गंभीर रोगों से पीड़ित लोगों के लिए क्यों जरूरी है कोरोना वायरस वैक्सीन, ICMR की रिसर्च में हुआ खुलासा
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कोमोर्बिडिटी (सहरुग्णता) वाले रोगियों को विशेष तौर पर कोरोना वायरस की वैक्सीन लगवाने को कहा है।
नई दिल्ली। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कोमोर्बिडिटी (सहरुग्णता) वाले रोगियों को विशेष तौर पर कोरोना वायरस की वैक्सीन लगवाने को कहा है। अब तक की स्टडी से पता चला है कि सहरुग्णता वाले रोगियों में कोरोना वायरस की मृत्यू दर सामान्य रोगियों की मत्यु दर के मुकाबले 15 से 20 प्रतिशत अधिक है।

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क्या होती है सहरुग्णता (कोमोर्बिडिटी)
एक से अधिक बीमारियों जैसे ब्लड प्रेशर, मधुमेह, फेंफड़े की बीमारी या ह्रदय रोग से पीड़ित व्यक्ति सहरुग्णता की श्रेणी में आते हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने ऐसे रोगियों को आवश्यक रूप से कोरोना वायरस का टीका लगवाने की सलाह दी है। आईसीएमआर के अनुसार ऐसे रोगियों में कोरोना वायरस के फैलने की दर काफी ज्यादा है और सामान्य व्यक्ति के मुकाबले सहरुग्णता वाले व्यक्ति में कोरोना वायरस की मृत्यु दर 15-25 प्रतिशत अधिक पाई गई है।
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आईसीएमआर ने कहा है कि ऐसे व्यक्तियों को विशेष तौर पर देखभाल की जरूरत पड़ती है और इसके आईसीयू में भर्ती होने की संभावन बढ़ जाती है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के नेशनल टास्क फोर्स के संचालन अनुसंधान समूह के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा ने बताया, "यह देखा गया है कि कोमोरबिडिटी वाले लोगों में मृत्यु और आईसीयू के प्रवेश का जोखिम लगभग 15-20 गुना बढ़ जाता है, ऐसे लोगों को टीकाकरण से सबसे अधिक लाभ होगा।"
गौरतलब है, देश में चलाया जा रहे कोरोना वायरस टीकाकरण अभियान के तहत सोमवार, 8 फरवरी तक, 6 मिलियन से अधिक लाभार्थियों (60,35,660) को टीका लगाया गया, जिसमें देश में 54,12,270 स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ता और 6,23,390 फ्रंटलाइन कार्यकर्ता शामिल थे।












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