MNC ही नहीं भारत में भी लोगों ने कोवैक्सिन को क्यों बदनाम किया? CJI एनवी रमना ने बताई इसकी वजह

हैदराबाद, 26 दिसंबर: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कोरोना वायरस की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सिन को लेकर बहुत गंभीर जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि भारत में बनी इस वैक्सीन को सफलता ना मिले, इसके लिए बहु-राष्ट्रीय कंपनियां तो लगी ही हुई थीं, कई भारतीय भी इस खेल में शामिल थे। गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन से कोवैक्सीन को मान्यता दिलाने के लिए भारत बायोटेक को नाकों चने चबाने पड़े हैं। क्योंकि, इसके खिलाफ काफी दुष्प्रचार किया गया था। इसके खिलाफ शिकायतें की गई थीं। अब जब देश के मुख्य न्यायाधीश ही इसका खुलासा कर रहे हैं, तब यह साबित हो गया है कि कौन लोग अपने देश में बनी प्रभावी वैक्सीन के खिलाफ षड़यंत्र रच रहे थे।

कोवैक्सिन को बदनाम करने की कोशिश हुई- चीफ जस्टिस

कोवैक्सिन को बदनाम करने की कोशिश हुई- चीफ जस्टिस

भारत के चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सिन को लेकर बहुत बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है कि भारत बायोटेक की इस वैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन से मंजूरी मिलने में ना सिर्फ बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अड़ंगा लगाया, बल्कि भारत के अंदर के कुछ लोगों ने भी इसे बदमान करने की कोशिश की। गुरुवार को हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कोवैक्सिन को कोविड-19 और इसके नए वेरिएंट के खिलाफ भी प्रभावी बताते हुए कहा कि इस स्वदेशी वैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन से मान्यता मिलने से रोकने की कोशिश हुई। वे हैदराबाद में रमेनेनी फाउंडेशन की ओर से आयोजित एक अवार्ड कार्यक्रम में यह बात कही है।

कोवैक्सिन ने देश का नाम रौशन किया है- जस्टिस रमना

कोवैक्सिन ने देश का नाम रौशन किया है- जस्टिस रमना

सीजेआई रमना ने कहा कि 'एक तरफ कई बहु-राष्ट्रीय कंपनियों ने जैसे कि फाइजर और दूसरी तरफ भारत के अंदर से भी काफी लोगों ने कोवैक्सिन को गलत तरीके से बदनाम करने की कोशिश की। उन्होंने डब्ल्यूएचओ से भी इसकी शिकायत की थी और भारत में बनी इस वैक्सीन को मान्यता मिलने से रोकने की कोशिश की थी।' वे बोले कि 'कृष्णा (एल्ला) और (उनकी पत्नी) सुचित्रा ने इस स्तर पर काफी संघर्ष किया। उन्होंने आज देश का नाम रौशन किया है। ' वे बोले कि 'इस वैक्सीन को बनाने वाली हमारी तेलुगु कंपनी की महानता के बारे में दुनिया को बताने के लिए सभी तेलुगु लोगों को आगे आना चाहिए। इसने अब हमारे देश के नाम को शोहरत दिलाई है।'

कोवैक्सिन को क्यों बदनाम किया गया ?

कोवैक्सिन को क्यों बदनाम किया गया ?

भारत में विकसित कोविड वैक्सीन को मान्यता मिलने में अड़ंगा लगाने की वजह के विस्तार में जाते हुए जस्टिस रमना बोले, 'मैं आपको वैक्सीन के बारे में एक चीज कहना चाहता हूं। कई स्टडी में कहा गया है कि कोवैक्सिन प्रभावी है और नए वेरिएंट पर भी काम करता है......लेकिन, कई लोगों ने इसकी आलोचना इसलिए की, क्योंकि यह भारत में बनी है। कुछ ने तो इसके खिलाफ डब्ल्यूएचओ से भी शिकायत कर दी।' उन्होंने कहा है कि तेलुगु लोगों को अपने साथियों को दुनिया में प्रोत्साहित करना चाहिए। यह याद रखना चाहिए कि हमें आपस में एकता बनाकर रखनी है....तेलुगु भाषा और संस्कृति की महानता को भी बढ़ावा मिलना चाहिए। इस कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में उपस्थित थे, जिसमें भारत बायोटक को अमेरिका स्थित रमेनेनी फाउंडेशन की ओर से 2021 के विशिष्ठ पुरस्कार से नवाजा गया है।

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    इस मौके पर सीजेआई ने कहा कि 'क्योंकि कई वेरिएंट आ चुके हैं, भारतीय वैक्सीन का अच्छा इस्तेमाल हो रहा है। कई कंपनियों ने भारतीय वैक्सीन को नीचा दिखाने की कोशिश की, लेकिन यह सफल हो गया। हमें अपनी मातृभूमि, मातृभाषा और मातृदेशम का सम्मान और प्यार करना चाहिए। '

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