तो इस वजह के चलते कोर्ट ने लालू व अन्य दोषियों के खिलाफ सजा का ऐलान नहीं किया
Recommended Video

रांची। चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव के दोषी करार दिए जाने के बाद आज उन्हें सजा सुनाई जानी थी। लालू प्रसाद यादव के अलावा 15 अन्य दोषियों को भी कोर्ट आज सजा सुनाने वाली थी, लेकिन इसे गुरुवार तक के लिए टाल दिया गया है। दरअसल वरिष्ठ वकील विंदेश्वरी प्रसाद के निधन के कारण आज वकीलों ने 1.30 बजे के बाद किसी भी तरह के काम को करने से इनकार कर दिया था, वकीलों ने शोकसभा का आयोजन करने की बात कही थी, जिसके चलते कोर्ट ने आज इस मामले में फैसला टाल दिया। कोर्ट के फैसले से पहले लालू प्रसाद यादव व अन्य दोषियों के वकीलों ने कोर्ट से अपील की थी कि वह इन्हें सजा सुनाने से पहले बहस की इजाजत दे। जिसे देखते हुए कोर्ट ने आज के फैसले को टाल दिया। आपको बता दें कि लालू प्रसाद यादव रांची के बिरसा मुंडा कारागार जेल में बंद हैं, उन्हें आज सीबीआई की विशेष अदालत में सजा के ऐलान से पहले पेश करने के लिए लाया गया था, इस दौरान बड़ी संख्या में लालू समर्थक और उनकी पार्टी के समर्थन मौजूद थे। लोगों की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

बहस की मांग
सजा के ऐलान से पहले लालू प्रसाद यादव के वकीलों ने अपील की थी कि सजा के ऐलान से पहले इसपर बहस की जाए, जिसके बाद ही सजा का ऐलान किया जाए। यहां गौर करने वाली बात यह है कि आज कोर्ट की कार्रवाई 1.30 तक ही होनी थी, लिहाजा पूरी प्रक्रिया को इससे पहले पूरा किया जाना था। ऐसे में कोर्ट ने सजा का ऐलान इस तय समय से पहले करने से इनकार करते हुए कल तक के लिए टाल दिया है।

16 लोगों को दोषी करार दिया गया
गौरतलब है कि लालू के अलावा अन्य 16 आरोपियों को भी इस मामले में दोषी करार दिया गया है। कोर्ट ने लालू को धारा 420, 120 बी और पीसी एक्ट की धारा 13( 2) के तहत दोषी करार दिया था। यह मामला 1994 से 1996 के बीच देवघर जिला कोषागार का है जहां से फर्जी तरीके से कोष निकाला गया था।

इन्हें कैसे पहले से पता चलता है, मिलीभगत है
रघुवंश प्रसाद ने कहा हथा कि कोर्ट का निर्णय आईटी, ईडी और सीबीआई के फैसले से पहले उनके प्रवक्ता लोग भविष्यवाणी करते हैं, हम इससे क्या समझे, इसमे सबकी मिलीभगत है, सबकी ताल मिली है और प्रभाव में चल रहे हैं। सब लोग पहले से कैसे जान जाते हैं कि सीबीआई, ईडी, आईटी और न्यायालय का क्या फैसला आने वाला है, इन्हे पहले से कैसे मालूम हो जाता है। हम लोगों को यह सब बताएंगे और बड़ा मूवमेंट खड़ा करेंगे, 2018 तक हम लोग बिहार सरकार की विदाई कर देंगे।

11 लोगों की मौत
21 साल पुराने इस मामले में सीबीआई ने शुरु में 34 लोगों को आरोपी बनाया था। इसमें 11 की मौत ट्रायल के दौरान हो गई। दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए और निर्णय के पूर्व ही अपना दोष स्वीकार कर लिया। सीबीआई ने इस मामले में देवघर कोषागार से फर्जी बिल बना कर राशि की निकासी करने का आरोप लगाया था। लालू पर आरोप था कि उन्हे इस मामले की पूरी जानकारी थी बावजूद इसके उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।
इसे भी पढ़ें- लालू 'मिश्रा' होते तो नहीं जाते जेल! 10 दिनों में बेटे को भी देना है जवाब












Click it and Unblock the Notifications