• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

कश्मीर में बीजेपी नेता ने क्यों उठाया पत्थर?

By Bbc Hindi
कश्मीर में बीजेपी नेता ने क्यों उठाया पत्थर?

जम्मू कश्मीर में जहाँ एक और नौजवान पत्थरबाजों को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए सरकार द्वारा अथक प्रयास किये जा रहे हैं वहीं दूसरी और भाजपा नेता और सरकार में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त पहाड़ी सलाहकार बोर्ड के उपसभापति कुलदीप राज गुप्ता रविवार को थोड़ी देर के लिए 'पत्थरबाज़' बन गए.

ये वाकया तब हुआ जब राजौरी ज़िला प्रशासन ने सरकारी ज़मीन से 'अतिक्रमण हटाओ' अभियान के तहत कथित तौर पर सरकारी ज़मीन पर बनी उनके बेटों की दुकानें गिराकर कब्ज़ा खाली करवाया.

कुलदीप राज गुप्ता इस इलाके के एक कद्दावर नेता रहे हैं और लम्बे समय से राजौरी शहर के बीचों-बीच बने बाज़ार में उनके बेटों की कपड़े की दुकानें चल रहीं थी.

लेकिन रविवार की सुबह जब जिला प्रशासन के दस्ते जेसीबी मशीनों, पुलिस और अर्धसैनिक बल के साथ मौके पर पहुंचे और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर ही रहे थे, तभी कुलदीप राज गुप्ता भी मौके पर पहुँच गए.

दुकानें गिरती देख उठाया पत्थर

वहां पहुँचकर जब उन्होंने ज़िला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बहस करना शुरू किया और अपनी तरफ से अतिक्रमण दस्ते को रोकने का भरपूर प्रयास किया तो उनकी एक ना चली.

ज़िला प्रशासन के अधिकारियों के पास लगभग 73 ऐसी इमारतों को हटाकर कब्ज़ा खाली करवाने का आदेश था जो सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा कर बनाई गईं थी.

अपनी आँखों के सामने अपने बेटों की दुकानें गिरती देख कुलदीप राज गुप्ता ने बिना अपनी उम्र और अपने पद का लिहाज़ किये पत्थर उठा लिया. इससे पहले कि वो किसी सुरक्षाकर्मी पर पत्थर बरसाते, मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनके हाथ से पत्थर छीन लिया.

बीबीसी हिंदी से बातचीत में कुलदीप राज गुप्ता ने कहा, "मैंने पत्थर किसी पुलिस वाले को मारने के लिए नहीं उठाया था."

उनका कहना था कि जिस समय उन्होंने अपनी आँखों के सामने कानून की धज्जियां उड़ती देखीं, उनसे रहा नहीं गया और उन्होंने खुद को मारने के लिए पत्थर उठा लिया था.

उन्होंने अपने बचाव में यह भी कहा कि जिस ज़मीन पर उनके बेटों ने दुकानें बना रखी थीं वो ज़मीन 1991 से उनके पास हैं.

उन्होंने कहा कि गवर्नर रूल के समय गवर्नर के सलाहकार ने खुद यह ज़मीन उनको लीज़ पर दी थी.

'कानून के मुताबिक कार्रवाई'

सरकारी दस्तावेज़ का हवाला देते हुए कुलदीप राज गुप्ता बताते हैं कि 1997 में राजस्व विभाग ने ज़मीन उनके नाम कर दी थी.

कुलदीप राज गुप्ता को इस बात का अफ़सोस है कि जब उन्होंने खुद राजौरी की डिप्टी कमिश्नर से मिलकर उन्हें इस बात से अवगत करवाया था और उनसे यह आश्वासन भी मिला था कि दुकानें नहीं तोड़ी जाएँगी, तो फिर कैसे सरकारी पंजा चला और इमारत तोड़ी गई.

वहीं, राजौरी के डिप्टी कमिश्नर डॉक्टर शाहिद चौधरी ने बीबीसी हिंदी को बताया कि ज़िला प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के लिए जो कार्रवाई की वो किसी एक व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि आम जनता को पेश आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए की गई थी.

डॉक्टर शाहिद चौधरी ने यह बात भी साफ़ की कि जिस ज़मीन पर कब्ज़ा खाली करवाया गया वो असल में पुरानी मुग़ल रोड का हिस्सा थी.

सरकारी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 1874 के रिकॉर्ड के मुताबिक यह ज़मीन मुग़ल रोड का हिस्सा थी जिसे बाद में 1969 में पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के हवाले कर दिया गया था.

डॉ चौधरी का कहना था कि खसरा नंबर 432 के अंतर्गत बहुत बड़ा हिस्सा आता है और राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार इस ज़मीन की मालिक सरकार है और इसे इस्तेमाल करने के लिए पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट को सौंपी गयी है.

पहले ही दे दिया गया था नोटिस

उन्होंने 22 दिसम्बर 1997 के एक और सरकारी आदेश का हवाला देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने उस समय ऐसे सभी कब्जों को ग़ैर क़ानूनी क़रार दिया था जो सरकारी ज़मीन पर लम्बे समय से बने हुए थे और नोटिस दिए जाने के बाद भी खाली नहीं हो सके थे.

डॉ चौधरी ने यह भी साफ़ किया कि कुलदीप राज गुप्ता के पास भी खसरा नंबर 432 के अंतर्गत ज़मीन के कागज़ हैं लेकिन जिस जगह उन्होंने दुकानें बनाई हैं वो सरकारी ज़मीन है और उस जगह से बहुत दूर है जहाँ कुलदीप राज गुप्ता के नाम ज़मीन नाम हुई है.

उन्होंने कहा कि अतिक्रमण की कार्रवाई कानून के मुताबिक हुई है. उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने अतिक्रमण व सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से इमारतें बना रखी थीं, उन्हें नोटिस जारी कर दिया गया था. 73 में से 59 इमारतें ऐसी थी, जिन्होंने सड़क पर दो से 12 फीट तक अवैध कब्जा कर रखा था.

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Why did the BJP leader in Kashmir pick up stones

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X