के काफी करीबी माने जाते हैं। यही वजह थी कि सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी की पहली पसंद डीके थे। सूत्रों के मुताबिक डीके को सोनिया गांधी की ओर से ऐसा भरोसा दिलाया गया है कि, उन्हें इस बलिदान का रिवॉर्ड दिया जाएगा। अभी पार्टी की बेहतरी के लिए इस फैसले को स्वीकार कर लीजिए। करीबी सूत्रों का कहना है कि डीके ने कहा कि उन्होंने गांधी परिवार और पार्टी के लिए त्याग किया है।

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कांग्रेस के संकट मोचक
शीर्ष नेतृत्व की नजरों में डीके शिवकुमार की छवि एक विश्वासपात्र कांग्रेसी की है। कई मौकों पर डीके ने इसे प्रत्यक्ष तौर पर साबित भी किया है। फिर चाहे वह पिछली सरकार के समय विधायकों को बचाने की बात हो या फिर अन्य मामलों में डीके पार्टी के लिए कई बार संकट मोचक बने हैं। डीके ने खुद इस छवि की लाज रखी है।

2024 में कांग्रेस के लिए अहम हैं डीके

डीके शिवकुमार को उनके संगठनात्मक कौशल और चंदा लाने की क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए अगले साल लोकसभा चुनाव तक कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर रखना है। पार्टी कर्नाटक की 24 लोकसभा सीटों पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रही है। शिवकुमार ने कहा कि मैंने पार्टी हित को ध्यान में रखते हुए इस फॉर्मूले पर अपनी सहमति दी है। मैं अगले साल लोकसभा चुनाव की जिम्मेदारियां उठाने के लिए तैयार हूं।

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